{"_id":"5887a4a04f1c1bbd7ecf54cd","slug":"fatehabad-tenson-1-25-lack-connection-700-worker","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैसे ना हो तनाव, सवा लाख बिजली कनेक्शनों का जिम्मा 700 कर्मचारियों पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैसे ना हो तनाव, सवा लाख बिजली कनेक्शनों का जिम्मा 700 कर्मचारियों पर
Updated Wed, 25 Jan 2017 12:32 AM IST
विज्ञापन
बिजली निगम का फतेहाबाद कार्यालय
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम में काम के बोझ से कर्मचारी ही नहीं अधिकांश अधिकारी भी मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। इसके पीछे की मुख्य वजह कर्मचारियों की कमी, पर्याप्त औजार और सुरक्षा उपकरणों का नहीं होना है।
रूटीन ड्यूटी के अलावा किसी आपात स्थिति या फाल्ट आने पर भी यही कर्मचारी रात में फिर फील्ड में आकर काम करते हैं ताकि बिजली निर्बाध रूप से दी जा सके। इस बात को कर्मचारियों, उपमंडल अधिकारियों के अलावा कर्मचारी यूनियनों ने भी स्वीकार किया है कि राजनीतिक दबाव भी कर्मचारियों पर एक तरह प्रेशर बना रहा है।
विज्ञापन
फतेहाबाद डिवीजन के अंतगर्त 20 जेई के पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें 14 जेई काम कर रहे हैं और एक जेई जेल में है जबकि पांच अन्य पद खाली हैं। 32 फोरमैन के स्वीकृत पदों में से भी 4 पद खाली पड़े हैं। जमीनी स्तर पर काम करने वाले 149 लाइनमेन के पदों में से 40 पद रिक्त हैं। कार्यालय में काम करने के लिए यूडीसी के 20 स्वीकृत पदों में से 14 पदों पर कोई नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में इनका कार्यभार का बोझ अन्य कर्मचारियों के सिर पर है।
विज्ञापन
जिससे कर्मचारी तनाव में तो रहते ही हैं, देर रात तक भी उन्हें काम करना पड़ता है। सबसे बड़ी बात है कि ये कर्मचारी दिन में तो फील्ड में काम करते ही हैं, रात को किसी आपात स्थिति में भी इन्हीं को फिर फील्ड में आकर काम करना पड़ता है। कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त कार्यभार दिनचर्या जैसे ही बन गया है। कर्मचारियों की मानें तो उनके लिए कोई अवकाश नहीं है। निगम कार्यालय के सूत्रों के अनुसार ये पोस्ट 1975 से पहले की स्वीकृत हैं। जब डिवीजन में महज कुछेक हजार ही उपभोक्ता थे। वर्तमान में स्थिति ये है कि मंडल में 1 लाख 27 हजार 307 उपभोक्ता हैं। इनके ऊपर 435 पक्के कर्मचारी व 306 कच्चे कर्मचारी काम करते हैं।
बिछाई गईं हैं 6666 किलोमीटर एलटी और एचटी तार
फतेहाबाद डिवीजन के अंतर्गत भट्टू, बड़ोपल, फतेहाबाद, रतिया व भूना पड़ता है। यहां पर 33 केवी के 27 सबस्टेशन हैं। 306 फीडर हैं। 6666 किलोमीटर एलटी और एचटी तार बिछाई गई है। इन फीडरों पर 184 गांव पड़ते हैं। माना जाए तो एक लाख 27 हजार कनेक्शनों पर महज 700 कर्मचारी 184 गांवों को कवर करते हैं। बरसात, फाल्ट, आंधी तूफान में यही कर्मचारी दिनरात उपरोक्त 184 गांवों में बिजली व्यवस्था दुरुस्त करते हैं। इनके अनुसार वे 24 घंटे ही ड्यूटी पर हैं ।
निगम में 1975 से पहले ये स्वीकृत की गई थी, तब प्रदेश में 20 लाख कनेक्शन थे और कर्मचारियों की संख्या 56 हजार थी। अब प्रदेश में 59 लाख कनेक्शन हैं और कर्मचारियों की संख्या 32 हजार है। जबकि रेशो के हिसाब से कर्मचारियों की संख्या कई गुणा अधिक होनी चाहिए थी। इसके अलावा जो कर्मचारी बिजली चोरी पकडने जाते हैं, उनकी सुरक्षा का इंतजाम नहीं है। ग्रामीण उनपर हमला करते हैं। यही सात सौ कर्मचारी हैं, जिनसे बिजली चोरी पकडने, रिकवरी, मरम्मत कार्य व मीटर बदलने सहित सभी तरह का काम लिया जाता है। और कच्चे कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलता।
-अजय वशिष्ट, राज्य सचिव, ऑल हरियाणा पावर वर्कर यूनियन।
ट्रिपिंग और ब्रेकडाउन के लिए अलग से कोई कर्मचारी नहीं हैं। जो कर्मचारी दिन में काम करते हैं, रात को भी वही ड्यूटी पर आते हैं। मेजर फाल्ट आने पर एसडीओ को भी मौके पर आना जरूरी होता है। कर्मचारियों की कम संख्या के चलते काम का अत्यधिक दबाव है।
-गुलशन वधवा, एसडीओ, फतेहाबाद बिजली निगम।
स्वीकृत पदों में बढ़ोतरी नहीं हो रही। कुछ कर्मचारियों के बुजुर्ग होने के चलते उनकी क्षमता पर भी असर पड़ा है। काम अधिक होने के चलते दबाव भी बढ़ा है।
-जोगेंद्र सिंह, कार्यकारी अभियंता, फतेहाबाद बिजली निगम ।