{"_id":"68cee70c45a7dfefd804031b","slug":"god-can-never-be-found-through-wealth-fatehabad-news-c-127-1-shsr1020-140698-2025-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: धन दौलत के बल पर कभी भी प्रभु को नहीं पाया जा सकता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: धन दौलत के बल पर कभी भी प्रभु को नहीं पाया जा सकता
Sat, 20 Sep 2025 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 20 Sep 2025 11:10 PM IST
विज्ञापन
श्रीकृष्ण गौशाला रतिया के प्रांगण में आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में उपस्थित श्रद्ध
रतिया। श्रीकृष्ण गोशाला रतिया के प्रांगण में आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्य प्रदीप शास्त्री ने पांचवें दिन की कथा में बाल श्रीकृष्ण और शंकर के प्रसंग की कथा सुनाई। इसमें उन्होंने कहा कि धन दौलत के बल पर कभी भी प्रभु को नहीं पाया जा सकता।
आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन करने के लिए भगवान शंकर कैलाश पर्वत से पृथ्वी लोक पर आए। उनके द्वारा सुनाए गए भजन मईया दर्श करादे नंदलाल दे योगी आया दुरो चल के पर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। आगे प्रवचन करते हुए कथावाचक आचार्य प्रदीप शास्त्री ने कहा कि धर्म शास्त्र हमें जीवन में दिशा देते हैं। मनुष्य को शास्त्रों में ही पता चलता है कि बुराई और अच्छाई के बीच क्या फर्क है। ये हमें जीवन में सही फैसला लेने का विवेक प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रभु को हमेशा सच्चे मन वाले भक्त पसंद हैं। कर्म छोटा-बड़ा जैसा भी हो यदि उसे मन पवित्र करके तथा निस्वार्थ भाव से किया जाए तो प्रभु शीघ्र व अवश्य प्रसन्न हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य मोहमाया के जाल में फंसकर इधर-उधर भटक रहा है लेकिन उसे यह ज्ञान नहीं है कि माया इकट्ठी करने से मन को शांति नहीं मिल सकती, मन को शांति तो सच्चे प्रभु के नाम के जाप करने से ही मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इंसान को फल की इच्छा किए बिना कर्म करना चाहिए। धन दौलत के बल पर कभी भी प्रभु को नहीं पाया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रभु को केवल प्रेम से ही पाया जा सकता है।
विज्ञापन
आज के भंडारे की सेवा कृष्ण जिंदल, रविंदर बंसल, सुभाष बंसल द्वारा अपनी माता की याद में की गई। इस मौके पर काफी संख्या में श्रद्धालु व सेवादार उपस्थित थे।
विज्ञापन
आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन करने के लिए भगवान शंकर कैलाश पर्वत से पृथ्वी लोक पर आए। उनके द्वारा सुनाए गए भजन मईया दर्श करादे नंदलाल दे योगी आया दुरो चल के पर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। आगे प्रवचन करते हुए कथावाचक आचार्य प्रदीप शास्त्री ने कहा कि धर्म शास्त्र हमें जीवन में दिशा देते हैं। मनुष्य को शास्त्रों में ही पता चलता है कि बुराई और अच्छाई के बीच क्या फर्क है। ये हमें जीवन में सही फैसला लेने का विवेक प्रदान करते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि प्रभु को हमेशा सच्चे मन वाले भक्त पसंद हैं। कर्म छोटा-बड़ा जैसा भी हो यदि उसे मन पवित्र करके तथा निस्वार्थ भाव से किया जाए तो प्रभु शीघ्र व अवश्य प्रसन्न हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य मोहमाया के जाल में फंसकर इधर-उधर भटक रहा है लेकिन उसे यह ज्ञान नहीं है कि माया इकट्ठी करने से मन को शांति नहीं मिल सकती, मन को शांति तो सच्चे प्रभु के नाम के जाप करने से ही मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इंसान को फल की इच्छा किए बिना कर्म करना चाहिए। धन दौलत के बल पर कभी भी प्रभु को नहीं पाया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रभु को केवल प्रेम से ही पाया जा सकता है।
विज्ञापन
आज के भंडारे की सेवा कृष्ण जिंदल, रविंदर बंसल, सुभाष बंसल द्वारा अपनी माता की याद में की गई। इस मौके पर काफी संख्या में श्रद्धालु व सेवादार उपस्थित थे।