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नोटिस मिलने से भड़के जाट आंदोलनकारी
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Mon, 30 Jan 2017 11:25 PM IST
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धरना स्थल पर सुरक्षा की कमान संभाले एएसपी गंगा राम पूनियां व पुलिस बल।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर गांव ढाणी गोपाल के खेतों में लगाया गया धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने जहां प्रशासन द्वारा नोटिस दिए जाने पर सख्त आपत्ति दर्ज कराई वहीं सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। धरने की अध्यक्षता जिला प्रधान रघुबीर सिंह गाजूवाला ने की।
उन्होंने कहा कि जाटों द्वारा आरक्षण का मुख्य कारण 6 मांगे हैं, जिनमें केंद्र और राज्य में जाटों को आरक्षण देना, फरवरी 2016 के आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिवार वालों और घायलों को मुआवजा और मारे गए लोगों के आश्रितों को नौकरी देना, दर्ज किए गए मुकदमे वापस लेना, दोषी अफसरों पर कार्रवाई करने, सांसद राजकुमार सैनी की स्पीच की जांच करने के बाद उनकी संसद से मेंबरशिप रद्द करने और आंदोलन के दौरान जेल भेजे गए जाटों को रिहा करने की मांग शामिल है। उन्होंने कहा कि जिला फतेहाबाद में उनका आंदोलन शांतिपूर्वक रहा है। सोमवार को धरने के दूसरे दिन भी भीड़ में कोई खास इजाफा नहीं दिखा। सुबह जहां महज 8-10 लोग ही धरने पर थे तो दोपहर तक ये संख्या 70-80 तक पहुंची लेकिन सांझ होते होते ये संख्या घटकर 40-50 पर ही रह गई।
ढाणी गोपाल में जाट आंदोलनकारियों के धरने पर कम भीड़ के बावजूद पुलिस प्रशासन किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं दिखा। सोमवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट एसडीएम सतबीर सिंह जांगू एवं डीपीआईआरओ सुरेंद्र सैनी ने धरनास्थल पर जाकर प्रदर्शनकारियों को कानून के दायरे में ही रहने के निर्देश दिए। जांगू ने कहा कि कानून हर व्यक्ति के लिए समान है। एएसपी गंगाराम पूनिया, इंस्पेक्टर विमला सांगवान, विक्रमजीत सिंह, डीआई जुगलकिशोर व भूना थानाध्यक्ष जयभगवान भारी पुलिस बल सहित धरना स्थल पर अपनी पैनी नजरें जमाए थे। समाचार लिखे जाने तक करीब 40-50 लोग धरने पर मौजूद थे और शांतिपूर्वक ढंग से चल रहे धरने में बुजुर्गों की संख्या उल्लेखनीय थी और महिलाएं और युवा धरने से दूरी बनाए हैं।
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नोटिस देना बंद करे प्रशासन: जाट नेता
संघर्ष समिति के जिला प्रधान रघुबीर सिंह गाजूवाला, बलवान सिंह ढाणी सांचला ने एएसपी के पास पहुंचकर धरने में शामिल होने वाले लोगों को नोटिस प्रक्रिया बंद करने की मांग की है। मगर एएसपी ने कोर्ट का आदेशों का हवाला देकर उनके तर्क को खारिज कर दिया। जाट नेताओं ेने मांग की है कि धरने में नोटिस देने से लोगों में भय है, इसलिए नोटिस प्रक्रिया को बंद करना चाहिए।
नोटिस न लेने वाले के घरों पर चस्पा जाएंगे : एएसपी पूनिया
एएसपी गंगा राम पूनिया ने संबंधित नोटिस डिलीवर करने वाले अधिकारी को आदेश दिए हैं कि यदि कोई भी व्यक्ति नोटिस लेनेे से इंकार करता है तो उसके घर के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया जाए। जारी किए गए नोटिस के अनुसार यदि धरना प्रदर्शन के दौरान कोई भी घटना होती है तो उसकी जानमाल की पूरी जिम्मेवारी संबधित व्यक्ति की होगी।
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उन्होंने कहा कि जाटों द्वारा आरक्षण का मुख्य कारण 6 मांगे हैं, जिनमें केंद्र और राज्य में जाटों को आरक्षण देना, फरवरी 2016 के आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिवार वालों और घायलों को मुआवजा और मारे गए लोगों के आश्रितों को नौकरी देना, दर्ज किए गए मुकदमे वापस लेना, दोषी अफसरों पर कार्रवाई करने, सांसद राजकुमार सैनी की स्पीच की जांच करने के बाद उनकी संसद से मेंबरशिप रद्द करने और आंदोलन के दौरान जेल भेजे गए जाटों को रिहा करने की मांग शामिल है। उन्होंने कहा कि जिला फतेहाबाद में उनका आंदोलन शांतिपूर्वक रहा है। सोमवार को धरने के दूसरे दिन भी भीड़ में कोई खास इजाफा नहीं दिखा। सुबह जहां महज 8-10 लोग ही धरने पर थे तो दोपहर तक ये संख्या 70-80 तक पहुंची लेकिन सांझ होते होते ये संख्या घटकर 40-50 पर ही रह गई।
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ढाणी गोपाल में जाट आंदोलनकारियों के धरने पर कम भीड़ के बावजूद पुलिस प्रशासन किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं दिखा। सोमवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट एसडीएम सतबीर सिंह जांगू एवं डीपीआईआरओ सुरेंद्र सैनी ने धरनास्थल पर जाकर प्रदर्शनकारियों को कानून के दायरे में ही रहने के निर्देश दिए। जांगू ने कहा कि कानून हर व्यक्ति के लिए समान है। एएसपी गंगाराम पूनिया, इंस्पेक्टर विमला सांगवान, विक्रमजीत सिंह, डीआई जुगलकिशोर व भूना थानाध्यक्ष जयभगवान भारी पुलिस बल सहित धरना स्थल पर अपनी पैनी नजरें जमाए थे। समाचार लिखे जाने तक करीब 40-50 लोग धरने पर मौजूद थे और शांतिपूर्वक ढंग से चल रहे धरने में बुजुर्गों की संख्या उल्लेखनीय थी और महिलाएं और युवा धरने से दूरी बनाए हैं।
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नोटिस देना बंद करे प्रशासन: जाट नेता
संघर्ष समिति के जिला प्रधान रघुबीर सिंह गाजूवाला, बलवान सिंह ढाणी सांचला ने एएसपी के पास पहुंचकर धरने में शामिल होने वाले लोगों को नोटिस प्रक्रिया बंद करने की मांग की है। मगर एएसपी ने कोर्ट का आदेशों का हवाला देकर उनके तर्क को खारिज कर दिया। जाट नेताओं ेने मांग की है कि धरने में नोटिस देने से लोगों में भय है, इसलिए नोटिस प्रक्रिया को बंद करना चाहिए।
नोटिस न लेने वाले के घरों पर चस्पा जाएंगे : एएसपी पूनिया
एएसपी गंगा राम पूनिया ने संबंधित नोटिस डिलीवर करने वाले अधिकारी को आदेश दिए हैं कि यदि कोई भी व्यक्ति नोटिस लेनेे से इंकार करता है तो उसके घर के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया जाए। जारी किए गए नोटिस के अनुसार यदि धरना प्रदर्शन के दौरान कोई भी घटना होती है तो उसकी जानमाल की पूरी जिम्मेवारी संबधित व्यक्ति की होगी।