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दवाइयों का नहीं दिया बिल तो मेडिकल स्टोर का लाइसेंस होगा रद्द
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Sun, 12 Feb 2017 11:13 PM IST
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स्वास्थ्य विभाग का ताजा फरमान जिले के मेडिकल स्टोर संचालकों के होश फाख्ता करने वाला है। विभाग ने उन मेडिकल स्टोर संचालकों पर सख्त कार्यवाही करने का मन बनाया है जो दवा बेचते समय ग्राहक को उसका बिल नहीं देते। ऐसे मेडिकल स्टोर संचालकों के लाइसेंस रद्द तक करने के बारे में स्वास्थ्य विभाग गंभीरता से विचार कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर जिले के अधिकतर मेडिकल स्टोर संचालक मुश्किल में आ जाएंगे क्योंकि जिले के हजारों मेडिकल संचालकों में से अधिकतर ग्राहकों को दवा के साथ उसका बिल नहीं देते। जिला ड्रग इंस्पेक्टर विजया राजे ने इसकी पुष्टि की है।
नशीली दवाइयों की बिक्री पर लगाम कसना है लक्ष्य
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीते कुछ सालों में मेडिकल स्टोरों पर नशीली दवाइयों की बिक्री में काफी इजाफा हुआ है। अनेकों मेडिकल संचालक नशीली दवाइयां बेचते रंगे हाथों पकड़े गए हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग के साथ साथ मेडिकल पेशे की भी बदनामी हो रही है। इसी के चलते स्वास्थ्य विभाग ने तेवर कड़े करने का निर्णय लिया है। पक्का बिल देने की सूरत में मेडिकल संचालक ये बात नहीं कह सकेंगे कि उन्होंने नशीली दवा बेची है। बिल होने की सूरत में उनकी जिम्मेदारी तय हो जाएगी।
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फतेहाबाद जिले में सात सौ से अधिक हैं मेडिकल संचालक
जिला औषधि नियंत्रक विभाग के आंकड़ों के अनुसार फतेहाबाद जिले में मेडिकल स्टोर की संख्या तकरीबन सात सौ के करीब हैं जबकि फतेहाबाद शहर में ये संख्या लगभग डेढ़ सौ के करीब हैं। इनमें अधिकतर दुकानदार ग्राहक को दवा देते समय बिल उपलब्ध नहीं करवाते। दुकानदारों का ये अक्सर तर्क रहता है कि ग्राहक ने बिल की डिमांड नहीं रखी, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता। स्वास्थ्य विभाग के नियमानुसार ग्राहक बिल मांगे या ना मांगें, मेडिकल संचालक को उसे पक्का बिल देना होगा। इससे दोनों पक्षों की जवाबदेही तय होती है।
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जल्द शुरू होंगे औचक निरीक्षण, खामियां मिली तो रद्द होगा मेडिकल स्टोर का लाइसेंस
जिला औषधि नियंत्रक कार्यालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पहले फतेहाबाद में स्थायी ड्रग इंस्पेक्टर की नियुक्ति नहीं होने से मेडिकल स्टोरों की नियमित चेकिंग नहीं होती थी। अब जिले में स्थायी ड्रग इंस्पेक्टर की नियुक्ति हो चुकी है और जल्द ही जिले भर के मेडिकल स्टोर का औचक निरीक्षण शुरू किया जाएगा। ऐसे में स्टोर की चेकिंग के दौरान अगर बिल और बाकी औपचारिकताएं पूरी नहीं मिलती हैं तो तुरंत प्रभाव से मेडिकल स्टोर का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया जाएगा। अगर मेडिकल हाल संचालक तय समय के अंदर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया तो आगे की कार्यवाही के तहत उसका लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है।
प्रत्येक मेडिकल स्टोर संचालक का अपने ग्राहकों को दवा के साथ पक्का बिल देना अनिवार्य है। अगर कोई मेडिकल संचालक ऐसा नहीं करेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी, इसमें लाइसेंस सस्पेंड करने से लेकर रद्द करना भी शामिल है। ग्राहक के कहे बिना ही उसे दवाई का पक्का बिल देना होगा।
-विजया राजे, जिला ड्रग इंस्पेक्टर, फतेहाबाद।