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परिणय सूत्र में बंधने के लिए लगी होड़.....
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Sat, 05 Nov 2016 11:55 PM IST
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देव-उठानी एकादशी के उपलक्ष्य में पहले से ही सजे मैरिज पैलेस
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पिछले चार महीने से परिणय सूत्र में बंधने का इंतजार कर रहे जोड़ों को एक होने में कुछ दिन ही शेष बचे हैं। 19 जुलाई को देव शयनी पर बंद हुई शादियों का सिलसिला 11 नवंबर को देव उठानी एकादशी के साथ ही शुरू हो जाएगा। 11 नवंबर को देव उठानी पर शादियों का अबूझ साया है। सीजन की सबसे अधिक शादियां इसी दिन होनी है। फतेहाबाद जिले में करीबन सवा सौ जोड़े इस दिन परिणय सूत्र में बंधेंगे।
गुलाबी ठंड में शहनाइयों की मधुर गूंज की तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। 11 नवंबर से शादियों का सिलसिला शुरू होकर 14 दिसंबर तक चलेगा। हालांकि शादियों का सबसे बड़ा मुहूर्त 11 नवंबर को है। 14 दिसंबर के बाद विवाह योग्य युवकों को 13 जनवरी तक इंतजार करना होगा। 11 नवंबर से 14 दिसंबर तक 33 दिन शुभ मुुहूर्त होने से शहर में शादियों की धूम रहेगी।
क्या होती है देव उठानी एकादशी
शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु चार मास के लिए विश्राम करते हैं, जिसे चातुर्मास बोला जाता है। 15 जुलाई को भगवान विष्णु नींद में गए थे, जिसे देवशयनी के नाम से जाना जाता है। इस दौरान सभी शुभ काम वर्जित होते हैं। माना जाता है कि देवों के उठने के बाद ही सारे शुभ काम पूरे होते हैं। अब 11 नवंबर के दिन भगवान विष्णु द्वारा अपनी निद्रा से उठने के बाद विवाह का शुभ संयोग बनता है। जिस कारण देवउठनी एकादशी का दिन विवाह के लिए सबसे बड़ा सावा है।
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शादी की तैयारियों से जुड़े लोगों की बल्ले-बल्ले
इस दिन जिले में सबसे अधिक युवा परिणय सूत्र में बंधेंगे, जिसके चलते शहर के अधिकांश मैरिज पैलेस, धर्मशालाओं, टेंट हाउस, फोटो स्टूडियो, बसों और कारों की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। शादी समारोहों से जुड़े लोगों की बल्ले-बल्ले हो रही है।
वहीं कुछ लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर के सभी धर्मशालाओं व मैरिज पैलेसों में एडवांस बुकिंग है, जिस कारण बाहर से आने वाले यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बस स्टैंड के साथ स्थित अग्रवाल धर्मशाला में 14 दिसंबर तक लगातार बुकिंग है, इसी तरह अरोड़वंश धर्मशाला, रंगोली रिसोर्ट पहले से ही बुक हैं। एक अनुमान के मुताबिक 11 नवंबर से 14 दिसंबर तक जिले में ढाई सौ युवा परिणय सूत्र में बंधेंगे।
दिन-रात दो शिफ्टों में है शादियों की बुकिंग
रंगोली रिसोर्ट के संचालक ललित मेहता ने बताया कि नवंबर महीने मेें उनके पास दिन-रात दो शिफ्टों में शादियों की बुकिंग है। सरदाना डीजे सेंटर के संचालक राजू सरदाना ने बताया कि पहले वह 7 हजार रुपये में डीजे की बुकिंग कर लेते थे, लेकिन इन दिनों डीजे की पूरी डिमांड है। लोग 10 से 12 हजार रुपये तक देने को तैयार हैं। इसी प्रकार प्रिंटिंग प्रेस वालों की पूछ भी एकाएक बढ़ गई है। भानू प्रेस रतिया के मालिक सचिन तनेजा ने बताया कि दशहरे के बाद उनका सीजन लगातार चल रहा है।
14 दिसंबर तक की शादियों के उनके पास सैकड़ों ऑर्डर आए हैं। श्री श्याम मंदिर के पुजारी एवं ज्योतिष राजेश शर्मा ने बताया कि 11 नवंबर के बाद 16 नवंबर व उसके बाद 28, 29 और 30 के बहुत बड़े साए हैं। 11 नवंबर को अकेले उनके पास 25 शादियों का निमंत्रण आ चुका है। उन्होंने बताया कि यह सिलसिला 14 दिसंबर तक चलेगा। उसके बाद 13 जनवरी को लोहड़ी वाले दिन शादियां है। उसके बाद यह सीजन फिर अप्रैल में आएगा।
पहले हलवाई ढूंढो
मंदी की मार के चलते कभी खाली बैठकर सारा दिन ग्राहकों के इंतजार करते हलवाई और कैटरर्स अब ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। कई रईस लोगों ने अच्छे कैटरर्स नहीं मिलने पर दिल्ली व लुधियाना से कैटरिंग का सामान मंगवाया है। इतना ही नहीं गांव में छोटी-मोटी दुकान चलाने वाले हलवाइयों की भी चांदी बनी हुई है। नए करेंसी नोटों की ब्लैक भी शुरू हो गई है।
सप्ताह पहले ही सजने लगे है मैरिज पैलेस
हालांकि शादियों के सीजन को शुरू होने में एक सप्ताह शेष है। लेकिन अभी से गुलाबी ठंड और शहनाईयों की मधुर गूंज से इन दिनों शहर की फिजा बदली हुई है। शहर की प्रत्येक गलियों में कहीं ना कहीं लड़ियां जगमगाती देखी जा सकती हैं और तो और सड़कों, धर्मशालाओं और मैरिज पैलेसों में बैंड बाजे की तैयारियों में जुटे है।
गुलाबी ठंड में शहनाइयों की मधुर गूंज की तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। 11 नवंबर से शादियों का सिलसिला शुरू होकर 14 दिसंबर तक चलेगा। हालांकि शादियों का सबसे बड़ा मुहूर्त 11 नवंबर को है। 14 दिसंबर के बाद विवाह योग्य युवकों को 13 जनवरी तक इंतजार करना होगा। 11 नवंबर से 14 दिसंबर तक 33 दिन शुभ मुुहूर्त होने से शहर में शादियों की धूम रहेगी।
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क्या होती है देव उठानी एकादशी
शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु चार मास के लिए विश्राम करते हैं, जिसे चातुर्मास बोला जाता है। 15 जुलाई को भगवान विष्णु नींद में गए थे, जिसे देवशयनी के नाम से जाना जाता है। इस दौरान सभी शुभ काम वर्जित होते हैं। माना जाता है कि देवों के उठने के बाद ही सारे शुभ काम पूरे होते हैं। अब 11 नवंबर के दिन भगवान विष्णु द्वारा अपनी निद्रा से उठने के बाद विवाह का शुभ संयोग बनता है। जिस कारण देवउठनी एकादशी का दिन विवाह के लिए सबसे बड़ा सावा है।
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शादी की तैयारियों से जुड़े लोगों की बल्ले-बल्ले
इस दिन जिले में सबसे अधिक युवा परिणय सूत्र में बंधेंगे, जिसके चलते शहर के अधिकांश मैरिज पैलेस, धर्मशालाओं, टेंट हाउस, फोटो स्टूडियो, बसों और कारों की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। शादी समारोहों से जुड़े लोगों की बल्ले-बल्ले हो रही है।
वहीं कुछ लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर के सभी धर्मशालाओं व मैरिज पैलेसों में एडवांस बुकिंग है, जिस कारण बाहर से आने वाले यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बस स्टैंड के साथ स्थित अग्रवाल धर्मशाला में 14 दिसंबर तक लगातार बुकिंग है, इसी तरह अरोड़वंश धर्मशाला, रंगोली रिसोर्ट पहले से ही बुक हैं। एक अनुमान के मुताबिक 11 नवंबर से 14 दिसंबर तक जिले में ढाई सौ युवा परिणय सूत्र में बंधेंगे।
दिन-रात दो शिफ्टों में है शादियों की बुकिंग
रंगोली रिसोर्ट के संचालक ललित मेहता ने बताया कि नवंबर महीने मेें उनके पास दिन-रात दो शिफ्टों में शादियों की बुकिंग है। सरदाना डीजे सेंटर के संचालक राजू सरदाना ने बताया कि पहले वह 7 हजार रुपये में डीजे की बुकिंग कर लेते थे, लेकिन इन दिनों डीजे की पूरी डिमांड है। लोग 10 से 12 हजार रुपये तक देने को तैयार हैं। इसी प्रकार प्रिंटिंग प्रेस वालों की पूछ भी एकाएक बढ़ गई है। भानू प्रेस रतिया के मालिक सचिन तनेजा ने बताया कि दशहरे के बाद उनका सीजन लगातार चल रहा है।
14 दिसंबर तक की शादियों के उनके पास सैकड़ों ऑर्डर आए हैं। श्री श्याम मंदिर के पुजारी एवं ज्योतिष राजेश शर्मा ने बताया कि 11 नवंबर के बाद 16 नवंबर व उसके बाद 28, 29 और 30 के बहुत बड़े साए हैं। 11 नवंबर को अकेले उनके पास 25 शादियों का निमंत्रण आ चुका है। उन्होंने बताया कि यह सिलसिला 14 दिसंबर तक चलेगा। उसके बाद 13 जनवरी को लोहड़ी वाले दिन शादियां है। उसके बाद यह सीजन फिर अप्रैल में आएगा।
पहले हलवाई ढूंढो
मंदी की मार के चलते कभी खाली बैठकर सारा दिन ग्राहकों के इंतजार करते हलवाई और कैटरर्स अब ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। कई रईस लोगों ने अच्छे कैटरर्स नहीं मिलने पर दिल्ली व लुधियाना से कैटरिंग का सामान मंगवाया है। इतना ही नहीं गांव में छोटी-मोटी दुकान चलाने वाले हलवाइयों की भी चांदी बनी हुई है। नए करेंसी नोटों की ब्लैक भी शुरू हो गई है।
सप्ताह पहले ही सजने लगे है मैरिज पैलेस
हालांकि शादियों के सीजन को शुरू होने में एक सप्ताह शेष है। लेकिन अभी से गुलाबी ठंड और शहनाईयों की मधुर गूंज से इन दिनों शहर की फिजा बदली हुई है। शहर की प्रत्येक गलियों में कहीं ना कहीं लड़ियां जगमगाती देखी जा सकती हैं और तो और सड़कों, धर्मशालाओं और मैरिज पैलेसों में बैंड बाजे की तैयारियों में जुटे है।