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Fatehabad News: ई-क्षति पूर्ति पोर्टल पर खामियों के कारण ट्यूबवेलों की जानकारी नहीं दे पाए किसान
Sun, 03 Sep 2023 11:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 03 Sep 2023 11:09 PM IST
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गांव बरसीन में बाढ़ का पानी बोर में जानें से खराब हुआ ट्यूबवेल।
फतेहाबाद। ई-क्षति पूर्ति पोर्टल पर सरकार ने 31 अगस्त तक बाढ़ व बारिश के कारण फसलाें, मकानों व पशुओं को हुआ नुकसान के अलावा ट्यूबवेलों व घरेलू सामान को हुए नुकसान को भरने का विकल्प दिया था। इसकी मियाद पूरी हो गई और अब तक मात्र 10 लोग ही इस पोर्टल पर आवेदन कर पाए हैं, लेकिन ट्यूबवेलों का एक भी डाटा किसान इस पोर्टल पर अपलोड नहीं कर पाए हैं।
ज्ञात रहे कि ई-क्षति पूर्ति पोर्टल पहले 25 अगस्त तक ही खुला था, लेकिन इसमें पहले केवल फसल खराबे, मकानों व पशुओं को हुए नुकसान का विकल्प था। सरकार ने इसके बाद 26 अगस्त से दोबारा पोर्टल को खोल दिया और इसमें ट्यूबवेल व घरेलू सामान को हुए नुकसान का भी ब्योरा देने के लिए विकल्प दिया गया। इस दौरान बाढ़ प्रभावित लोग केवल अपने घरों में हुए कपड़ों के नुकसान को लेकर ही अपना ब्योरा दे पाए हैं।
पोर्टल में तकनीकी खामियों के चलते आई परेशानी
गांव धिड़ के किसान रामसिंह, खान मोहम्मद के शिवकुमार, ढाणी बीकानेरी के ज्ञान सिंह ने बताया कि बाढ़ के कारण उनके ट्यूबवेल पूरी तरह से खराब हो गए हैं। हालात यह है कि अब वह नया ट्यूबवेल नहीं लगवा सकते। पोर्टल कुछ दिन ही खुला, लेकिन उसमें तकनीकी खामियों के कारण वह अपने ट्यूबवेलों की जानकारी नहीं दे पाए।
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अब तक 10030 किसानों ने डाला है फसल खराबे का ब्योरा
ई-क्षति पूर्ति पोर्टल पर अब तक जिले के 189 गांवों के 10030 किसानों ने अपनी 76196 एकड़ जमीन पर फसल खराबे का ब्योरा डाला है। इनमें से 118 गांवों के किसानों ने बाढ़ के कारण व अन्य किसानों ने बारिश के कारण फसल खराब होने की जानकारी दी है। इसके अलावा बाढ़ के कारण 41 पशुओं की मौत होने व 1378 मकानों को नुकसान होने की जानकारी दी गई है।
-- -- बाढ़ से हुए नुकसान को लेकर सरकार ने पहले 31 जुलाई, फिर 10 अगस्त, इसके बाद 25 अगस्त और बाद में 31 अगस्त तक पोर्टल खोला था। जिन लोगों ने अब तक बाढ़ या बारिश के कारण हुए नुकसान की रिपोर्ट दी है, उसे जल्द ही सरकार को भेजा जाएगा।
सुरेश कुमार, डीआरओ, फतेहाबाद।
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ज्ञात रहे कि ई-क्षति पूर्ति पोर्टल पहले 25 अगस्त तक ही खुला था, लेकिन इसमें पहले केवल फसल खराबे, मकानों व पशुओं को हुए नुकसान का विकल्प था। सरकार ने इसके बाद 26 अगस्त से दोबारा पोर्टल को खोल दिया और इसमें ट्यूबवेल व घरेलू सामान को हुए नुकसान का भी ब्योरा देने के लिए विकल्प दिया गया। इस दौरान बाढ़ प्रभावित लोग केवल अपने घरों में हुए कपड़ों के नुकसान को लेकर ही अपना ब्योरा दे पाए हैं।
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पोर्टल में तकनीकी खामियों के चलते आई परेशानी
गांव धिड़ के किसान रामसिंह, खान मोहम्मद के शिवकुमार, ढाणी बीकानेरी के ज्ञान सिंह ने बताया कि बाढ़ के कारण उनके ट्यूबवेल पूरी तरह से खराब हो गए हैं। हालात यह है कि अब वह नया ट्यूबवेल नहीं लगवा सकते। पोर्टल कुछ दिन ही खुला, लेकिन उसमें तकनीकी खामियों के कारण वह अपने ट्यूबवेलों की जानकारी नहीं दे पाए।
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अब तक 10030 किसानों ने डाला है फसल खराबे का ब्योरा
ई-क्षति पूर्ति पोर्टल पर अब तक जिले के 189 गांवों के 10030 किसानों ने अपनी 76196 एकड़ जमीन पर फसल खराबे का ब्योरा डाला है। इनमें से 118 गांवों के किसानों ने बाढ़ के कारण व अन्य किसानों ने बारिश के कारण फसल खराब होने की जानकारी दी है। इसके अलावा बाढ़ के कारण 41 पशुओं की मौत होने व 1378 मकानों को नुकसान होने की जानकारी दी गई है।
सुरेश कुमार, डीआरओ, फतेहाबाद।