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मुच्छल धान के भावों ने तोड़े सारे रिकार्ड, दाम 2700 पार
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Wed, 14 Dec 2016 12:11 AM IST
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फतेहाबाद अनाजमंडी में पहुंचा हुआ धान ।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद में नवंबर के बाद धान उत्पादक किसानों के चेहरों पर रौनक बढ़ती जा रही है। नोटबंदी के बाद धीरे-धीरे मुच्छल धान के दामों में तेजी देखने को मिली। मंगलवार को तो तेजी ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए और मुच्छल धान की किस्म 1401 के दाम 27 सौ रुपये पार कर गए। जो पिछले साल के मुकाबले भी ज्यादा हैं। किसानों का मानना है कि इस बार उत्पादन के साथ भाव भी ठीक मिलने से उन्हें थोड़ी राहत मिली है। वहीं व्यापारी भी दामों को लेकर खुश है।
पिछले तीन साल से फसल का खराबा, या भाव में मंदी के चलते किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गई थी। बीते वर्ष नरमे पर सफेद मक्खी तो धान के भाव ना मिलने से किसानों पर कर्ज बढ़ गया। मंडी के व्यापारी इस बात को स्वीकारते हैं कि अधिकांश किसानों ने फसल से ज्यादा पैसे आढ़ती से ले रखे हैं। दीवाली से पहले परमल धान के रेट को लेकर संशय की स्थिति थी, लेकिन अनुकूल मौसम ने किसानों का साथ दिया।
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इस बार परमल धान का औसत उत्पादन 80 मन प्रति एकड़ से अधिक ज्यादा निकला है। सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 1510 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया। अब बासमती के भाव में एकाएक तेजी आई। मंगलवार को तो बासमती 1121 किस्म का धान 2535 रुपये प्रति क्विंटल एवं 1401 किस्म का धान 2700 रुपये प्रति क्विंटल के करीब बिका। अनुमान के अनुसार बासमती का उत्पादन 45 से 50 मन प्रति एकड़ हो रहा है। परमल व बासमती दोनों ही किसान को करीब 52 हजार रुपये प्रति एकड़ तक का लाभ दे रहे हैं।
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इस बार औसत उत्पादन बढ़ा
मालूम हो कि तीन वर्ष पूर्व 1121 एवं मुच्छल धान के करीब 35 सौ से लेकर 5000 प्रति क्विंटल पहुंच गए थे। तबसे किसानों ने धान की पैदावार की ओर ज्यादा रुख किया। फतेहाबाद में तीन वर्ष पूर्व 70 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती थी। इस बार बढ़कर 1 लाख 11 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की बिजाई हुई है। सबसे खास बात ये है कि इस बार औसत उत्पादन बढ़ा है। जिससे कृषि विभाग, व्यापारी और किसान तीनों ही खुश हैं।
बासमती का 45 से 50 मन प्रति एकड़ हुआ उत्पादन
बासमती व परमल धान दोनों के उत्पादन एवं भाव का औसत लगाएं तो दोनों ही किस्मों से किसान को प्रति एकड़ 45 से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मिल रहा है। हालांकि परमल का उत्पादन 80 से सौ मन एवं बासमती का उत्पादन लगभग इससे आधा ही होता है। बासमती 45 से 50 मन प्रति एकड़ उत्पादन हुआ है। लेकिन मंडी में पिछले साल से इस बार धान की आवक 2 लाख 16 हजार मीट्रिक टन धान की आवक ज्यादा हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार किसानों ने धान की परमल किस्म की बिजाई पर बल दिया क्योंकि परमल धान को किसान पक्की फसल एवं सरकारी खरीद वाली नकदी फसल के रूप में जानते हैं। फतेहाबाद का मुच्छल धान देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी खूब प्रचलित है। फतेहाबाद मुच्छल धान का चावल, यहां के खाड़ी देशों में जाता है। फतेहाबाद की दो फर्में निर्यात भी करती हैं।
बीमारी नहीं लगने से पैदावार बंपर हुई
इस बारे में कृषि उपनिदेशक बलवंत सिंह सहारण ने कहा कि किसानों ने अच्छे बीज का इस्तेमाल किया और बीमारी ना लगने से पैदावार बंपर हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर किसान कृषि विभाग के अनुसार खेती करता है तो धान का उत्पादन और बढ़ सकता है। अनाज मंडी के व्यापारी अरुण ग्रोवर के अनुसार इस बार धान ने किसान को थोड़ा बहुत सहारा लगाया है। अब किसान का कर्ज कम होने लगा है।