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मतदाताओं ने इस बार तोड़े प्रत्याशियों के भ्रम
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फतेहाबाद। फतेहाबाद जिले की तीनों विधानसभाओं पर चुनाव परिणाम घोषित हो चुके हैं। फतेहाबाद में भाजपा प्रत्याशी दुड़ाराम व रतिया से भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मण नापा कड़े मुकाबले में जीत हासिल करने में सफल रहे। लेकिन टोहाना से भाजपा के प्रदेेशाध्यक्ष सुभाष बराला को करारी हार का सामना करना पड़ा। फतेहाबाद में दुड़ाराम को जहां बिश्नोई बेल्ट से उम्मीद के मुताबिक बढ़त नहीं मिली, वहीं उनके सामने लड़ रहे जजपा प्रत्याशी डॉ. विरेन्द्र सिवाच को भट्टू बेल्ट से अच्छे मत नहीं मिले। यही दोनों फैक्ट दुड़ाराम के लिए जीत व सिवाच के लिए हार का कारण बने।
भट्टू बेल्ट में दुड़ाराम को अपने निजी संबंधों के चलते लाभ मिला और वह आखिरी क्षणों में बाजी मारने में सफल रहे। जजपा प्रत्याशी डॉ.विरेन्द्र सिवाच को उम्मीद थी कि वह भट्टू की जाट बेल्ट से 12 से अधिक की बढ़त लेकर निकलेंगे, लेकिन भट्टू की जाट बेल्ट ने उन्हें केवल 4964 मतों की बढ़त दी। यहां दुड़ाराम को जाटों के अच्छे खासे वोट मिले। डॉ. सिवाच चाहकर भी इस बेल्ट को जाट-नॉन जाट में परिवर्तित नहीं कर पाए।
जाट बेल्ट में दुड़ाराम को 20 हजार 788 मत
जाट बेल्ट में दुड़ाराम को 20 हजार 788 मत, डॉ. विरेन्द्र सिवाच को 25 हजार 752 और प्रहलाद को 7 हजार 472 मत मिले। वास्तविकता है कि जब जाट बेल्ट की बात आती है तो राजनीतिक इस बात को भूल जाते हैं कि जाट बैल्ट में आध्ेा से ज्यादा तो गैर जाट रहते हैं। इसी प्रकार बिश्नोई बेल्ट में दुड़ाराम को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
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बिश्नोई बेल्ट के गांव धंागड़ व बड़ोपल में मामूली बढ़त से विजेता रहे दुड़ाराम
पैतृक गांव एमपी रोही ने तो पूरा साथ दिया, लेकिन धांगड़ और बड़ोपल तो दुड़ाराम को हराने पर तुला था। धांगड़ में तो दुड़ाराम को मात्र 1100 और बड़ोपल से 1300 की बढ़त मिली। जबकि दुड़ाराम दावा कर रहे थे कि उन्हें धांगड़ से 2000 और बड़ोपल से 2500 की बढ़त मिलेगी। खाराखेड़ी में दोनों उम्मीदवार बराबर रहे। दुड़ाराम को उन्हें बिश्रोई बैल्ट से मात्र 8402 मतों की बढ़त मिली, जबकि दुड़ाराम को उम्मीद थी कि वह इस बार यहां से 12 से 15 हजार की बढ़त लेंगे। लगभग यही स्थित भूना शहर की रही। भूना शहर में दुर्डाम व उनके समर्थक 5 हजार की बढ़त का दावा कर रहे थे, लेकिन उन्हें यहां से 2500 की ही बढ़त मिली। डॉ. सिवाच को उम्मीद थी कि गोरखपुर गांव से उन्हें 3 से 4 हजार की बढ़त मिलेगी, लेकिन उन्हें गोरखपुर से मात्र 1700 की बढ़त ही मिल पाई। लेकिन मोची चौबारा से डॉ.सिवाच करीब एक हजार की बढ़त लेने में सफल रहे। नहला व दहमान में दोनों दल बराबरी पर रहे। फतेहाबाद ब्लॉक के जाट गांव धारनियां में जरूर डॉ.सिवाच को 400 के करीब मतों की बढ़त मिली। बनगांव में जजपा को 800 मतों की प्रत्याशित बढ़त मिली।
शहर भाजपा और जजपा में बंटा नजर आया
फतेहाबाद शहर में दुड़ाराम का खासा विरोध हुआ। फतेहाबाद शहर में कुल 34 हजार 963 मतदाताओं ने मत डाले। जिनमें भाजपा को 14991, जजपा को 13598 जबकि कांग्रेस को मात्र 4721 मतों से संतोष करना पड़ा। पूरा शहर भाजपा और जजपा में बंटा नजर आया। हालत यह थी कि कभी कोई जीतता नजर आता तो कभी कोई। जब ईवीएम खुली तो सच्चाई भी यही थी। दोनों मुख्य उम्मीदवारों के लगभग बराबर वोट थे। दुड़ाराम शहर के बूथ नंबर-10 से 55 पर हुए मतदान में 1393 मतों से विजयी रहे। शहर में खास बात यह रही कि कांग्रेस प्रत्याशी प्रहलाद सिंह को भी अप्रत्याशित तौर पर 4721 मत मिले।
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भट्टू बेल्ट में दुड़ाराम को अपने निजी संबंधों के चलते लाभ मिला और वह आखिरी क्षणों में बाजी मारने में सफल रहे। जजपा प्रत्याशी डॉ.विरेन्द्र सिवाच को उम्मीद थी कि वह भट्टू की जाट बेल्ट से 12 से अधिक की बढ़त लेकर निकलेंगे, लेकिन भट्टू की जाट बेल्ट ने उन्हें केवल 4964 मतों की बढ़त दी। यहां दुड़ाराम को जाटों के अच्छे खासे वोट मिले। डॉ. सिवाच चाहकर भी इस बेल्ट को जाट-नॉन जाट में परिवर्तित नहीं कर पाए।
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जाट बेल्ट में दुड़ाराम को 20 हजार 788 मत
जाट बेल्ट में दुड़ाराम को 20 हजार 788 मत, डॉ. विरेन्द्र सिवाच को 25 हजार 752 और प्रहलाद को 7 हजार 472 मत मिले। वास्तविकता है कि जब जाट बेल्ट की बात आती है तो राजनीतिक इस बात को भूल जाते हैं कि जाट बैल्ट में आध्ेा से ज्यादा तो गैर जाट रहते हैं। इसी प्रकार बिश्नोई बेल्ट में दुड़ाराम को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
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बिश्नोई बेल्ट के गांव धंागड़ व बड़ोपल में मामूली बढ़त से विजेता रहे दुड़ाराम
पैतृक गांव एमपी रोही ने तो पूरा साथ दिया, लेकिन धांगड़ और बड़ोपल तो दुड़ाराम को हराने पर तुला था। धांगड़ में तो दुड़ाराम को मात्र 1100 और बड़ोपल से 1300 की बढ़त मिली। जबकि दुड़ाराम दावा कर रहे थे कि उन्हें धांगड़ से 2000 और बड़ोपल से 2500 की बढ़त मिलेगी। खाराखेड़ी में दोनों उम्मीदवार बराबर रहे। दुड़ाराम को उन्हें बिश्रोई बैल्ट से मात्र 8402 मतों की बढ़त मिली, जबकि दुड़ाराम को उम्मीद थी कि वह इस बार यहां से 12 से 15 हजार की बढ़त लेंगे। लगभग यही स्थित भूना शहर की रही। भूना शहर में दुर्डाम व उनके समर्थक 5 हजार की बढ़त का दावा कर रहे थे, लेकिन उन्हें यहां से 2500 की ही बढ़त मिली। डॉ. सिवाच को उम्मीद थी कि गोरखपुर गांव से उन्हें 3 से 4 हजार की बढ़त मिलेगी, लेकिन उन्हें गोरखपुर से मात्र 1700 की बढ़त ही मिल पाई। लेकिन मोची चौबारा से डॉ.सिवाच करीब एक हजार की बढ़त लेने में सफल रहे। नहला व दहमान में दोनों दल बराबरी पर रहे। फतेहाबाद ब्लॉक के जाट गांव धारनियां में जरूर डॉ.सिवाच को 400 के करीब मतों की बढ़त मिली। बनगांव में जजपा को 800 मतों की प्रत्याशित बढ़त मिली।
शहर भाजपा और जजपा में बंटा नजर आया
फतेहाबाद शहर में दुड़ाराम का खासा विरोध हुआ। फतेहाबाद शहर में कुल 34 हजार 963 मतदाताओं ने मत डाले। जिनमें भाजपा को 14991, जजपा को 13598 जबकि कांग्रेस को मात्र 4721 मतों से संतोष करना पड़ा। पूरा शहर भाजपा और जजपा में बंटा नजर आया। हालत यह थी कि कभी कोई जीतता नजर आता तो कभी कोई। जब ईवीएम खुली तो सच्चाई भी यही थी। दोनों मुख्य उम्मीदवारों के लगभग बराबर वोट थे। दुड़ाराम शहर के बूथ नंबर-10 से 55 पर हुए मतदान में 1393 मतों से विजयी रहे। शहर में खास बात यह रही कि कांग्रेस प्रत्याशी प्रहलाद सिंह को भी अप्रत्याशित तौर पर 4721 मत मिले।