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8 हजार की लागत से बना पार्षद का निजी बोर्ड मजबूत, नप के18 हजार वाले बोर्ड दो माह में टूटे
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद
Updated Tue, 14 Feb 2017 11:48 PM IST
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नेशनल हाइवे पर मॉडल टाऊन मोड़ पर क्षतिग्रस्त हुआ नप अध्यक्ष दर्शन नागपाल का बोर्ड ।
- फोटो : bureau
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ईमानदारी का डंका बजाने वाली भाजपा की अगुवाई वाली नगर परिषद में पार्षद बोर्ड घोटाला सामने आया है। फतेहाबाद शहर में लगाए गए पार्षदों के नाम वाले बोर्ड दो माह में ही टूट गए हैं। टूटे बोर्डों में नगर परिषद अध्यक्ष दर्शन नागपाल के वार्ड में लगाया गया बोर्ड भी शामिल है। दरअसल असल झोल इन बोर्ड की क्वालिटी और इनकी कीमत में है। शहर भर में पार्षदों के निवास का पता बताने वाले इन बोर्ड की कीमत 18 हजार रुपये प्रति बोर्ड और 25 बोर्ड के लिहाज से शहर भर में लगभग साढ़े 4 लाख कीमत के बोर्ड लगाए गए हैं। जबकि शहर के ही एक पार्षद अनीता कुक्कड़ ने इन बोर्ड के लगने से पहले अपने निजी खर्च पर एक बोर्ड लगाया था जिसकी लागत महज 8200 रुपये आई थी और ये बोर्ड अब तक मजबूत खड़ा है। खुद पार्षद प्रतिनिधि सोनू कुक्कड़ ने अपने खर्च पर 8200 रुपये में बोर्ड लगाने की पुष्टि की है। उधर, इस मामले के सामने आने के बाद नगर परिषद में हड़कंप की स्थिति है। नप कार्यकारी अधिकारी ओपी सिहाग अब इस मामले की जांच की बात कह रहे हैं।
18 हजार के बोर्ड में नाम की जगह पर स्टील की जगह गत्ते का इस्तेमाल
इस सारे मसले में हैरानी की बात ये है कि नगर परिषद द्वारा शहर के विभिन्न वार्डों में लगाए गए इन बोर्डों में जिस जगह पर नाम लिखा गया है, वहां पर स्टील की जगह गत्ते का इस्तेमाल किया गया है। जबकि नियमानुसार नाम वाली शीट भी स्टील की होनी चाहिए थी। उधर, पार्षद अनीता कुक्कड़ द्वारा अपने निजी कोष में से 8 हजार की लागत से बनवाए गए बिल्कुल इसी प्रकार के बोर्ड में उनका नाम स्टील की शीट पर लिखा गया है। वजन की बात की जाए तो भी सरकारी पार्षद बोर्ड, 8 हजार वाले कीमत के निजी बोर्ड से काफी हल्के हैं। सूत्रों की मानें तो कई पार्षदों ने दबी जुबान में इसकी शिकायत नगर परिषद अध्यक्ष से भी की है। पार्षदों ने इन बोर्ड की खरीद में घोटाले की आशंका भी व्यक्त की है।
प्रधान का बोर्ड टूटा, सैनी के बोर्ड के खंभे बचे, वीरेंद्र एडवोकेट ने अपने खर्च पर करवाया ठीक
‘अमर उजाला’ की तहकीकात में सामने आया है कि खुद नगर परिषद अध्यक्ष दर्शन नागपाल के नेशनल हाइवे पर लगे बोर्ड के बीच में नाम वाला हिस्सा बुरी तरह टूट गया है। इसके अलावा पार्षद राजकुमार सैनी के वार्ड के बाहर लगे बोर्ड के तो स्टील के खंभे ही बाकी रह गए हैं। बीच का पूरा हिस्सा ही गायब है। नगर पार्षद एडवोकेट वीरेंद्र के वार्ड में लगा उनका बोर्ड भी क्षतिग्रस्त हो गया था जिसे उन्होंने उसी दिन अपने खुद के खर्च पर ठीक करवा लिया था। इसी तरह कई अन्य पार्षदों के बोर्ड के बीच का गत्ता टूटने की कगार पर है।
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पूर्व पार्षदों के बोर्ड उखाड़ना चाहती थी नप, वही बोर्ड आज तक मजबूती से खड़े
वर्तमान नगर परिषद कमेटी के कार्यकाल की शुरुआत में ही पूर्व पार्षदों के नाम वाले बोर्डों को लेकर विवाद शुरू हो गया था। कई वर्तमान पार्षदों के ऐतराज पर नप प्रशासन ने पूर्व पार्षदों के बोर्ड उखाड़ने का काम शुरू भी कर दिया था लेकिन फिर ये काम रोक दिया गया। पिछले कार्यकाल यानि लगभग सात साल पहले लगाए गए इन पूर्व पार्षदों के बोर्ड आज तक मजबूती से खड़े हैं। सूत्रों की मानें तो पिछले पार्षदों के बोर्ड पर प्रति बोर्ड लगभग 3 हजार की लागत आई थी। ऐसे में ये सवाल खड़ा होना लाजिमी है कि महज पार्षदों के नाम लिखवाने के लिए नगर परिषद प्रशासन को साढ़े चार लाख खर्च करना गैरजरूरी क्यों नहीं लगा। जबकि इस कार्यकाल की शुरुआत में नप प्रशासन के पास कर्मचारियों की तनख्वाह देने के लिए पैसे नहीं थे। नप द्वारा संचालित नंदीशाला पिछले चार माह से खर्चों की बाट जोह रही है।
मामला खुला तो अब जांच की बात कह रहे नप ईओ
अमर उजाला द्वारा इस संदर्भ में जब नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी ओपी सिहाग से बात की गई तो उन्होंने माना कि इतने महंगे बोर्ड का इतनी जल्दी टूट जाना गंभीर बात है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच करवाई जाएगी।
अभी मीटिंग में व्यस्त हूं, फिर बात करूंगा: नप अध्यक्ष
दूसरी ओर इस बारे में जब नप अध्यक्ष दर्शन नागपाल से बात की गई तो पहले तो उन्होंने कहा कि शायद कोई वाहन टक्कर मार गया होगा। जब उनसे कीमत अधिक होने की बात कही गई तो उन्होंने कहा कि अभी मीटिंग में व्यस्त हूं, फिर बात करूंगा।
पूर्व प्रधान वीरेंद्र नारंग ने उठाए सवाल
पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष वीरेंद्र नारंग ने भी इन बोर्ड की ऊंची कीमत एवं घटिया क्वालिटी पर सवाल खड़े किए हैं। बात करने पर उन्होंने कहा कि शहर का एक सम्मानित पार्षद अपने खर्च पर बोर्ड लगाता है तो उसकी लागत कम आती है लेकिन जब नप प्रशासन बोर्ड लगवा रहा है तो उसकी कीमत ज्यादा आना अपने आप में जांच का विषय है।
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18 हजार के बोर्ड में नाम की जगह पर स्टील की जगह गत्ते का इस्तेमाल
इस सारे मसले में हैरानी की बात ये है कि नगर परिषद द्वारा शहर के विभिन्न वार्डों में लगाए गए इन बोर्डों में जिस जगह पर नाम लिखा गया है, वहां पर स्टील की जगह गत्ते का इस्तेमाल किया गया है। जबकि नियमानुसार नाम वाली शीट भी स्टील की होनी चाहिए थी। उधर, पार्षद अनीता कुक्कड़ द्वारा अपने निजी कोष में से 8 हजार की लागत से बनवाए गए बिल्कुल इसी प्रकार के बोर्ड में उनका नाम स्टील की शीट पर लिखा गया है। वजन की बात की जाए तो भी सरकारी पार्षद बोर्ड, 8 हजार वाले कीमत के निजी बोर्ड से काफी हल्के हैं। सूत्रों की मानें तो कई पार्षदों ने दबी जुबान में इसकी शिकायत नगर परिषद अध्यक्ष से भी की है। पार्षदों ने इन बोर्ड की खरीद में घोटाले की आशंका भी व्यक्त की है।
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प्रधान का बोर्ड टूटा, सैनी के बोर्ड के खंभे बचे, वीरेंद्र एडवोकेट ने अपने खर्च पर करवाया ठीक
‘अमर उजाला’ की तहकीकात में सामने आया है कि खुद नगर परिषद अध्यक्ष दर्शन नागपाल के नेशनल हाइवे पर लगे बोर्ड के बीच में नाम वाला हिस्सा बुरी तरह टूट गया है। इसके अलावा पार्षद राजकुमार सैनी के वार्ड के बाहर लगे बोर्ड के तो स्टील के खंभे ही बाकी रह गए हैं। बीच का पूरा हिस्सा ही गायब है। नगर पार्षद एडवोकेट वीरेंद्र के वार्ड में लगा उनका बोर्ड भी क्षतिग्रस्त हो गया था जिसे उन्होंने उसी दिन अपने खुद के खर्च पर ठीक करवा लिया था। इसी तरह कई अन्य पार्षदों के बोर्ड के बीच का गत्ता टूटने की कगार पर है।
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पूर्व पार्षदों के बोर्ड उखाड़ना चाहती थी नप, वही बोर्ड आज तक मजबूती से खड़े
वर्तमान नगर परिषद कमेटी के कार्यकाल की शुरुआत में ही पूर्व पार्षदों के नाम वाले बोर्डों को लेकर विवाद शुरू हो गया था। कई वर्तमान पार्षदों के ऐतराज पर नप प्रशासन ने पूर्व पार्षदों के बोर्ड उखाड़ने का काम शुरू भी कर दिया था लेकिन फिर ये काम रोक दिया गया। पिछले कार्यकाल यानि लगभग सात साल पहले लगाए गए इन पूर्व पार्षदों के बोर्ड आज तक मजबूती से खड़े हैं। सूत्रों की मानें तो पिछले पार्षदों के बोर्ड पर प्रति बोर्ड लगभग 3 हजार की लागत आई थी। ऐसे में ये सवाल खड़ा होना लाजिमी है कि महज पार्षदों के नाम लिखवाने के लिए नगर परिषद प्रशासन को साढ़े चार लाख खर्च करना गैरजरूरी क्यों नहीं लगा। जबकि इस कार्यकाल की शुरुआत में नप प्रशासन के पास कर्मचारियों की तनख्वाह देने के लिए पैसे नहीं थे। नप द्वारा संचालित नंदीशाला पिछले चार माह से खर्चों की बाट जोह रही है।
मामला खुला तो अब जांच की बात कह रहे नप ईओ
अमर उजाला द्वारा इस संदर्भ में जब नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी ओपी सिहाग से बात की गई तो उन्होंने माना कि इतने महंगे बोर्ड का इतनी जल्दी टूट जाना गंभीर बात है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच करवाई जाएगी।
अभी मीटिंग में व्यस्त हूं, फिर बात करूंगा: नप अध्यक्ष
दूसरी ओर इस बारे में जब नप अध्यक्ष दर्शन नागपाल से बात की गई तो पहले तो उन्होंने कहा कि शायद कोई वाहन टक्कर मार गया होगा। जब उनसे कीमत अधिक होने की बात कही गई तो उन्होंने कहा कि अभी मीटिंग में व्यस्त हूं, फिर बात करूंगा।
पूर्व प्रधान वीरेंद्र नारंग ने उठाए सवाल
पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष वीरेंद्र नारंग ने भी इन बोर्ड की ऊंची कीमत एवं घटिया क्वालिटी पर सवाल खड़े किए हैं। बात करने पर उन्होंने कहा कि शहर का एक सम्मानित पार्षद अपने खर्च पर बोर्ड लगाता है तो उसकी लागत कम आती है लेकिन जब नप प्रशासन बोर्ड लगवा रहा है तो उसकी कीमत ज्यादा आना अपने आप में जांच का विषय है।