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जल्द बजेगी नप चुनाव की रणभेरी, समर्थित उम्मीदवार नहीं उतारेगी भाजपा
अमित रूख्ााया/अमर उजाला, फतेहाबाद
Updated Wed, 23 Mar 2016 12:33 AM IST
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चुनाव
- फोटो : file
पंचायत चुनाव के सफलतापूर्वक आयोजन के बाद प्रदेश सरकार अब जल्द से जल्द नगर परिषद चुनाव करवाने की तैयारियों में जुट गई है। प्रदेश भर में नगर परिषद चुनाव के लिए बहुत जल्द घोषणा हो सकती है। सूत्रों की मानें तो वोटर लिस्ट का काम लगभग पूरा हो चुका है और अगर कोई अड़चन नहीं आई तो अप्रैल माह में ही नप चुनावों का एलान किया जा सकता है। नप चुनावों के लिए वोटिंग मई के आखिरी हफ्ते तक हो सकती है और जून के प्रथम सप्ताह तक लोकल सरकार अपने कामकाज में जुट जाने की संभावना है। सूचना यह है कि इस बार लगभग 49 हजार वोटर अपने-अपने वार्ड की चौधर का फैसला करेंगे।
बीजेपी नहीं देगी किसी उम्मीदवार को समर्थन
सत्ताधारी बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो नगर परिषद के चुनाव में किसी उम्मीदवार को भाजपा समर्थित उम्मीदवार नहीं बनाया जाएगा, बल्कि बीजेपी जीते हुए पार्षदों पर ही दांव लगाएगी। जिला परिषद चुनाव में बीजेपी समर्थित उम्मीदवारों को हरा कर जिला पार्षद बने सदस्यों को जब बीजेपी ने अपने खेमे में लाने का प्रयास किया तो बीजेपी विरोधी मोर्चा ही खड़ा हो गया और जिसके चलते अब बीजेपी को अपने ही प्रदेशाध्यक्ष के गृह जिले में जिप चेयरमैन बनवाने में नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं। ऐसे में बीजेपी थिंक टैंक ने साफ तौर पर सलाह दी है कि बीजेपी ना तो अपने चुनाव चिहन का इन चुनावों में इस्तेमाल करेगी और ना ही किसी उम्मीदवार को चुनाव से पहले अपना समर्थन देगी। बीजेपी के इस कदम से नप चुनाव की तैयारियों में जुटे स्थानीय बीजेपी नेताओं को खासा झटका लगना तय है।
नप चुनावों में बीजेपी को बेहतर नतीजों की आस
नगर परिषद चुनावों को लेकर बीजेपी आश्वस्त है। पार्टी को अंदरूनी सर्वे एवं खुफिया विभाग की रिपोर्ट के आधार पर नप चुनावों में अच्छे नतीजों के संकेत मिले हैं। हालांकि यह रिपोर्ट जाट आंदोलन से पहले की है। फतेहाबाद में जाट आंदोलन का मानसिक असर चुनावी नतीजों पर कितना असर डालते हैं, यह भी देखने योग्य होगा। प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनते ही कई पार्षदों ने बीजेपी का दामन थाम लिया था। उनमें से अधिकतर दोबारा से पार्षद बनने की तैयारियों में जुटे हैं। इनमें सुमन बाला मेहता, मदन बंसल, रमेश गिल्होत्रा , सुनील बंसल, दर्शन लाल नागजपाल सहित कई पार्षद प्रमुख हैं। मदन बंसल से वरिष्ठ भाजपा नेत्री सुनीता दुग्गल की नजदीकियां किसी से छिपी नहीं है, लेकिन चुनाव के दौरान इन नेताओं का क्या रुख रहता है, इस पर भी सबकी नजरें रहेंगी।
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पिछले साल जून में भंग हुई थी फतेहाबाद नगर परिषद
फतेहाबाद नगर परिषद का कार्यकाल मई के अंत में समाप्त हो गया था और जून में ही फतेहाबाद नगर परिषद को भंग घोषित कर दिया गया था। इसके बाद से लगभग एक साल से एसडीएम ही बतौर प्रशासक नगर परिषद को संभाल रहे हैं। नगर परिषद के कार्यकाल के अंतिम दिनों में साढ़े चार साल से प्रधान पद पर काबिज वीरेन्द्र नारंग को हटाने के लिए पार्षदों के एक धड़े ने एड़ी-चोटी का जोर लगा लिया था। सरकार बदलने के बाद नगर परिषद प्रधान बदला तो गया लेकिन बिना वित्तीय शक्तियों के सुनील बंसल को प्रधानगी ज्यादा रास आई नहीं। इस बीच नगर परिषद भंग होने से शहरी सरकार अफसरों के हाथ आ गई।
29 मार्च तक वोटर लिस्ट को प्रकाशित कर देंगे। इसके बाद प्रदेश सरकार कभी भी चुनाव करा सकती है। नगर परिषद प्रशासन की पूरी तैयारी है।
एचकेशर्मा, एमई, नगर परिषद, फतेहाबाद
नगर परिषद चुनावों की घोषणा होने के बाद ही इस बारे में कोई रणनीति का खुलासा कर सकेंगे। अभी तो सिर्फ इतना कह सकता हूं कि बीजेपी नगर परिषद चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार है।
वेद फुलां, भाजपा जिलाध्यक्ष, फतेहाबाद
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बीजेपी नहीं देगी किसी उम्मीदवार को समर्थन
सत्ताधारी बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो नगर परिषद के चुनाव में किसी उम्मीदवार को भाजपा समर्थित उम्मीदवार नहीं बनाया जाएगा, बल्कि बीजेपी जीते हुए पार्षदों पर ही दांव लगाएगी। जिला परिषद चुनाव में बीजेपी समर्थित उम्मीदवारों को हरा कर जिला पार्षद बने सदस्यों को जब बीजेपी ने अपने खेमे में लाने का प्रयास किया तो बीजेपी विरोधी मोर्चा ही खड़ा हो गया और जिसके चलते अब बीजेपी को अपने ही प्रदेशाध्यक्ष के गृह जिले में जिप चेयरमैन बनवाने में नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं। ऐसे में बीजेपी थिंक टैंक ने साफ तौर पर सलाह दी है कि बीजेपी ना तो अपने चुनाव चिहन का इन चुनावों में इस्तेमाल करेगी और ना ही किसी उम्मीदवार को चुनाव से पहले अपना समर्थन देगी। बीजेपी के इस कदम से नप चुनाव की तैयारियों में जुटे स्थानीय बीजेपी नेताओं को खासा झटका लगना तय है।
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नप चुनावों में बीजेपी को बेहतर नतीजों की आस
नगर परिषद चुनावों को लेकर बीजेपी आश्वस्त है। पार्टी को अंदरूनी सर्वे एवं खुफिया विभाग की रिपोर्ट के आधार पर नप चुनावों में अच्छे नतीजों के संकेत मिले हैं। हालांकि यह रिपोर्ट जाट आंदोलन से पहले की है। फतेहाबाद में जाट आंदोलन का मानसिक असर चुनावी नतीजों पर कितना असर डालते हैं, यह भी देखने योग्य होगा। प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनते ही कई पार्षदों ने बीजेपी का दामन थाम लिया था। उनमें से अधिकतर दोबारा से पार्षद बनने की तैयारियों में जुटे हैं। इनमें सुमन बाला मेहता, मदन बंसल, रमेश गिल्होत्रा , सुनील बंसल, दर्शन लाल नागजपाल सहित कई पार्षद प्रमुख हैं। मदन बंसल से वरिष्ठ भाजपा नेत्री सुनीता दुग्गल की नजदीकियां किसी से छिपी नहीं है, लेकिन चुनाव के दौरान इन नेताओं का क्या रुख रहता है, इस पर भी सबकी नजरें रहेंगी।
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पिछले साल जून में भंग हुई थी फतेहाबाद नगर परिषद
फतेहाबाद नगर परिषद का कार्यकाल मई के अंत में समाप्त हो गया था और जून में ही फतेहाबाद नगर परिषद को भंग घोषित कर दिया गया था। इसके बाद से लगभग एक साल से एसडीएम ही बतौर प्रशासक नगर परिषद को संभाल रहे हैं। नगर परिषद के कार्यकाल के अंतिम दिनों में साढ़े चार साल से प्रधान पद पर काबिज वीरेन्द्र नारंग को हटाने के लिए पार्षदों के एक धड़े ने एड़ी-चोटी का जोर लगा लिया था। सरकार बदलने के बाद नगर परिषद प्रधान बदला तो गया लेकिन बिना वित्तीय शक्तियों के सुनील बंसल को प्रधानगी ज्यादा रास आई नहीं। इस बीच नगर परिषद भंग होने से शहरी सरकार अफसरों के हाथ आ गई।
29 मार्च तक वोटर लिस्ट को प्रकाशित कर देंगे। इसके बाद प्रदेश सरकार कभी भी चुनाव करा सकती है। नगर परिषद प्रशासन की पूरी तैयारी है।
एचकेशर्मा, एमई, नगर परिषद, फतेहाबाद
नगर परिषद चुनावों की घोषणा होने के बाद ही इस बारे में कोई रणनीति का खुलासा कर सकेंगे। अभी तो सिर्फ इतना कह सकता हूं कि बीजेपी नगर परिषद चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार है।
वेद फुलां, भाजपा जिलाध्यक्ष, फतेहाबाद