{"_id":"60fda3408ebc3e58464e4a1f","slug":"farmers-left-for-tikri-border-with-water-and-soil-in-kanwar-fatehabad-news-hsr6070882143","type":"story","status":"publish","title_hn":"कांवड़ में जल और मिट्टी लेकर टीकरी बॉर्डर रवाना हुए किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कांवड़ में जल और मिट्टी लेकर टीकरी बॉर्डर रवाना हुए किसान
विज्ञापन
कांवड़ के साथ रवाना होते किसान।
- फोटो : Fatehabad
हर साल शिव भक्त सावन महीने में गंगाजल के साथ कांवड़ लेकर आते हैं। इस बार कोरोना महामारी के कारण कांवड़ यात्रा रद्द कर दी गई है। हालांकि किसान आंदोलन चल के मद्देनजर युवाओं ने किसान आंदोलन में जल व मिट्टी लेकर कांवड़ ले जाने का फैसला लिया है। इसी क्रम में गांव जांडली कलां से किसान प्रदीप रोहिल्ला की अध्यक्षता में टीकरी बॉर्डर दिल्ली के लिए कृषि कानून का विरोध जताते हुए यह कांवड़ यात्रा शनिवार शाम को रवाना हुई और रविवार दोपहर आंदोलन के गीत बजाते हुए टीकरी बॉर्डर धरने पर पहुंच गए।
किसान आंदोलन में धरना स्थल पर स्टेज बनाने के लिए जांडली कलां गांव से मिट्टी व पानी लेकर डाक कांवड़ के रूप में पिकअप गाड़ी गई है। इस गाड़ी में करीब बीस किसान शामिल होकर टीकरी बॉर्डर दिल्ली के लिए गए हैं। बकायदा पिकअप पर डीजे लगाया गया है, जैसे आमतौर पर कांवड़ लाने वाले शिव भक्त लगाते हैं।
माना जा रहा है कि गांव जांडली कलां के युवा किसानों ने आंदोलनरत किसानों में जोश भरने के लिए यह अनोखी शुरुआत की है। किसान यह कांवड़ लेकर टीकरी बॉर्डर पर धरने के लिए रवाना हुए हैं। यहां से दिल्ली तक करीब 180 किलोमीटर का पैदल सफर तय करके टिकरी बॉर्डर पहुंचेंगे। इसके बाद कांवड़ को टिकरी बॉर्डर पर किसान धरने के स्टेज पर अर्पित किया जाएगा।
विज्ञापन
किसान प्रदीप ने बताया कि युवाओं को खेती व आंदोलन से जोड़ने के लिए यह सब कर रहे हैं। रवानगी से पहले गांव के बुजुर्गों की मीटिंग हुई थी, जिसमें इस किसान कांवड़ यात्रा के बारे में सहमति बनी थी। गांव के ही 21 युवाओं की ड्यूटी लगाई गई थी। कांवड़ यात्रा में जहां भगवान शंकर का गुणगान किया जाता है। वहीं इस यात्रा में किसान आंदोलन से जुड़े गीत बजाए जा रहे हैं। उनकी यात्रा जिस भी गांव से निकल रही है, वहां के लोग भी उनको समर्थन दे रहे हैं। प्रदीप ने कहा है कि इस आंदोलन ने किसानों को एकजुट किया है। यह आंदोलन आने वाली सरकार के लिए भी चेतावनी है कि किसान अपने ऊपर होने वाले अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
विज्ञापन
किसान आंदोलन में धरना स्थल पर स्टेज बनाने के लिए जांडली कलां गांव से मिट्टी व पानी लेकर डाक कांवड़ के रूप में पिकअप गाड़ी गई है। इस गाड़ी में करीब बीस किसान शामिल होकर टीकरी बॉर्डर दिल्ली के लिए गए हैं। बकायदा पिकअप पर डीजे लगाया गया है, जैसे आमतौर पर कांवड़ लाने वाले शिव भक्त लगाते हैं।
विज्ञापन
माना जा रहा है कि गांव जांडली कलां के युवा किसानों ने आंदोलनरत किसानों में जोश भरने के लिए यह अनोखी शुरुआत की है। किसान यह कांवड़ लेकर टीकरी बॉर्डर पर धरने के लिए रवाना हुए हैं। यहां से दिल्ली तक करीब 180 किलोमीटर का पैदल सफर तय करके टिकरी बॉर्डर पहुंचेंगे। इसके बाद कांवड़ को टिकरी बॉर्डर पर किसान धरने के स्टेज पर अर्पित किया जाएगा।
विज्ञापन
किसान प्रदीप ने बताया कि युवाओं को खेती व आंदोलन से जोड़ने के लिए यह सब कर रहे हैं। रवानगी से पहले गांव के बुजुर्गों की मीटिंग हुई थी, जिसमें इस किसान कांवड़ यात्रा के बारे में सहमति बनी थी। गांव के ही 21 युवाओं की ड्यूटी लगाई गई थी। कांवड़ यात्रा में जहां भगवान शंकर का गुणगान किया जाता है। वहीं इस यात्रा में किसान आंदोलन से जुड़े गीत बजाए जा रहे हैं। उनकी यात्रा जिस भी गांव से निकल रही है, वहां के लोग भी उनको समर्थन दे रहे हैं। प्रदीप ने कहा है कि इस आंदोलन ने किसानों को एकजुट किया है। यह आंदोलन आने वाली सरकार के लिए भी चेतावनी है कि किसान अपने ऊपर होने वाले अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे।