फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   happy birthday Fatehabad

23 बरस का फतेहाबाद, विकास के अनेक आयाम स्थापित, लेकिन कई हसरतें आज भी अधूरी

Tue, 14 Jul 2020 11:45 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2020 11:45 PM IST
विज्ञापन
happy birthday Fatehabad
फतेहाबाद शहर की ड्रोन से ली गई तस्वीर । - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद जिला आज से 23वें बरस में प्रवेश कर रहा है। अपने 23 साल के सफर में फतेहाबाद जिले ने कई उपलब्धियों को छुआ तो कई ख्वाहिशें इतने बरस के बाद भी अधूरी ही हैं जो पूरी होना बाकी है। इन सालों में फतेहाबाद जिले ने सत्ता में भी हिस्सेदारी भी हासिल की तो जिम्मेदार विपक्षी की भूमिका निभाने में भी पीछे नहीं रहा। रेल की सीटी सुनना और चिल्ली झील की किश्ती की सवारी फतेहाबाद के लोगों की सबसे पुरानी और दिलचस्प मांग है। वहीं टोहाना में नए बस स्टैंड का ख्वाब तो रतिया वासियों के लिए हेपेटाइटिस-सी का स्थानीय इलाज पहली प्राथमिकता है। बीते 23 सालों में फतेहाबाद जिले को सरकारों से मिला भी बहुत कुछ। फतेहाबाद शहर को नया बस स्टैंड और अनाजमंडी मिल चुके हैं तो टोहाना में बाईपास के लिए भागदौड़ शुरू हो चुकी है। रतिया में डीएसपी की स्थायी नियुक्ति की कोशिशें अंतिम चरण में हैं।
विज्ञापन

फतेहाबाद में रेल की सीटी और चिल्ली में किश्ती की सवारी आज भी अधूरी
यूं तो फतेहाबाद शहर को बीते 23 सालों में बहुत कुछ मिला लेकिन कई ऐसी हसरतें हैं जो आजतक अधूरी हैं। मसलन फतेहाबाद भले ही जिला मुख्यालय है, लेकिन रेलगाड़ी की सीटी सुनने की ललक दशकों से फतेहाबाद वासी दिलों में बसाए बैठे हैं। इसी तरह जवाहर चौक के पास स्थित चिल्ली झील बनने के बाद यहां पर बोटिंग भी शहरवासियों के लिए पुराना सपना है। इसके अलावा अस्पताल की नई बिल्डिंग को लेकर भी स्थिति कशमकश वाली ही नजर आती है।
विज्ञापन

रतिया हेपेटाइटिस-सी के इलाज और डीएसपी के ठहराव से आज तक वंचित
रतिया शहर और हलके की बात की जाए तो रतिया हेपेटाइटिस सी बीमारी के कारण पूरे प्रदेश में चर्चित हो गया है। इससे ज्यादा चर्चित हेपेटाइटिस-सी के इलाज को लेकर राजनेताओं के आश्वासन भी रहे हैं। अभी भी रतिया के लोगों को हेपेटाइटिस-सी के इलाज के लिए रतिया से बाहर जाना पड़ता है। अगर रोगी गरीबी रेखा से नीचे नहीं हैं तो भारी-भरकम खर्च भी करना पड़ता है। ये कसक लोगों में बनी हुई है। इसके अलावा शायद रतिया एकमात्र ऐसा ब्लॉक होगा जिसमें एसडीएम तो बैठता है लेकिन डीएसपी के लिए रतिया को अभी भी फतेहाबाद का मुंह ताकना पड़ता है। हालांकि अब कहा जा रहा है कि रतिया में स्थायी डीएसपी की नियुक्त की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। टोहाना को आज भी नए बस स्टैंड का इंतजार, खेल स्टेडियम लगभग पूरा
विज्ञापन
विज्ञापन

टोहाना को नहरों का शहर कहा जाता है। लगभग 7 नहरें बहती हैं शहर के बीचोंबीच से। बारिश के दिनों में एक आठवीं भी नजर आने लगती है लेकिन वो नहर नहीं बल्कि टोहाना का मुख्य बस स्टैंड है तो बारिश के बाद झील और नहर की शक्ल अख्तियार कर लेता है। सरकार से बस स्टैंड का ऐलान हो चुका है लेकिन अफसरी ढिलाई यहां भी विकास के आड़े आती दिखती है। खेल स्टेडियम का काम लगभग पूरा हो चुका है।
जिला बनाने के पीछे रहे राजनीतिक कारण, उपचुनाव को ध्यान में रख बंसीलाल ने किया था ऐलान
फतेहाबाद को जिला बनाने के पीछे तकनीकी कारण कम और राजनीतिक कारण ज्यादा बताए जाते हैं। 1996 में प्रदेश में बंसीलाल मुख्यमंत्री थे और उनकी सरकार में मंत्री रहे सरदार हरमिंद्र सिंह का अचानक निधन हो गया। उपचुनाव को ध्यान में रखकर तत्कालीन सीएम बंसीलाल ने फतेहाबाद को जिला बनाने का ऐलान कर दिया। हालांकि ये घोषणा भी उनके काम नहीं आई और फतेहाबाद उपचुनाव में हरमिंद्र सिंह की पत्नी के सामने उतरे संपत सिंह ने हरा दिया।
नेशनल हाइवे की वजह से टोहाना की बजाए फतेहाबाद को चुना गया था जिला
फतेहाबाद उपचुनाव तो एक राजनीतिक कारण था फतेहाबाद को जिला बनाने की योजना का। असल कारण तो तकनीकी था जिसके चलते सरकार को उपचुनाव के दौरान फायदा उठाने के लिए फतेहाबाद को जिला घोषित करने का मौका मिल गया। तकनीकी कारणों का जिक्र किया जाए तो फतेहाबाद का नेशनल हाइवे पर स्थित होना जिला मुख्यालय की रेस में इसे टोहाना से कई गुणा आगे ले गया। टोहाना फतेहाबाद के मुकाबले ज्यादा बड़ा शहर है और नहरों की नगरी भी कही जाती है।
नशा तस्करी ने बिगाड़ी जिले की छवि, एसपी-मंत्री के बीच का विवाद भी छाया
यूं तो फतेहाबाद जिला शांतिप्रिय माना जाता रहा है लेकिन पिछले एक दशक में नशे ने फतेहाबाद जिले की छवि को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। एक समय में खेती के कारण चर्चा में रहने वाला फतेहाबाद जिला अब नशे के बढ़ते मामलों के चलते पूरे प्रदेश में बदनाम हो चुका है। बीते सालों में प्रदेश के मंत्री अनिल विज व तत्कालीन एसपी संगीता कालिया के बीच नशे को लेकर हुआ सार्वजनिक विवाद पूरे देश ने देखा था जिसके चलते भी फतेहाबाद की काफी बदनामी हुई थी।

ऐतिहासिकता भी सिमटे है फतेहाबाद
फतेहाबाद जिला ऐतिहासिकता भी अपने इतिहास में समेटे हुए है। फतेहाबाद शहर की पुरानी तहसील के पास स्थित फिरोजशाह की लाट पुरातत्व विभाग के संरक्षण में अपना इतिहास समेटे हुए है। ये स्तंभ फिरोजशाह तुगलक द्वारा बनवाई गई थी। इस लाट का निचला हिस्सा अशोक स्तंभ का एक हिस्सा है और ऊपरी हिस्से पर मौर्य कालीन ब्राह्ी लिपि में लिखे अक्षर अंकित हैं। जानकारी अनुसार फिरोजशाह तुगलक इस लाट को हांसी से लेकर आया था और फतेहाबाद में अपने प्रिय पुत्र की याद में स्थापित कर दिया था। साल 1911 में भारत सरकार ने प्राचीन स्मारक अधिनियम के तहत इस लाट का अधिकरण कर लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed