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लावारिस पशुओं का मसला पहुंचा हाईकोर्ट, डीसी और सभी स्थानीय निकाय के अधिकारियों से मांगा जवाब
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद
Updated Mon, 20 Feb 2017 11:41 PM IST
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फतेहाबाद शहर में लाल बत्ती चौक पर नेशनल हाइवे पर बीचोंबीच बैठे आवारा सांड । फाइल फोटो
- फोटो : bureau
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आवारा पशुओं के मामले में हरियाणा एवं पंजाब हाई कोर्ट ने जिला उपायुक्त, फतेहाबाद-टोहाना नगर परिषद एवं रतिया नगर पालिका के अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले में फतेहाबाद के अमित वढ़ेरा ने अधिवक्ता अमित चौधरी के माध्यम से एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में लगाई थी। इस मामले में अगली सुनवाई 22 मार्च को होगी।
हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में अमित वढ़ेरा ने आरोप लगाया था कि स्थानीय निकाय विभाग ने 23 मार्च 2016 को एक पॉलिसी बनाई थी, जिसके तहत सभी लावारिस पशुओं को रजिस्टर्ड किया जाएगा और सभी पशुओं को सड़क से हटाकर एक फिक्स जगह पर रखा जाएगा। वढ़ेरा का आरोप था कि इस मामले में जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारी विफल रहे हैं जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि फतेहाबाद जिला पिछले तीन साल से अधिक समय से आवारा पशुओं के आतंक से पीड़ित हैं। बीते तीन सालों में दर्जनों हादसे हो चुके हैं, जिसमें लगभग 70 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 2014 से 2016 तक 55 लोगों की मौत की बात तो खुद पुलिस एवं जिला प्रशासन ने एक आरटीआई के जवाब में भी मानी थी। इस दौरान लगभग 91 लोगों के घायल होने की बात भी आरटीआई के जवाब में कही गई थी। ऐसे में ये माना जा रहा है कि आवारा सांड़ों के हमले में लगभग 65 से 70 लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि पिछले दो माह से फतेहाबाद प्रशासन ने आवारा सांड़ों की समस्या पर काफी रोकथाम लगाई है। मताना गांव में नंदीशाला खुलने एवं अस्थाई नंदीशाला के साथ रहने से शहर की सड़कों से सांड़ हटाने का दावा नगर परिषद और जिला प्रशासन कर रहा है। इसके अलावा जिले की 285 पंचायतों में से 185 पंचायतों के स्ट्रे कैटल फ्री होने का दावा भी खुद एडीसी जेके अभीर कर चुके हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि 22 मार्च को प्रशासन हाईकोर्ट में क्या जवाब देता है और प्रशासन के जवाब पर हाईकोर्ट की अगली कार्यवाही क्या रहेगी।
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प्रशासन ने सड़कों पर से कुछ सांड़ हटाए हैं लेकिन शहर की कॉलोनियों के अंदर गलियों में अभी भी काफी सांड़ हैं। इतने लोगों की जान चली गई और अभी तक इस समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं हो सका है। इसलिए ही हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी जिस पर हाईकोर्ट ने प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
-अमित वढ़ेरा, याचिकाकर्ता ।
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हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में अमित वढ़ेरा ने आरोप लगाया था कि स्थानीय निकाय विभाग ने 23 मार्च 2016 को एक पॉलिसी बनाई थी, जिसके तहत सभी लावारिस पशुओं को रजिस्टर्ड किया जाएगा और सभी पशुओं को सड़क से हटाकर एक फिक्स जगह पर रखा जाएगा। वढ़ेरा का आरोप था कि इस मामले में जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारी विफल रहे हैं जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
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गौरतलब है कि फतेहाबाद जिला पिछले तीन साल से अधिक समय से आवारा पशुओं के आतंक से पीड़ित हैं। बीते तीन सालों में दर्जनों हादसे हो चुके हैं, जिसमें लगभग 70 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 2014 से 2016 तक 55 लोगों की मौत की बात तो खुद पुलिस एवं जिला प्रशासन ने एक आरटीआई के जवाब में भी मानी थी। इस दौरान लगभग 91 लोगों के घायल होने की बात भी आरटीआई के जवाब में कही गई थी। ऐसे में ये माना जा रहा है कि आवारा सांड़ों के हमले में लगभग 65 से 70 लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि पिछले दो माह से फतेहाबाद प्रशासन ने आवारा सांड़ों की समस्या पर काफी रोकथाम लगाई है। मताना गांव में नंदीशाला खुलने एवं अस्थाई नंदीशाला के साथ रहने से शहर की सड़कों से सांड़ हटाने का दावा नगर परिषद और जिला प्रशासन कर रहा है। इसके अलावा जिले की 285 पंचायतों में से 185 पंचायतों के स्ट्रे कैटल फ्री होने का दावा भी खुद एडीसी जेके अभीर कर चुके हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि 22 मार्च को प्रशासन हाईकोर्ट में क्या जवाब देता है और प्रशासन के जवाब पर हाईकोर्ट की अगली कार्यवाही क्या रहेगी।
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प्रशासन ने सड़कों पर से कुछ सांड़ हटाए हैं लेकिन शहर की कॉलोनियों के अंदर गलियों में अभी भी काफी सांड़ हैं। इतने लोगों की जान चली गई और अभी तक इस समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं हो सका है। इसलिए ही हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी जिस पर हाईकोर्ट ने प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
-अमित वढ़ेरा, याचिकाकर्ता ।