{"_id":"58fcf5c04f1c1be7648b4909","slug":"fathebad-narma-farmer-fatehabad","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश ने एक बार रुलाया, अफसरी लापरवाही और ढिलाई हर दिन रुला रही ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश ने एक बार रुलाया, अफसरी लापरवाही और ढिलाई हर दिन रुला रही
ब्यूरो/अमर उजाला/फतेहाबाद
Updated Mon, 24 Apr 2017 12:13 AM IST
विज्ञापन
farmer shimla
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर गांव बड़ोपल से चिंदड़ रोड पर एक ढाणी है। ढाणी का मालिक रूलीराम किसी भी गाड़ी की आवाज सुनता है तो झट से दरवाजे की तरफ दौड़ता है। इस उम्मीद में कि शायद सरकारी कर्मचारी होंगे जो नरमे की खराब हुई उसकी फसल का मुआवजा देने आए होंगे। अक्तूबर 2016 से ऐसे सवाल लगातार उसके मन में जारी हैं और वह यह क्रम निरंतर कर रहा है। लेकिन न तो उसकी नरमे की फसल का बीमा करने वाली कंपनी के प्रतिनिधि सर्वे के बाद दोबारा आए और न ही कृषि विभाग के अधिकारियों ने सुध ली। अब हालात ये हैं कि फसल बीमा का नाम सुनते ही रूलीराम उखड़ जाते हैं। कहते हैं कि बारिश से फसल बर्बाद हुई तो एक बार रोया था, बीमा कंपनी वालों के मुआवजे का इंतजार रोजाना रुला देता है। बता दें कि यह किसी एक रूलीराम की कहानी नहीं ऐसे पता नहीं कितने होंगे, जो ऐसी ही किसी गाड़ी और सरकारी कर्मी का इंतजार कर रहे हैं।
पिछले साल सितंबर में बर्बाद हुई थी नरमे की फसल
सितंबर में हुई बेमौसम बारिश से बड़ोपल निवासी रूलीराम की साढ़े 6 एकड़ जमीन में खड़ी नरमे की फसल ही तबाह हो गई थी। बीमा करवाया हुआ था तो नुकसान के बावजूद निश्चिंत था कि चलो मुनाफा न सही, लागत तो वसूल हो जाएगी। किसान का तो मेहनत ही गहना है, उसे मेहनत की मजदूरी न मिले तो न सही। सितंबर में ही बीमा कंपनी के अधिकारी कुछ कर्मचारियों के साथ खेत में पहुंचे, सर्वे के बाद फसल के कुछ पौधे साथ ले गए। जाते-जाते कंधे पर हाथ रखकर आश्वासन दे गए कि फसल का ज्यादा नुकसान है, आपको जल्द मुआवजे का चेक देने लौटेंगे। वो दिन था और आज छह माह बाद का दिन है, उसी सरकारी गाड़ी के इंतजार में रूली राम की आंखें पथरा गई हैं।
कर्जा लेकर की थी गेहूं की बिजाई, अब रात दिन आग से बचाव में निकलता है वक्त
अपने नरमे की फसल को बेमौसमी बारिश और बीमा कंपनी की लापरवाही की भेंट चढ़ा चुके रूलीराम ने कर्जा लेकर गेहूं की बिजाई की है। भरपूर फसल भी हुई, लेकिन अब जब तक फसल कटकर मंडी नहीं पहुंच जाती, तब तक ये 65 साल का बुजुर्ग और उसका परिवार रात-दिन खेत में खड़ी फसल की रखवाली करता रहता है ताकि खड़ी फसल में अनहोनी न हो जाए। रुंधे गले से रूलीराम कहते हैं कि बारिश ने एक बार रूलाया था, अफसरी लापरवाही और ढिलाई बार-बार रुला रही है। गेहूं की फसल पक कर तैयार हो गई है, लेकिन बीमा कंपनी ने अभी नरमे की फसल का ही मुआवजा नहीं दिया तो बताओ कैसे यकीन आएगा इस व्यवस्था पर ।
विज्ञापन
खरीफ की फसल के नुकसान का क्लेम प्रोसेस शुरू हो गया है। फतेहाबाद जिले का तकरीबन सात करोड़ से अधिक बनता है। इसमें से ढाई-तीन करोड़ रुपये बैंकों को ट्रांसफर भी हो चुका है। उम्मीद है कि बाकी भी सात-आठ दिन में पहुंच जाएगा। इसके बाद भी अगर किसी किसान का क्लेम नहीं मिलता तो वो दस दिन बाद मुझसे मिल सकते हैं। कागजी कार्यवाही और सर्वे रिपोर्ट के बाद भी कुछ चीजों की वेरिफिकेशन में समय लगता है।
रवि दुबे, एरिया मैनेजर, आईसीआईसीआई लॉम्बार्ड, फतेहाबाद।
विज्ञापन
पिछले साल सितंबर में बर्बाद हुई थी नरमे की फसल
सितंबर में हुई बेमौसम बारिश से बड़ोपल निवासी रूलीराम की साढ़े 6 एकड़ जमीन में खड़ी नरमे की फसल ही तबाह हो गई थी। बीमा करवाया हुआ था तो नुकसान के बावजूद निश्चिंत था कि चलो मुनाफा न सही, लागत तो वसूल हो जाएगी। किसान का तो मेहनत ही गहना है, उसे मेहनत की मजदूरी न मिले तो न सही। सितंबर में ही बीमा कंपनी के अधिकारी कुछ कर्मचारियों के साथ खेत में पहुंचे, सर्वे के बाद फसल के कुछ पौधे साथ ले गए। जाते-जाते कंधे पर हाथ रखकर आश्वासन दे गए कि फसल का ज्यादा नुकसान है, आपको जल्द मुआवजे का चेक देने लौटेंगे। वो दिन था और आज छह माह बाद का दिन है, उसी सरकारी गाड़ी के इंतजार में रूली राम की आंखें पथरा गई हैं।
विज्ञापन
कर्जा लेकर की थी गेहूं की बिजाई, अब रात दिन आग से बचाव में निकलता है वक्त
अपने नरमे की फसल को बेमौसमी बारिश और बीमा कंपनी की लापरवाही की भेंट चढ़ा चुके रूलीराम ने कर्जा लेकर गेहूं की बिजाई की है। भरपूर फसल भी हुई, लेकिन अब जब तक फसल कटकर मंडी नहीं पहुंच जाती, तब तक ये 65 साल का बुजुर्ग और उसका परिवार रात-दिन खेत में खड़ी फसल की रखवाली करता रहता है ताकि खड़ी फसल में अनहोनी न हो जाए। रुंधे गले से रूलीराम कहते हैं कि बारिश ने एक बार रूलाया था, अफसरी लापरवाही और ढिलाई बार-बार रुला रही है। गेहूं की फसल पक कर तैयार हो गई है, लेकिन बीमा कंपनी ने अभी नरमे की फसल का ही मुआवजा नहीं दिया तो बताओ कैसे यकीन आएगा इस व्यवस्था पर ।
विज्ञापन
खरीफ की फसल के नुकसान का क्लेम प्रोसेस शुरू हो गया है। फतेहाबाद जिले का तकरीबन सात करोड़ से अधिक बनता है। इसमें से ढाई-तीन करोड़ रुपये बैंकों को ट्रांसफर भी हो चुका है। उम्मीद है कि बाकी भी सात-आठ दिन में पहुंच जाएगा। इसके बाद भी अगर किसी किसान का क्लेम नहीं मिलता तो वो दस दिन बाद मुझसे मिल सकते हैं। कागजी कार्यवाही और सर्वे रिपोर्ट के बाद भी कुछ चीजों की वेरिफिकेशन में समय लगता है।
रवि दुबे, एरिया मैनेजर, आईसीआईसीआई लॉम्बार्ड, फतेहाबाद।