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Fatehabad News: भारत-अमेरिका में कृषि समझौते के विरोध में किसानों ने किया प्रदर्शन
Tue, 17 Feb 2026 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 17 Feb 2026 11:13 PM IST
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फतेहाबाद। लघु सचिवालय के बाहर मोदी-ट्रंप का पुतला फूंकते किसान। स्त्रोत संगठन
फतेहाबाद। भारत-अमेरिका प्रस्तावित कृषि समझौते के विरोध में मंगलवार को पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति ने प्रदर्शन किया। किसानों ने लघु सचिवालय के समक्ष एकत्र होकर केंद्र सरकार और अमेरिका की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। आक्रोशित किसानों ने केंद्र और अमेरिका सरकार का पुतला फूंककर विरोध जताया।
समिति के प्रदेशाध्यक्ष मनदीप नथवान ने कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिकी दबाव में बाजार विदेशी उत्पादों के लिए खोल रही है।
यदि अमेरिकी डेयरी उत्पाद और अनाज कम कीमत पर भारत में आए, तो स्थानीय किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उनका कहना था कि खेती केवल व्यापार नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है।
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किसान नेताओं ने आशंका जताई कि इस समझौते से न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था और देश की आत्मनिर्भरता प्रभावित हो सकती है। प्रदर्शनकारियों ने लघु सचिवालय के द्वार पर धरना देते हुए चेतावनी दी कि किसान विरोधी नीतियां वापस नहीं ली गईं तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक फैलाया जाएगा।
किसानों ने सरकार से मांग की कि विदेशी हितों के बजाय देश के अन्नदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि यहां असमानता न हो। इस अवसर पर मलकीप उप्पल, सुरजीत उप्पल, भूपेन्द्र रंधावा, रविन्द्र हिजरावां, सुक्खा पंडाल, गुरलाल सहित काफी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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समिति के प्रदेशाध्यक्ष मनदीप नथवान ने कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिकी दबाव में बाजार विदेशी उत्पादों के लिए खोल रही है।
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यदि अमेरिकी डेयरी उत्पाद और अनाज कम कीमत पर भारत में आए, तो स्थानीय किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उनका कहना था कि खेती केवल व्यापार नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है।
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किसान नेताओं ने आशंका जताई कि इस समझौते से न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था और देश की आत्मनिर्भरता प्रभावित हो सकती है। प्रदर्शनकारियों ने लघु सचिवालय के द्वार पर धरना देते हुए चेतावनी दी कि किसान विरोधी नीतियां वापस नहीं ली गईं तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक फैलाया जाएगा।
किसानों ने सरकार से मांग की कि विदेशी हितों के बजाय देश के अन्नदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि यहां असमानता न हो। इस अवसर पर मलकीप उप्पल, सुरजीत उप्पल, भूपेन्द्र रंधावा, रविन्द्र हिजरावां, सुक्खा पंडाल, गुरलाल सहित काफी संख्या में किसान मौजूद रहे।