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Fatehabad News: कल से विराजेंगे गणपति, मिट्टी की छोटी मूर्तियों की ज्यादा मांग
Mon, 25 Aug 2025 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 25 Aug 2025 11:12 PM IST
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शहर के मुख्य रोड पर बिक्री के लिए रखी गई गणपति बप्पा की मूर्तियां। संवाद
फतेहाबाद। गणेश चतुर्थी पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। गणपति बप्पा के आगमन के लिए मिट्टी से बनी गणेश की मूर्तियों की बिक्री शुरू हो गई है। छोटी मूर्तियों की ज्यादा मांग ज्यादा है। मुरादाबाद क्षेत्र से आए कलाकारों ने एक से 9 फीट तक ऊंची मूर्तियां तैयार की हैं।
मूर्तिकार सोहन लाल ने बताया कि वह पिछले 5 साल से श्रीगणेश सहित अन्य देवी देवताओं की विभिन्न आकार की मूर्तियां बनाते हैं। उनकी मूर्ति बनाने की प्रेरणा उन्हें पिता से मिली। पिता काफी सालों से मूर्तियां बनाने का काम कर रहे है। उनके पास 300 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये की कीमत की मूर्तियां उपलब्ध हैं। इस बार छोटी मूर्तियों की मांग अधिक है। मूर्तिकार सोहन लाल ने बताया कि वह अपने क्षेत्र से ही मूर्तियों को तैयार करके इस क्षेत्र में बेचने के लिए आता है। ज्यादातर लोग छोटी मूर्तियों की खरीदारी कर रहे हैं क्योंकि इनका विसर्जन घर में ही कर देते हैं। सभी मूर्तियां मिट्टी की होती हैं इसलिए इनकी बाजार में ज्यादा मांग है। इनमें प्राकृतिक रंग जैसे हल्दी, चंदन और फूल का इस्तेमाल होता है। मूर्तियां पानी में आसानी से घुल जाती हैं। इससे जल निकायों को कोई नुकसान नहीं होता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मूर्ति विसर्जन युक्त पानी को घरों में पेड़-पौधों में डालना चाहिए। इससे घर भी शुद्ध होता है और गणेशजी की मूर्ति का अनादर भी नहीं होता है।
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10 दिन चलता है पर्व
गणेश चतुर्थी भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन गणपति बप्पा का स्वागत घर-घर में भक्ति, प्रेम और उत्साह के साथ किया जाता है। इस बार यह पर्व 27 अगस्त को मनाया जाएगा। यह उत्सव विघ्रहर्ता, बुद्धि और समृद्धि के देवता भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त गणपति बप्पा की प्रतिमा घरों व पंडालों में स्थापित करते हैं, मंत्रोच्चार और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। दस दिनों तक चलने वाला यह पर्व लोगों में भक्ति, उत्साह और सामूहिकता का संदेश देता है। गणपति की आराधना से जीवन में सुख-शांति और बाधाओं का नाश होता है। विसर्जन के समय गणपति बप्पा मोरया के जयघोष के साथ उन्हें विदाई दी जाती है।
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इस बार करीब 9 फीट के होंगे गणपति बप्पा
शहर के संन्यास आश्रम मंदिर में पिछले आठ सालों से गणेश चतुर्थी पर आयोजन होता है। इस बार भी गणेश चतुर्थी पर सन्यास आश्रम मंदिर में आयोजन किया जाएगा। मंदिर कमेटी का दावा है कि इस बार करीब 9 फुट के गणपति बप्पा उनके मंदिर परिसर में विराजेंगे। हर साल वह बप्पा की मूर्ति की स्थापना के दौरान उनकी उंचाई को भी बढ़ा है, इस बार 9 फुट के बप्पा की मूर्ति की स्थापना की जाएगी। जिसके बाद 6 सितंबर को विसर्जन किया जाएगा।
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मूर्तिकार सोहन लाल ने बताया कि वह पिछले 5 साल से श्रीगणेश सहित अन्य देवी देवताओं की विभिन्न आकार की मूर्तियां बनाते हैं। उनकी मूर्ति बनाने की प्रेरणा उन्हें पिता से मिली। पिता काफी सालों से मूर्तियां बनाने का काम कर रहे है। उनके पास 300 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये की कीमत की मूर्तियां उपलब्ध हैं। इस बार छोटी मूर्तियों की मांग अधिक है। मूर्तिकार सोहन लाल ने बताया कि वह अपने क्षेत्र से ही मूर्तियों को तैयार करके इस क्षेत्र में बेचने के लिए आता है। ज्यादातर लोग छोटी मूर्तियों की खरीदारी कर रहे हैं क्योंकि इनका विसर्जन घर में ही कर देते हैं। सभी मूर्तियां मिट्टी की होती हैं इसलिए इनकी बाजार में ज्यादा मांग है। इनमें प्राकृतिक रंग जैसे हल्दी, चंदन और फूल का इस्तेमाल होता है। मूर्तियां पानी में आसानी से घुल जाती हैं। इससे जल निकायों को कोई नुकसान नहीं होता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मूर्ति विसर्जन युक्त पानी को घरों में पेड़-पौधों में डालना चाहिए। इससे घर भी शुद्ध होता है और गणेशजी की मूर्ति का अनादर भी नहीं होता है।
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10 दिन चलता है पर्व
गणेश चतुर्थी भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन गणपति बप्पा का स्वागत घर-घर में भक्ति, प्रेम और उत्साह के साथ किया जाता है। इस बार यह पर्व 27 अगस्त को मनाया जाएगा। यह उत्सव विघ्रहर्ता, बुद्धि और समृद्धि के देवता भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त गणपति बप्पा की प्रतिमा घरों व पंडालों में स्थापित करते हैं, मंत्रोच्चार और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। दस दिनों तक चलने वाला यह पर्व लोगों में भक्ति, उत्साह और सामूहिकता का संदेश देता है। गणपति की आराधना से जीवन में सुख-शांति और बाधाओं का नाश होता है। विसर्जन के समय गणपति बप्पा मोरया के जयघोष के साथ उन्हें विदाई दी जाती है।
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इस बार करीब 9 फीट के होंगे गणपति बप्पा
शहर के संन्यास आश्रम मंदिर में पिछले आठ सालों से गणेश चतुर्थी पर आयोजन होता है। इस बार भी गणेश चतुर्थी पर सन्यास आश्रम मंदिर में आयोजन किया जाएगा। मंदिर कमेटी का दावा है कि इस बार करीब 9 फुट के गणपति बप्पा उनके मंदिर परिसर में विराजेंगे। हर साल वह बप्पा की मूर्ति की स्थापना के दौरान उनकी उंचाई को भी बढ़ा है, इस बार 9 फुट के बप्पा की मूर्ति की स्थापना की जाएगी। जिसके बाद 6 सितंबर को विसर्जन किया जाएगा।