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टाइम लग्या सी पर अस्सी दिल्ली फतेह कर दीती
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फतेहाबाद। केंद्र सरकार की ओर से तीनों कृषि कानून वापस लेने पर आखिरकार 380 दिनों बाद जिले के किसान अपने घरों को लौट आए हैं। किसान जत्थे के रूप में शनिवार अलसुबह टीकरी बॉर्डर से रवाना हुए। इन जत्थे में शामिल किसानों का गांव धांगड़ से स्वागत शुरू हुआ, जो रतिया व टोहाना तक जारी रहा। जगह-जगह किसानी जत्थों पर पुष्प वर्षा की गई और जलेबियां व लड्डू वितरित करके जश्न मनाया गया। ढोल-नगाड़ों व डीजे की गूंज के बीच किसानी जत्थे लालबत्ती चौक तक पहुंचे। हालांकि, अभी भी जिले में दर्ज 11 एफआईआर के वापस होने का किसानों को इंतजार है। इन 11 एफआईआर में 70 किसानों को नामजद किया हुआ है जबकि सैकड़ों की संख्या में अन्य किसान शामिल बताए हुए हैं। इन 11 में से आठ एफआईआर रेलवे प्रशासन द्वारा दर्ज करवाई हुई हैं।
अस्सी दिल्ली फतेह कर दीती...
किसानी जत्थे में शामिल रतिया क्षेत्र के किसानों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अस्सी दिल्ली फतेह कर दीती। टाइम लग्या सी, पर केंद्र सरकार दे घुटने टिका दीते। हालै खुशी है कि किसानी नूं बचाण वास्ते अस्सी भी संघर्ष कीता। किसानी साडी मां है। मां दे वास्ते किती गई जंग नूं जीत कै ही मानै हां।
अब परिवार भी संभालेंगे और खेत भी
फतेहाबाद के आसपास के गांवों से टीकरी बॉर्डर पर गए किसान भी वापस आ गए हैं। जत्थे में शामिल इन किसानों ने कहा कि एक साल से परिवार व खेत की चिंता छोड़कर आंदोलन में डटे हुए थे। अब कानून वापस हो गए हैं, इसलिए फुरसत से परिवार और खेत दोनों ही संभालेंगे। अब खेती छीनने का कोई डर नहीं है।
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सर्व कर्मचारी संघ ने किसानों के स्वागत में किया जलपान का प्रबंध
सर्व कर्मचारी संघ की टीम द्वारा दिल्ली से लौट रहे किसानों का पुष्प बरसाकर स्वागत किया गया। वहीं, किसानों के लिए मिठाई व जलपान की व्यवस्था की गई। जिला प्रधान भूपसिंह भड़ोलावाली, सचिव सुरजीत दुसाद, ब्लॉक प्रधान राजपाल मिताथल, सचिव इंद्र घासी, बिजली कर्मचारी नेता रामनिवास शर्मा, बेगराज, रघुनाथ महत्ता, हरिकिशन कम्बोज, रामनिवास वर्मा, डॉ. पृथ्वी सिंह बाना, अमित शर्मा, सतीश जिलेदार आदि ने किसानों का अभिनंदन किया।
शहर फतेहाबाद थाना में दर्ज एफआईआर 2
सदर फतेहाबाद थाना में दर्ज 2
सिटी टोहाना थाना में दज 3
रतिया सदर थाना में दर्ज 1
रेलवे द्वारा दर्ज 3
किसान के संघर्ष की हुई जीत
:: केंद्र सरकार के तानाशाही रवैये के खिलाफ किसानों ने एक साल से भी ज्यादा समय तक संघर्ष किया। यह किसानों के संघर्ष की बड़ी जीत है। पंजाब-हरियाणा, यूपी से लेकर पूरे देश के किसानों को इस आंदोलन ने एकजुट करने का काम किया। लंबे समय तक इस आंदोलन की यादें रहेंगी।
मनदीप नथवान, प्रदेशाध्यक्ष, पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति
केंद्र सरकार का अहंकार तोड़ा
किसानों ने केंद्र सरकार का अहंकार तोड़ दिया है। यह आंदोलन लंबे समय तक याद रखा जाएगा। युवा पीढ़ी को भी इस आंदोलन ने प्रेरणा दी है। कृषि कानूनों की वापसी के साथ ही इस आंदोलन के समाप्त होने पर हर किसान खुश है। जगह-जगह जत्थों का स्वागत हुआ है।
रणजीत सिंह ढिल्लो, प्रमुख नेता, टोहाना पक्का मोर्चा
युवा पीढ़ी को सबसे ज्यादा याद रहेगा आंदोलन
आंदोलन की समाप्ति की घोषणा से हम काफी खुश हैं। संयुक्त किसान मोर्चा की सभी मांगें सरकार ने मान ली है। एमएसपी पर भी कमेटी का गठन होगा। इससे आने वाले दिनों में किसान ज्यादा समृद्ध होगा। यह आंदोलन युवा पीढ़ी को सबसे ज्यादा याद रहेगा।
मनजिंदर सिंह, किसान, गांव नांगला
आंदोलन ने बहुत कुछ सिखाया
हम संयुक्त किसान मोर्चे के फैसले का स्वागत करते हैं। सरकार द्वारा किसानों की सभी मांगें माने जाने पर चारों तरफ खुशी है। हालांकि, सरकार ने इसके लिए समय तो बहुत लगाया। इस आंदोलन में बहुत कुछ सीखने को मिला है। इसे अगली कई पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा।
दर्शन सिंह, किसान नेता, गांव गाजूवाला
छतीस बिरादरी ने आंदोलन में हिस्सा लिया
इस आंदोलन ने किसानों को बहुत सीख दी है। उन्होंने इससे पहले कभी भी इतना लंबा आंदोलन न सुना व न देखा है। किसानों के युवा बेटों ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर सहयोग किया है। इस आंदोलन में समाज के छतीस बिरादरी के लोगों ने हिस्सा लिया।
प्रदीप कुमार, प्रगतिशील किसान, गांव गाजूवाला
किसानों ने कड़कड़ाती ठंड और चिलचिलाती धूप में भी अपना संघर्ष जारी रखा था। यह ऐतिहासिक आंदोलन और बड़ी जीत है। आंदोलन में किसानों से लेकर मजदूर, व्यापारी, दुकानदार, कर्मचारी सहित सभी वर्गों ने अपना योगदान दिया।
हरपाल सिंह, किसान, गांव नांगली
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अस्सी दिल्ली फतेह कर दीती...
किसानी जत्थे में शामिल रतिया क्षेत्र के किसानों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अस्सी दिल्ली फतेह कर दीती। टाइम लग्या सी, पर केंद्र सरकार दे घुटने टिका दीते। हालै खुशी है कि किसानी नूं बचाण वास्ते अस्सी भी संघर्ष कीता। किसानी साडी मां है। मां दे वास्ते किती गई जंग नूं जीत कै ही मानै हां।
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अब परिवार भी संभालेंगे और खेत भी
फतेहाबाद के आसपास के गांवों से टीकरी बॉर्डर पर गए किसान भी वापस आ गए हैं। जत्थे में शामिल इन किसानों ने कहा कि एक साल से परिवार व खेत की चिंता छोड़कर आंदोलन में डटे हुए थे। अब कानून वापस हो गए हैं, इसलिए फुरसत से परिवार और खेत दोनों ही संभालेंगे। अब खेती छीनने का कोई डर नहीं है।
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सर्व कर्मचारी संघ ने किसानों के स्वागत में किया जलपान का प्रबंध
सर्व कर्मचारी संघ की टीम द्वारा दिल्ली से लौट रहे किसानों का पुष्प बरसाकर स्वागत किया गया। वहीं, किसानों के लिए मिठाई व जलपान की व्यवस्था की गई। जिला प्रधान भूपसिंह भड़ोलावाली, सचिव सुरजीत दुसाद, ब्लॉक प्रधान राजपाल मिताथल, सचिव इंद्र घासी, बिजली कर्मचारी नेता रामनिवास शर्मा, बेगराज, रघुनाथ महत्ता, हरिकिशन कम्बोज, रामनिवास वर्मा, डॉ. पृथ्वी सिंह बाना, अमित शर्मा, सतीश जिलेदार आदि ने किसानों का अभिनंदन किया।
शहर फतेहाबाद थाना में दर्ज एफआईआर 2
सदर फतेहाबाद थाना में दर्ज 2
सिटी टोहाना थाना में दज 3
रतिया सदर थाना में दर्ज 1
रेलवे द्वारा दर्ज 3
किसान के संघर्ष की हुई जीत
:: केंद्र सरकार के तानाशाही रवैये के खिलाफ किसानों ने एक साल से भी ज्यादा समय तक संघर्ष किया। यह किसानों के संघर्ष की बड़ी जीत है। पंजाब-हरियाणा, यूपी से लेकर पूरे देश के किसानों को इस आंदोलन ने एकजुट करने का काम किया। लंबे समय तक इस आंदोलन की यादें रहेंगी।
मनदीप नथवान, प्रदेशाध्यक्ष, पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति
केंद्र सरकार का अहंकार तोड़ा
किसानों ने केंद्र सरकार का अहंकार तोड़ दिया है। यह आंदोलन लंबे समय तक याद रखा जाएगा। युवा पीढ़ी को भी इस आंदोलन ने प्रेरणा दी है। कृषि कानूनों की वापसी के साथ ही इस आंदोलन के समाप्त होने पर हर किसान खुश है। जगह-जगह जत्थों का स्वागत हुआ है।
रणजीत सिंह ढिल्लो, प्रमुख नेता, टोहाना पक्का मोर्चा
युवा पीढ़ी को सबसे ज्यादा याद रहेगा आंदोलन
आंदोलन की समाप्ति की घोषणा से हम काफी खुश हैं। संयुक्त किसान मोर्चा की सभी मांगें सरकार ने मान ली है। एमएसपी पर भी कमेटी का गठन होगा। इससे आने वाले दिनों में किसान ज्यादा समृद्ध होगा। यह आंदोलन युवा पीढ़ी को सबसे ज्यादा याद रहेगा।
मनजिंदर सिंह, किसान, गांव नांगला
आंदोलन ने बहुत कुछ सिखाया
हम संयुक्त किसान मोर्चे के फैसले का स्वागत करते हैं। सरकार द्वारा किसानों की सभी मांगें माने जाने पर चारों तरफ खुशी है। हालांकि, सरकार ने इसके लिए समय तो बहुत लगाया। इस आंदोलन में बहुत कुछ सीखने को मिला है। इसे अगली कई पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा।
दर्शन सिंह, किसान नेता, गांव गाजूवाला
छतीस बिरादरी ने आंदोलन में हिस्सा लिया
इस आंदोलन ने किसानों को बहुत सीख दी है। उन्होंने इससे पहले कभी भी इतना लंबा आंदोलन न सुना व न देखा है। किसानों के युवा बेटों ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर सहयोग किया है। इस आंदोलन में समाज के छतीस बिरादरी के लोगों ने हिस्सा लिया।
प्रदीप कुमार, प्रगतिशील किसान, गांव गाजूवाला
किसानों ने कड़कड़ाती ठंड और चिलचिलाती धूप में भी अपना संघर्ष जारी रखा था। यह ऐतिहासिक आंदोलन और बड़ी जीत है। आंदोलन में किसानों से लेकर मजदूर, व्यापारी, दुकानदार, कर्मचारी सहित सभी वर्गों ने अपना योगदान दिया।
हरपाल सिंह, किसान, गांव नांगली