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Fatehabad News: किसानों को नहीं मिल रहा हरा चारा, सूखी तूड़ी का ले रहे सहारा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Aug 2023 11:50 PM IST
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Farmers are not getting green fodder, they are resorting to dry straw
फतेहाबाद की ढ़ाणी में बाढ़ ग्रस्त पशु।
फतेहाबाद। बाढ़ के बाद अब पशुओं के लिए हरे चारे की समस्या सामने आ गई है। फतेहाबाद में 12 जुलाई से बाढ़ का प्रकोप आरंभ हो गया था। जिसके बाद फतेहाबाद जिले के 118 गांव व 2374 ढाणियां प्रभावित हुई हैं। सबसे अधिक नुकसान, जाखल, रतिया व फतेहाबाद में हुआ है। बाढ़ के कारण सबसे बड़ी समस्या मवेशियों के लिए हरे चारे की बनी हुई है, क्योंकि बाढ़ प्रभावित इलाकों में बीजा गया हरा चारा पूरी तरह से खराब हो गया है।
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घग्गर काजल स्तर कम होने के बाद भी ग्रामीणों की परेशानियां अभी भी बरकरार हैं। बाढ़ में बहकर आई गंदगी गांवों के खेतों व ढाणियों में जगह-जगह जमी हुई है। सबसे बड़ा संकट मवेशियों के लिए हरे चारे का है। जिन ढाणियों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया था, वहां पर लोगों ने अपने मवेशियों को तो निकाल लिया और अपने रिश्तेदारों अथवा शहर में खाली प्लाट किराए पर लेकर बांध रखा है, लेकिन हरे चारे की समस्या आज भी उनके सामने मुंह बाए खड़ी है। जितना हरा चारा उनको पहले मिल चुका था, वह मिल चुका है, लेकिन हरा चारा लगभग समाप्त हो चुका है। किसानों को अब पशुओं के मक्की का चारा लेना पड़ रहा है और वह भी 200 रुपये क्विंटल की बजाए 400 रुपये क्विंटल मिल रहा है। इसी के साथ तूड़ी के दामाें में भी बढ़ोतरी हो गई है।
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सामाजिक संस्थाओं ने शुरूआती तौर पर उपलब्ध करवाया हरा चारा
बाढ़ ग्रस्त इलाकों में पशुपालक अपने मवेशियों को साथ लेकर राहत शिविरों में पहुंच गए थे। कई लोगों ने अपनी भैंसों, गायों व बकरियों को अपने रिश्तेदारों के घर भेजा तो कई पशुपालकों ने शहर की भाटिया कॉलोनी व अन्य स्थानों पर खाली प्लाॅटाें को किराए पर लेकर अपने पशुओं को रखा हुआ है। यहां तक की राहत शिविरों में भी उन्होंने अपने पशु बांधे हुए हैं। पहले सामाजिक संस्थाओं ने हरे चारे का प्रबंध इन पशुओं के लिए किया था, लेकिन अब लगातार हरे चारे की कमी हो रही है। गांव मानावाली, श्री श्याम गोभक्त सेवा समिति, पशुपालन विभाग की ओर से उनको चारा तो उपलब्ध करवाया गया, लेकिन अब इसकी कमी होती जा रही है।
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कोट

हमारे खेताें में पशुओं के लिए हो हरा चारा था, वह बाढ़ के कारण पूरी तरह से नष्ट हो गया है। मैंने अपने रिश्तेदार के घर अपने चार-पांच पशु भेजे हुए हैं। वहीं भाटिया कॉलोनी व अन्य स्थानों पर भी लोगों ने पशुओं को रखा हुआ है। हरे चारे की भयंकर कमी है और पहले जो हरा चारा 200 रुपये प्रति क्विंटल मिलता था, वह अब 400 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। इसके अलावा सूखी तूड़ी भी 800 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मिल रही है।


-सुरेंद्र सैनी, पशुपालक, ढाणी टाहलीवाली
कोट

बाढ़ आपदा के बीच पशुपालकों को हरे चारे व तूड़ी के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। पशुओं को हरे चारे की व्यवस्था के लिए सामाजिक संस्थाओं की मदद भी ली जा रही है। साथ लगते जिलों से भी हरा चारा आ रहा है।
डॉ. सुखविंद्र, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग, फतेहाबाद।
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