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बत्ती उतर गई तो क्या, नेम-प्लेट से बनेंगे वीआईपी
ब्यूरो/अमर उजाला/फतेहाबाद
Updated Sat, 22 Apr 2017 12:06 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार द्वारा सरकारी गाड़ियों से बत्ती हटाने के प्रस्ताव पारित होते ही प्रदेश और जिले के अधिकतर नेताओं और अफसरों ने अपनी गाड़ियों से बत्ती भले ही हटवा ली हैं। लेकिन चौधर के ठाठ छोड़ने को वो तैयार नहीं दिख रहे। वीआईपी कल्चर मिटाने की नीयत से सरकार ने बत्ती हटवाने को कहा तो वीआईपी ने अपनी गाड़ियों पर चौधर का नया पैंतरा अजमाया। इसमें सबसे आगे है गाड़ियों के आगे अपने पद के नाम की अच्छी खासी नेम-प्लेट लगवाना। गाड़ियों से बत्ती हटने के बाद सत्ता के चौधरियों का अगला शौक बन गया है गाड़ियों के आगे लिखी नेम-प्लेट। सत्ता बीजेपी की है तो बीजेपी के एक दर्जन से अधिक नेताओं की गाड़ियों पर बीजेपी पदाधिकारी के पदनाम वाली प्लेटें सज चुकी हैं।
मंडल अध्यक्ष से लेकर जिलाध्यक्ष तक की गाड़ी पर अध्यक्ष नाम की पटिका
जिले में बीजेपी के एक दर्जन के करीब मंडल अध्यक्ष हैं, इसके अलावा जिलाध्यक्ष, पदाधिकारी हैं। मार्केट कमेटी, नगर परिषद चेयरमैन सहित अनेक स्थानीय नेता सत्ता का किसी ना किसी रूप में आनंद ले रहे हैं। इनमें से अधिकतर नेताओं की गाड़ियों पर उनके पद की पटिका लगी हुई है। बीजेपी जिलाध्यक्ष, नगर परिषद अध्यक्ष, युवा अध्यक्ष के पास बड़ी गाड़ियों हैं तो उनकी गाड़ियों पर पटिका भी अच्छी खासी है। मंडल अध्यक्ष आदि की गाड़ियों पर भी उनके पद के नाम वाली पट्टिकाएं चस्पां हैं।
एडीसी सहित कई सरकारी गाड़ियों पर भी दिखीं नेम प्लेटें
बत्ती उतारने का नियम भले ही एक मई से लागू किया जाना हो, लेकिन बीते दिन जिले के कुछ सरकारी अधिकारियों ने पहले से ही सरकार के कदम के समर्थन में अपनी गाड़ियों पर लगी नीली बत्तियां उतार ली। इसकी तारीफ भी हुई, लेकिन अभी भी जिले में तकरीबन एक दर्जन से अधिक ए-ग्रेड अधिकारी ऐसे हैं, जिनकी सरकारी गाड़ियों पर भी उनके पदनाम की प्लेट लगी हुई है। इसमें एडीसी जेके अभीर, एसडीएम सतबीर जांगू, रतिया और टोहाना के एसडीएम शामिल हैं। इसके अलावा सिटी मजिस्ट्रेट देवीलाल सिहाग की गाड़ी पर बत्ती के साथ साथ उनके पद का नाम भी अंकित है।
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धौंस के लिए नहीं है पटिका, नहीं उठाता कोई फायदा : फुलां
भाजपा जिलाध्यक्ष वेद फुलां ने कहा कि उन्होंने कभी कोई फायदा लेने के लिए सत्ता की धौंस नहीं दिखाई है। फुलां ने कहा कि उनकी गाड़ी पर जिलाध्यक्ष की पट्टिका है, इससे आम गरीब आदमी जो मुझे नहीं जानता, वो भी मुझ तक आकर अपनी परेशानी बता देता है और उसकी परेशानी को दूर करने का प्रयास करते हैं। अगर लोगों को इससे परेशानी है तो मुझे इस हटाने में भी कोई दिक्कत नहीं है।
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मंडल अध्यक्ष से लेकर जिलाध्यक्ष तक की गाड़ी पर अध्यक्ष नाम की पटिका
जिले में बीजेपी के एक दर्जन के करीब मंडल अध्यक्ष हैं, इसके अलावा जिलाध्यक्ष, पदाधिकारी हैं। मार्केट कमेटी, नगर परिषद चेयरमैन सहित अनेक स्थानीय नेता सत्ता का किसी ना किसी रूप में आनंद ले रहे हैं। इनमें से अधिकतर नेताओं की गाड़ियों पर उनके पद की पटिका लगी हुई है। बीजेपी जिलाध्यक्ष, नगर परिषद अध्यक्ष, युवा अध्यक्ष के पास बड़ी गाड़ियों हैं तो उनकी गाड़ियों पर पटिका भी अच्छी खासी है। मंडल अध्यक्ष आदि की गाड़ियों पर भी उनके पद के नाम वाली पट्टिकाएं चस्पां हैं।
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एडीसी सहित कई सरकारी गाड़ियों पर भी दिखीं नेम प्लेटें
बत्ती उतारने का नियम भले ही एक मई से लागू किया जाना हो, लेकिन बीते दिन जिले के कुछ सरकारी अधिकारियों ने पहले से ही सरकार के कदम के समर्थन में अपनी गाड़ियों पर लगी नीली बत्तियां उतार ली। इसकी तारीफ भी हुई, लेकिन अभी भी जिले में तकरीबन एक दर्जन से अधिक ए-ग्रेड अधिकारी ऐसे हैं, जिनकी सरकारी गाड़ियों पर भी उनके पदनाम की प्लेट लगी हुई है। इसमें एडीसी जेके अभीर, एसडीएम सतबीर जांगू, रतिया और टोहाना के एसडीएम शामिल हैं। इसके अलावा सिटी मजिस्ट्रेट देवीलाल सिहाग की गाड़ी पर बत्ती के साथ साथ उनके पद का नाम भी अंकित है।
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धौंस के लिए नहीं है पटिका, नहीं उठाता कोई फायदा : फुलां
भाजपा जिलाध्यक्ष वेद फुलां ने कहा कि उन्होंने कभी कोई फायदा लेने के लिए सत्ता की धौंस नहीं दिखाई है। फुलां ने कहा कि उनकी गाड़ी पर जिलाध्यक्ष की पट्टिका है, इससे आम गरीब आदमी जो मुझे नहीं जानता, वो भी मुझ तक आकर अपनी परेशानी बता देता है और उसकी परेशानी को दूर करने का प्रयास करते हैं। अगर लोगों को इससे परेशानी है तो मुझे इस हटाने में भी कोई दिक्कत नहीं है।