{"_id":"58b0790b4f1c1b701cb251ea","slug":"fatehabad-sample-fail-water-sample-harayana","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिपोर्ट में खुलासा : ठाकर बस्ती, नहर कालोनी, डीएसपी रोड़ का पानी सेहत के लिए खतरनाक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिपोर्ट में खुलासा : ठाकर बस्ती, नहर कालोनी, डीएसपी रोड़ का पानी सेहत के लिए खतरनाक
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Fri, 24 Feb 2017 11:49 PM IST
विज्ञापन
फतेहाबाद जनस्वास्थ्य विभाग कार्यालय ।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
फतेहाबाद में लोगों को स्वच्छ पेयजल भी मिलना दूभर हो गया है। इन दिनों यहां कई मोहल्लों व अधिकांश गांवों में दूषित पेयजल सप्लाई हो रहा है। इस पानी में विषैले कीटाणु पनप रहे हैं जो कि पीने के लायक बिल्कुल नहीं हैं। ये हम नहीं कह रहे, बल्कि खुद जनस्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट कह रही है। जनस्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में हुए खुलासे के अनुसार फतेहाबाद शहर के ठाकर बस्ती, नहर कॉलोनी और डीएसपी रोड सहित तकरीबन आधा दर्जन कॉलोनियों में पेयजल के सैंपल फेल आए हैं। इतना ही नहीं, जिले के एक दर्जन से अधिक गांवों के भी सैंपल फेल मिले हैं।
विभाग के अनुसार इन गांवों में पेयजल सप्लाई में सुधार की जरूरत है। विभाग ने पिछले कुछ समय में 2488 पेयजल सैंपल लिए थे जिसमें से 87 सैंपल फेल आए हैं। ये वो आंकड़ा है जो रि-टेस्टिंग के बावजूद फेल आए। विभाग का मानना है कि एक क्षेत्र में सैंपल निगेटिव आता है तो दवाई डालने के बाद वहां पुन: सैंपल लिए जाते हैं।
विज्ञापन
मोचीवाली, चौबारा, जांडली कलां, झलनियां सहित इन एक दर्जन गांवों में हालात असामान्य
जनस्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट की मानें तो जिले के गांव एक दर्जन गांवों में पेयजल के हालात असामान्य हैं। इनमें मोचीवाली, चौबारा, जांडली कलां, जांडलीखुर्द, झलनियां, धोलू, नाढोड़ी, ढाणी गोपाल सहित कई ऐसे गांव हैं जिनके पेयजल के सैंपल नियमित रूप से फेल आ रहे हैं। ऐसे में इन गांवों में पेयजल की सप्लाई की चेकिंग की जरूरत भी रिपोर्ट में बताई गई है। बता दें कि इन गांवों में नहरी पेयजल की सप्लाई है, लेकिन इसके बावजूद सप्लाई के बाद जब पेयजल घर पहुंचता है तो उसमें कई प्रकार के विषैले कीटाणु शामिल होने की बात भी जनस्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में कही गई है।
विज्ञापन
फतेहाबाद की आधा दर्जन कॉलोनियों में भी पेयजल खतरनाक
फतेहाबाद शहर के लोग भी कोई बहुत ज्यादा स्वच्छ पेयजल नहीं पी रहे हैं। विभाग की रिपोर्ट ही बता रही है कि प्रोफेसर कॉलोनी, ठाकर बस्ती, विचाराश्रम रोड, रतिया रोड, इंद्रपुरा मोहल्ला और डीएसपी रोड पर लिए गए पेयजल सप्लाई के सैंपल फेल आए हैं। ऐसा नहीं है कि विभाग के कर्मचारी किसी एक विशेष जगह से ही सैंपल लेते हैं। जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी कालोनी में कई जगह से सैंपल एकत्रित करते हैं और इसके बाद ही इनकी जांच होती है लेकिन उपरोक्त कालोनियों के इस बार के सभी सैंपल फेल आए हैं। विभाग के अधिकारी अब यहां पर क्लोरीन और ब्लीचिंग पाउडर आदि के इस्तेमाल की बात कह रहे हैं।
कई इलाकों में अभी ट्यूबवेल की सप्लाई, इनमें फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा
जनस्वास्थ्य विभाग के लाख प्रयासों के बावजूद अभी तक पूरा शहर को नहरी पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। विभाग के आंकड़ों को ही आधार बना लें तो लगभग 80 फीसदी से कुछ लोगों तक ही नहरी पानी पहुंच सका है। बाकी आबादी को पेयजल के लिए अभी भी ट्यूबवेल का पानी पीना पड़ता है। रिपोर्ट के अनुसार इन इलाकों में भूमिगत पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई है। इनमें पुरानी तहसील का इलाका शामिल है। फास्फोरस की कमी के चलते हड्डियां कमजोर होती हैं। फ्लोरइड की मात्रा अधिक होने से दांतों में पीलापन भी हो जाता है। फ्लोराइड की मात्रा तय सीमा से अधिक होना किडनी फेल होने का कारण भी बन सकता है।
दूषित पेयजल सप्लाई की शिकायत यहां दें
किसी मोहल्ले या गांव में अगर दूषित पेयजल सप्लाई हो रहा है और लोगों के पेट में पेयजल के चलते परेशानी हो रही हैं तो विभाग को ऑनलाइन या टोलफ्री नंबर पर शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। विभाग की डबल्यूएसएस डॉट एचआरवाई डॉट एनआईसी डॉट इन पर शिकायत ऑनलाइन दर्ज हो सकेगी। इसके अलावा विभाग के मुख्यालय द्वारा जारी टोलफ्री नंबर 18001805678 पर दर्ज करवाई जा सकती है। इसमें शिकायत दर्ज होते ही आपके मोबाइल पर एसएमएस आएगा और इस पर शिकायत नंबर भी मिलेगा।
ये एक नियमित प्रक्रिया है। कई बार लोग अपना कनेक्शन खुद जोड़ लेते हैं जिससे पानी में सीवरेज की मिक्सिंग हो जाती है और चैकिंग में वहां के पानी का सैंपल फेल हो जाता है। इन जगहों पर नियमित चेकिंग और दवाई डालकर फिर सैंपल लिया जाता है। बाकी दिक्कतों को भी दूर किया जाता है।
-जितेंद्र हुड्डा, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग, फतेहाबाद ।