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बारिश के दो दिन बाद भी तालाब बने हैं दफ्तर
fatehabad
Updated Wed, 20 Jul 2016 10:58 PM IST
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केंद्र में मोदी सरकार और प्रदेश में मनोहर सरकार बनते ही एक अभियान जो जोरशोर से शुरू हुआ था, वो था स्वच्छ भारत अभियान। केंद्र के स्वच्छ भारत अभियान को शुरू हुए दो बरस पूरे हो चुके हैं। लेकिन शहर की आम गलियां तो दूर, शहर के अंदर सरकारी दफ्तरों में ही अभी तक अभियान का असर देखने को नहीं मिला है। दो दिन पहले बरसात हुई थी, लेकिन बावजूद इसके शहर के अंदर स्थित सरकारी कार्यालयों में अभी तक बरसाती पानी भरा है। हैरत इस बात को लेकर भी है कि ये सभी दफ्तर पब्लिक डीलिंग वाले दफ्तर हैं, रोजाना यहां सैकड़ों लोग आते-जाते हैं। बारिश के मौसम में ही डेंगू और मलेरिया बुखार का मच्छर पनपते हैं। बावजूद इसके सरकारी दफ्तरों के अधिकारी इस ओर से आंखें मूंदे बैठे हैं। अमर उजाला टीम ने इसी स्थिति पर शहर के कई सरकारी दफ्तरों के हालात का जायजा लिया। पेश है एक विस्तृत रिपोर्ट
स्थान: जनस्वास्थ्य विभाग दफ्तर, भट्टू रोड
हालात : शहर में बरसाती पानी के जलभराव और सीवरेज को संभालने का जिम्मा संभालने वाले जनस्वास्थ्य विभाग के दफ्तर के गेट पर ही पिछले दो तीन दिन से बरसाती पानी और कीचड़ जमा है। रोजाना कार्यकारी अभियंता से लेकर एसडीओ और जेई लेवल के अधिकारी इसी जलभराव और कीचड़ से होकर दफ्तर आते और जाते हैं। लेकिन जमा पानी को निकलवाने और कीचड़ को साफ करने के बारे में किसी ने नहीं सोचा। पेयजल के बिल और अन्य कामों के लिए रोजाना सैकड़ों लोग इस दफ्तर में आते हैं।
स्थान : बिजली निगम कार्यालय, भट्टू रोड
हालात : बिजली से संबंधित कामों के लिए रोजाना का हजारों लोगों का इस दफ्तर में आना-जाना है। लेकिन इस दफ्तर में कदम रखना भी बीमारियों को निमंत्रण देने जैसा है। इस दफ्तर के गेट पर भी बरसाती पानी भरा है। उसमें मच्छर भी साफ तौर पर देखे जा सकते हैं। साथ ही भट्टू रोड का स्थानीय बस स्टैंड है। यहां पर भी हर वक्त दर्जनों लोग बस का इंतजार करते हैं। उनके स्वास्थ्य को भी खतरा है, लेकिन गाड़ियों में बैठकर दफ्तर के अंदर-बाहर जाने वाले अफसरों को शायद इससे फर्क नहीं पड़ता।
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स्थान : नया बस अड्डा, नेशनल हाइवे
हालात : पहले दो दफ्तरों के बाद जलभराव था, लेकिन बस अड्डे की बात ही अलग है। यहां पर बाहर तो जलभराव है ही, प्रांगण में भी कई जगह बरसाती पानी भरा है, लेकिन रोडवेज अधिकारियों की आंखों पर शायद पट्टी बंधी है, जिसके चलते उन्हें बस अड्डा प्रांगण के अंदर की गंदगी दिखाई ही नहीं देती।
स्थान : रेडक्रास भवन, जगजीवनपुरा रोड़
हालात : शहर के सभी सरकारी दफ्तरों में से शायद सबसे बुरे हालात में रहने वाला सरकारी दफ्तर है रेडक्रास भवन। एक समय में सभी मजलूमों के काम आने वाला रेडक्रास भवन आजकल खुद मुफलिसी का शिकार मालूम होता है। रेडक्रास दफ्तर के गेट के आगे आप पैदल जा ही नहीं सकते। मेन गेट से लेकर बिल्डिंग तक का सफर बामुश्किल 20 कदम का होगा, लेकिन इसे पार करने के लिए कम से कम 5 से 7 मिनट का समय चाहिए। वजह, यहां पर बनी बरसाती पानी की झील और उसमें पनपते मच्छर, जो किसी भी आदमी को बीमार कर सकते हैं, बहुत बीमार।
स्थान : ट्रैफिक थाना और विजिलेंस भवन
हालात : रेडक्रॉस भवन के बिल्कुल साथ लगते ट्रैफिक थाने और विजिलेंस भवन में भी कुछ अलग नहीं मिला। गंदे पानी की झील तो यहां पर भी है। खड़े पानी में बीमारी पैदा करने वाले मच्छर यहां पर देखे जा सकते हैं। गाड़ियों की पासिंग करवाने आदि कामों के लिए यहां भी रोजाना दर्जनों लोग आते हैं। इसके अलावा इसी दफ्तर के कर्मचारी भी हैं, जो दिन-रात सड़क पर तैनात रहकर शहर का ट्रैफिक संभालते हैं, लेकिन उनकी सेहत संभालने की बजाए उन्हीं के दफ्तर में उनकी सेहत दांव पर लगी हुई है।
ये चौंकाने वाली बात है, दो दिन हो गए बारिश हुए। अभी तक दफ्तरों में जलभराव होना साफ तौर पर लापरवाही है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दूंगा कि तुरंत जलभराव को ठीक करवाएं। सरकारी दफ्तरों में रोजाना लोगों का आना-जाना लगा रहता है। सरकारी दफ्तर उनकी समस्या को दूर करने के लिए हैं, न कि उनको बीमारी के रूप में एक और समस्या देने के लिए। जल्द ही सभी दफ्तरों में हालात अपने स्तर पर भी चेक कराऊंगा।
जेके अभीर, अतिरिक्त उपायुक्त, फतेहाबाद ।
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स्थान: जनस्वास्थ्य विभाग दफ्तर, भट्टू रोड
हालात : शहर में बरसाती पानी के जलभराव और सीवरेज को संभालने का जिम्मा संभालने वाले जनस्वास्थ्य विभाग के दफ्तर के गेट पर ही पिछले दो तीन दिन से बरसाती पानी और कीचड़ जमा है। रोजाना कार्यकारी अभियंता से लेकर एसडीओ और जेई लेवल के अधिकारी इसी जलभराव और कीचड़ से होकर दफ्तर आते और जाते हैं। लेकिन जमा पानी को निकलवाने और कीचड़ को साफ करने के बारे में किसी ने नहीं सोचा। पेयजल के बिल और अन्य कामों के लिए रोजाना सैकड़ों लोग इस दफ्तर में आते हैं।
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स्थान : बिजली निगम कार्यालय, भट्टू रोड
हालात : बिजली से संबंधित कामों के लिए रोजाना का हजारों लोगों का इस दफ्तर में आना-जाना है। लेकिन इस दफ्तर में कदम रखना भी बीमारियों को निमंत्रण देने जैसा है। इस दफ्तर के गेट पर भी बरसाती पानी भरा है। उसमें मच्छर भी साफ तौर पर देखे जा सकते हैं। साथ ही भट्टू रोड का स्थानीय बस स्टैंड है। यहां पर भी हर वक्त दर्जनों लोग बस का इंतजार करते हैं। उनके स्वास्थ्य को भी खतरा है, लेकिन गाड़ियों में बैठकर दफ्तर के अंदर-बाहर जाने वाले अफसरों को शायद इससे फर्क नहीं पड़ता।
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स्थान : नया बस अड्डा, नेशनल हाइवे
हालात : पहले दो दफ्तरों के बाद जलभराव था, लेकिन बस अड्डे की बात ही अलग है। यहां पर बाहर तो जलभराव है ही, प्रांगण में भी कई जगह बरसाती पानी भरा है, लेकिन रोडवेज अधिकारियों की आंखों पर शायद पट्टी बंधी है, जिसके चलते उन्हें बस अड्डा प्रांगण के अंदर की गंदगी दिखाई ही नहीं देती।
स्थान : रेडक्रास भवन, जगजीवनपुरा रोड़
हालात : शहर के सभी सरकारी दफ्तरों में से शायद सबसे बुरे हालात में रहने वाला सरकारी दफ्तर है रेडक्रास भवन। एक समय में सभी मजलूमों के काम आने वाला रेडक्रास भवन आजकल खुद मुफलिसी का शिकार मालूम होता है। रेडक्रास दफ्तर के गेट के आगे आप पैदल जा ही नहीं सकते। मेन गेट से लेकर बिल्डिंग तक का सफर बामुश्किल 20 कदम का होगा, लेकिन इसे पार करने के लिए कम से कम 5 से 7 मिनट का समय चाहिए। वजह, यहां पर बनी बरसाती पानी की झील और उसमें पनपते मच्छर, जो किसी भी आदमी को बीमार कर सकते हैं, बहुत बीमार।
स्थान : ट्रैफिक थाना और विजिलेंस भवन
हालात : रेडक्रॉस भवन के बिल्कुल साथ लगते ट्रैफिक थाने और विजिलेंस भवन में भी कुछ अलग नहीं मिला। गंदे पानी की झील तो यहां पर भी है। खड़े पानी में बीमारी पैदा करने वाले मच्छर यहां पर देखे जा सकते हैं। गाड़ियों की पासिंग करवाने आदि कामों के लिए यहां भी रोजाना दर्जनों लोग आते हैं। इसके अलावा इसी दफ्तर के कर्मचारी भी हैं, जो दिन-रात सड़क पर तैनात रहकर शहर का ट्रैफिक संभालते हैं, लेकिन उनकी सेहत संभालने की बजाए उन्हीं के दफ्तर में उनकी सेहत दांव पर लगी हुई है।
ये चौंकाने वाली बात है, दो दिन हो गए बारिश हुए। अभी तक दफ्तरों में जलभराव होना साफ तौर पर लापरवाही है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दूंगा कि तुरंत जलभराव को ठीक करवाएं। सरकारी दफ्तरों में रोजाना लोगों का आना-जाना लगा रहता है। सरकारी दफ्तर उनकी समस्या को दूर करने के लिए हैं, न कि उनको बीमारी के रूप में एक और समस्या देने के लिए। जल्द ही सभी दफ्तरों में हालात अपने स्तर पर भी चेक कराऊंगा।
जेके अभीर, अतिरिक्त उपायुक्त, फतेहाबाद ।