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आंदोलन को राजनीतिक रंग दे रहे हैं यशपाल मलिक
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद
Updated Fri, 17 Feb 2017 11:33 PM IST
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टोहाना के समैण गांव में पत्रकारो से बात करते हुए जाट आरक्षण संघर्ष समिति के हलका अध्यक्ष बलवंत समैण
- फोटो : bureau
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जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक को घर में ही विरोध का सामना करना पड़ा है। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के टोहाना हलका के पूर्व अध्यक्ष बलवंत समैण ने उन पर बड़ा हमला बोला है। शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में समैण ने आरोप लगाया कि मलिक ने आज तक कोर्ट में विचाराधीन मामले में जाट समुदाय का पक्ष नहीं रखा है, वे महज राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए आंदोलन को बढ़ावा दे रहे हैं।
पत्रकारों से बातचीत में समैण ने यशपाल मलिक पर आरोप लगाते कहा कि वे महज अपनी राजनीति चमकाने के लिए सब कर रहे हैं। वे अकेले ही मंत्रियों से मिलकर अपनी सांठगांठ बिठाते हैं। उन्होंने कभी भी संगठन के लोगों को मंत्रियों से मिलने का मौका नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यशपाल मलिक ने कहा था कि किसी भी राजनीतिक दल को आंदोलन में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि आज के समय में इनेलो के कई नेता धरने पर मंच को सांझा कर रहे हैं। उन्होंने मलिक पर संगठन के लोगों को आगे न आने देने का भी आरोप लगाया है। इस दौरान जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने सरकार के समक्ष सात मांगे रखी है। समैण ने आशंका जताई है कि इनमें से सरकार मांगे कुछ मान भी लेती है तो भी मलिक के कहने पर यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा क्योंकि यह राजनीतिक आंदोलन बन चुका है। मैंने आठ साल तक यशपाल मलिक के साथ काम किया है। मुझे उनकी कार्यशैली भलीभांति पता है।
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पत्रकारों से बातचीत में समैण ने यशपाल मलिक पर आरोप लगाते कहा कि वे महज अपनी राजनीति चमकाने के लिए सब कर रहे हैं। वे अकेले ही मंत्रियों से मिलकर अपनी सांठगांठ बिठाते हैं। उन्होंने कभी भी संगठन के लोगों को मंत्रियों से मिलने का मौका नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यशपाल मलिक ने कहा था कि किसी भी राजनीतिक दल को आंदोलन में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि आज के समय में इनेलो के कई नेता धरने पर मंच को सांझा कर रहे हैं। उन्होंने मलिक पर संगठन के लोगों को आगे न आने देने का भी आरोप लगाया है। इस दौरान जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने सरकार के समक्ष सात मांगे रखी है। समैण ने आशंका जताई है कि इनमें से सरकार मांगे कुछ मान भी लेती है तो भी मलिक के कहने पर यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा क्योंकि यह राजनीतिक आंदोलन बन चुका है। मैंने आठ साल तक यशपाल मलिक के साथ काम किया है। मुझे उनकी कार्यशैली भलीभांति पता है।
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