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कैसे हो रैन, जब सिर्फ कागजों में हो बसेरा
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Tue, 03 Jan 2017 12:06 AM IST
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रैन बसेरे के कमरे पर लगा ताला ।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिले में पारा गिरकर पांच डिग्री तक जा पहुंचा है। ठंड में राहगीरों को रुकने के लिए मिलने वाला रैन बसेरा महज कागजों में ही सिमट कर रह गया है। यूं तो सरकारी कागजों में पंचायत भवन के अंदर रैन बसेरे की व्यवस्था की गई है, लेकिन इसकी खबर भी किसी राहगीरों को न पहुंचे, इसके पूरे प्रबंध भी किए गए हैं। कम से कम रैन बसेरे के सिस्टम को देखकर तो ऐसा ही लगता है। पंचायत भवन की दूसरी मंजिल पर स्थित रैन बसेरे का बोर्ड तक पंचायत भवन के बाहर से हटा दिया गया है।
ऐसे में ठंड से ठिठुरता राहगीर कैसे रैन बसेरे तक पहुंचेगा, इसका जवाब न तो प्रशासन के पास है और न ही व्यवस्था के पास। डीडीपीओ इसका ठीकरा नगर परिषद के सिर फोड़ते हैं। उनके अनुसार पंचायत विभाग ने रैन बसेरे के लिए जगह मुहैया करवा दी है। अब इसकी देखभाल और शहर में इसका प्रचार तो नगर परिषद ही करेगी।
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रैन बसेरे पर जड़ा है ताला, दूसरे को बना दिया सेफ हाउस
सबसे पहले तो पंचायत भवन की दूसरी मंजिल पर स्थित रैन बसेरे तक पहुंचने में ही बुजुर्गों को ठंड में ही पसीने आ जाएं। कोई हिम्मत कर दूसरी मंजिल पर पहुंच भी जाए तो रैन बसेरे के कमरे पर लटकता ताला, उसकी रही-सही हिम्मत को भी तोड़ देगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रैन बसेरे के लिए प्रशासन ने यहां पर दो कमरे निर्धारित किए थे लेकिन एक कमरे को प्रेमी जोड़ों के रहने के लिए सेफ हाउस में तब्दील कर दिया गया है। ऐसे में सुरक्षा के मद्देनजर यहां पर किसी भी अजनबी को आना सख्त मना है। इसी कमरे के सामने स्थित है रैन बसेरे का दूसरा कमरा, जिसके बाहर हमेशा ताला लटका रहता है।
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पुरानी कचहरी में 15 मरले का प्रस्तावित था रैन बसेरा
पूर्व उपायुक्त डॉ. साकेत कुमार के कार्यकाल में पुरानी कचहरी की जगह पर लगभग 15 मरले की जगह में एक स्थायी रैन बसेरा बनाने का प्रस्ताव जिला प्रशासन लेकर आया था। इतना ही नहीं, प्रशासन की उस योजना के तहत इस भवन के निर्माण पर 80 लाख रुपये खर्च होने थे। पुरानी कचहरी में बनाए जाने वाले रैनबसेरा में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग से रिहायश की व्यवस्था की बात भी रखी गई थी। योजना को मूर्त रूप देने के लिए भवन के निर्माण संबंधी नक्शे की मंजूरी के लिए विस्तृत रिपोर्ट चंडीगढ़ भेजी गई थी। लेकिन इस बीच तत्कालीन डीसी डॉ. साकेत कुमार का तबादला हो गया और इसके बाद ये मामला ही ठंडे बस्ते में चला गया।
पांच डिग्री तक पहुंच गया है न्यूनतम पारा
जिले में पिछले कई दिनों से लगातार शीत लहर चल रही है जिसके चलते पिछले दो-तीन दिन से न्यूनतम तापमान पांच डिग्री के आसपास रह रहा है। इसके अलावा सुबह के वक्त रोजाना धुंध भी ठंड को लगातार बढ़ा रही है। धुंध के चलते सूर्य देवता के दर्शन अक्सर दोपहर बाद ही होते हैं और सायं साढ़े चार और पांच के करीब अंधेरा होना शुरू हो जाता है। मौसम विभाग की मानें तो फतेहाबाद में अभी तीन-चार दिन तक और धुंध रहने की संभावना है।
न अब तक अलाव की व्यवस्था, न रैन-बसेरे की सूचना की
नियम के मुताबिक ठंड अधिक होने की सूरत में उन सभी जगहों पर सार्वजनिक अलाव जलाने के निर्देश सरकार की ओर से जारी किए गए हैं जहां पर यातायात के साधन रुकते हों या यात्रियों के आने-जाने का स्थान हो। इसके अलावा जिले के बस अड्डों, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर रैन बसेरे की सुविधा और वहां तक पहुंचने के सूचनापट लगाने के भी निर्देश दिए थे। लेकिन फतेहाबाद में ऐसेे किसी भी निर्देश का पालन नहीं हो रहा।
इस बारे में बात करने पर डीडीपीओ राजेश खोथ ने कहा कि पंचायत विभाग ने रैन बसेरे के लिए जगह मुहैया करवा दी है। अब इसका प्रचार और देखरेख का काम तो नगर परिषद का है। उनको इस बाबत पत्र लिखकर कहा जाएगा कि इसकी व्यवस्था संभालें ।