Haryana: बाढ़ के भूना में अब संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा, 800 घरों के सर्वे में 120 लोग मिले बीमार
800 घरों के सर्वे में बच्चों समेत 120 लोग बीमार मिले हैं। डायरिया, एलर्जी और डेंगू-मलेरिया केस बढ़ने की आशंका है। स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। 10 टीमें सर्वे में लगाई गई हैं।
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हरियाणा के फतेहाबाद के भूना में बाढ़ के बाद अब संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने चार दिन में 800 घरों का सर्वे किया है। सर्वे के दौरान बच्चों समेत 120 लोग बीमार मिले हैं। अधिकतर पेट दर्द, बुखार और खांसी से पीड़ित मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बीमारियों की जांच के लिए पीड़ितों की स्लाइड भी बनवाई हैं, जिसमें मलेरिया को लेकर जांच की जाएगी।
जलभराव कम होने के बाद अब विभाग को एलर्जी, डायरिया, डेंगू-मलेरिया फैलने का भी खतरा सताने लगा है। चिकित्सकों का कहना है कि दूषित पानी पीने से लोग डायरिया की चपेट में आ सकते हैं। इसके अलावा ठहरे हुए पानी में मच्छरों के पनपने से डेंगू और मलेरिया फैलने का भी खतरा है। इसके अलावा लंबे समय तक पानी में रहने से एलर्जी भी बढ़ेगी। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी भी जारी कर दी है और सर्वे में 10 टीमें लगाई गई हैं।
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कॉलोनियों की गलियों में अभी भी जलभराव
अभी भी भूना में सिर्फ हिसार रोड को छोड़कर अधिकांश मुख्य रास्तों से ही जलभराव खत्म हो पाया है। गलियों व बाहरी इलाके की कॉलोनियों के खाली प्लॉटों में जलभराव है। इस कारण बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। ठहरे हुए पानी में दवाओं का छिड़काव भी किया गया है।
बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए ये करें
- घरों के आसपास गड्ढों को मिट्टी से भरवा दें। जमा पानी में जला हुआ काला तेल डाल दें। कूलर के अलावा अन्य पानी से भरे हुए बर्तन सप्ताह में एक बार खाली करें व कपडे़ से साफ करके ही प्रयोग करें।
- शरीर को ढक कर रखें तथा मच्छर रोधी दवा या क्रीम व मच्छरदानी ही प्रयोग करें एवं पूरी बाजू के वस्त्र पहनें।
- छतों पर रखी पानी की टंकियों को ढक्कन लगाकर बंद रखें।
- पानी से भरे हुए बर्तन को ढक कर रखें व पानी उबाल कर ही पीयें।
- घर का बना खाना ही खाएं। खाना अच्छे से पकाकर ही खाएं।
- अपने आसपास सफाई का ध्यान रखें, हाथों को कुछ समय के अंतराल में साबुन से धोते रहें।
- खाना खाने से पहले व बाद में तथा शौच के बाद अच्छे से साबुन से हाथ धोएं।
- खांसते या छींकते समय रुमाल अथवा कपड़े का प्रयोग करें।
- बाहर पानी में नंगे पैर घूमने से बचें। बाहर से आते ही हाथ-पैर अच्छे से धोकर व पोंछें।
- बुखार, उल्टी, दस्त, पेट दर्द व शरीर पर दाने या चकते होने पर सरकारी अस्पताल के डॉक्टर की सलाह लें।
ये न करें
- घरों के अंदर, आसपास के गड्ढों में पानी इकट्ठा न होने दें।
- पुराना सामान जैसे टायर, ट्यूब, खाली डिब्बे, पॉलिथीन के लिफाफे में पानी इकट्ठा न होने दें।
- हैंडपंप व नल के आसपास पानी जमा ना होने दें, ताकि मच्छर अंडे न दे सकें।
- बाहर का खाना खाने से बचे। कटे-फटे फलों का प्रयोग न करें। बासी खाने को उपयोग में न लाएं।
सर्वे के लिए लगाई गई दस मोबाइल टीमें
भूना कस्बे में जलभराव वाले क्षेत्रों में सर्वे के लिए दस मोबाइल टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें ट्रैक्टर, नाव या अन्य साधनों के माध्यम से विभिन्न कॉलोनियों व क्षेत्रों में सर्वे कर रही है और उन्हें दवाई दे रही है। नायक मोहल्ला, शास्त्री मंडी, मॉडल टाउन, रामलीला मैदान क्षेत्र, चंदन नगर आदि क्षेत्रों में डॉ. पारुल तथा शनि मंदिर कॉलोनी, गणेश कॉलोनी, अनाज मंडी, हिसार व उकलाना रोड तथा सांचला रोड में डॉ. सतपाल के नेतृत्व में मोबाइल टीमें काम कर रही हैं। प्रत्येक टीम में 4-5 स्वास्थ्य कर्मचारी है, जिनमें चिकित्सकों के साथ-साथ एमपीएचडब्ल्यू व आशा वर्कर्स भी शामिल हैं। ये सभी घर-घर जाकर नागरिकों से उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ले रही हैं। इसके अलावा जहां पर पानी जमा है, वहां पर दवाई का छिड़काव किया जा रहा है।
जलभराव के चलते संक्रामक बीमारियां आशंका बनी रहती है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने मोबाइल टीमों का गठन किया है, जो कि निरंतर लोगों को दवाइयां व अन्य स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवा रही है। इसके अलावा यदि किसी भी व्यक्ति में उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार या अन्य संक्रामक बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो वे तुरंत प्रभाव से स्वास्थ्य विभाग से दवाईयां लें। इसके अलावा साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। -डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन