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कैश की समस्या बरकरार, बैंकों में नहीं कम हो रही कतार
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Fri, 09 Dec 2016 12:12 AM IST
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जाखल के पीएनबी बैंक के बाहर कतारों में लगी महिलांए
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नोटबंदी के 30 दिन बाद भी पैसों की कमी के कारण बैंकों से भीड़ कम नहीं हुई है। बैंकों व चालू एटीएम मशीनों पर दिनभर कैश के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है। किसी को घंटों इंतजार के बाद कुछ पैसे मिल जाते है। तो किसी को कैश की कमी के कारण खाली हाथ घर लौटना पड़ता है। नोटबंदी के करीब 29 दिन बीत जाने के बाद भी बैंकों से कतार कम नहीं हो रही है। कस्बे के अधिकतर एटीएम खाली रहे। वहीं जिन एटीएम मशीनों में कैश था।
वो भी कुछ ही समय में भीड़ होने के कारण कैशलेस हो गई।
पीएनबी बैंक में कैश के लिए सुबह 6 बजे ही ग्राहक पहुंचना शुरू हो गए। बैंक खुलने से पहले ही ग्राहकों की भीड़ होने के कारण व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस तैनात रही। लाइनों में खड़े लोगों का कहना है कि सरकार को बैंकों में पर्याप्त कैश भेजना चाहिए था।
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500 रुपये के नए नोट पहले ही बैंकों में भेजे जाते तो लोगों को कैश की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से नहीं जूझना पड़ता। पूरा दिन लाइन में लगकर इंतजार के बाद भी लोगों को कैश नहीं मिल पाता। लोग बैंक कर्मियों के व्यवहार से भी खफा हैं। आए दिन लोग बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों पर लापरवाही बरतने व अपने चहेतों को ही रुपये देने के आरोप लगा रहे हैं।
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मंडी वासी एक व्यक्ति ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के चंडीगढ़ कार्यालय में फोन पर शिकायत की है कि बैंक अधिकारी कैशलेस प्रक्रिया के बारे में ठीक तरह से न बताकर उन्हें भ्रमित कर रहे हैं यही नहीं बैंक अधिकारी दस के सिक्कों को भी लेने से मना कर रहे हैं।
लोगों ने कहा कि जिस दिन से नोटबंदी के आदेश आएं हैं वह उसी दिन से अपने बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। बैंक कर्मचारी अपने जानकारों को रुपये जमा कराने के बहाने अंदर बुलाते हैं व अंदर ही अपने चहेतों को ही कैश बांटते है। खासकर किसानों ने कहा कि गेहूं की फसल के लिए उन्हें खाद और दवा के लिए पैसों की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन से कानूनी कार्रवाई करने व बैंक से पैसे दिलवाने की मांग की है।