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किसान फसली अवशेष जलाए तो एफआईआर, अफसरों के इशारे पर रोजाना जल रहा पचास टन कचरा
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Sun, 16 Apr 2017 12:13 AM IST
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कुडे का डेर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
गेहूं का सीजन शुरू होते ही खेतों में किसानों को फसली अवशेष जलाने से रोकने के लिए सरकारी आदेश जारी हो चुके हैं। हवाला दिया जा रहा है पर्यावरण प्रदूषण रोकने का। किसानों पर एफआईआर तक की चेतावनी दी चुकी है।
लेकिन दूसरी ओर खुद जिला प्रशासन के अधिकारियों के इशारे पर रोजाना पचास टन से अधिक कचरा खुलेआम जला रहे हैं, तो इससे क्या पर्यावरण प्रदूषण नहीं होगा। हैरत की बात ये है कि नगर परिषद के अधिकारी साफ तौर पर कहते हैं कि उनकी ओर से कचरे को न जलाने के बाबत एक पत्र तक जारी किया जा चुका है, लेकिन रोजाना कई क्विंटल कूड़ा जला दिया जाता है और वो भी आबादी से बहुत ज्यादा दूर नहीं। नगर परिषद की सीमा के अंदर ही।
अलग-अलग डंपिंग यार्ड में रोजाना जला दिया जाता है पचास टन कचरा
नगर परिषद के सफाई कर्मचारी सुबह-सवेरे ही शहर की गलियों में सफाई कार्य में जुट जाते हैं और गलियों से छोटी छोटी रेहड़ियों में कचरा इकट्ठा होकर प्रत्येक वार्ड के लिए निश्चित एक डंपिंग प्वाइंट पर कचरे का ढेर लगा दिया जाता है। इसके बाद नगर परिषद की ट्रॉलियों में इस कचरे को इकट्ठा करके शहर के विभिन्न कोनों में बने डंपिंग यार्ड में डाल दिया जाता है। कचरा प्रबंधन प्लांट ना होने के कारण ही नगर परिषद के पास कचरे का इस्तेमाल करने का कोई तरीका नहीं है, ऐसे में मजबूरी में कर्मचारियों को शहर भर से एकत्रित कचरा जलाना पड़ता है। लेकिन भारी मात्रा में प्लास्टिक, पॉलिथीन बैग्स और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को जला दिया जाता है। जिससे आसपास के इलाके और वातावरण पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और नगर परिषद के कर्मचारी महीनों से ये प्रैक्टिस करते आ रहे हैं।
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कूड़ा प्रबंधन प्लांट एकमात्र उपाय, विभाग के अधिकारी बरत रहे ढिलाई
जरा सोचिए, अकेले फतेहाबाद शहर से तकरीबन 50 टन कचरा रोज इकट्ठा होता है तो टोहाना, रतिया, भूना, भट्टू और जाखल शहर को मिला दें तो कुल कितना कचरा एकत्रित होता होगा। एक अनुमान के मुताबिक जिले के सभी शहरों से ही लगभग सवा दो सौ टन कचरा रोजाना एकत्रित होता है और फतेहाबाद की तरह ही जिले के बाकी शहरों में भी स्थानीय निकाय संस्थाओं के कर्मचारी इस कचरे को जला देती हैं। इससे अंदाजा लगाइए, रोजाना कितना प्रदूषण फैलता होगा। अधिकारियों की ढिलाई के चलते भूना में प्रस्तावित कचरा प्रबंधन प्लांट की फाइल ही अटक गई है। हैरानी तो इस बात की है कि ना जिले के और ना ही नगर परिषद के अधिकारी इस बारे में कोई गंभीरता दिखा रहे हैं।
नगर परिषद की ओर से कचरे को जलाने पर प्रतिबंध है। कोई कर्मचारी अगर कचरे को जला रहा है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
ओपी सिहाग, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, फतेहाबाद ।
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लेकिन दूसरी ओर खुद जिला प्रशासन के अधिकारियों के इशारे पर रोजाना पचास टन से अधिक कचरा खुलेआम जला रहे हैं, तो इससे क्या पर्यावरण प्रदूषण नहीं होगा। हैरत की बात ये है कि नगर परिषद के अधिकारी साफ तौर पर कहते हैं कि उनकी ओर से कचरे को न जलाने के बाबत एक पत्र तक जारी किया जा चुका है, लेकिन रोजाना कई क्विंटल कूड़ा जला दिया जाता है और वो भी आबादी से बहुत ज्यादा दूर नहीं। नगर परिषद की सीमा के अंदर ही।
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अलग-अलग डंपिंग यार्ड में रोजाना जला दिया जाता है पचास टन कचरा
नगर परिषद के सफाई कर्मचारी सुबह-सवेरे ही शहर की गलियों में सफाई कार्य में जुट जाते हैं और गलियों से छोटी छोटी रेहड़ियों में कचरा इकट्ठा होकर प्रत्येक वार्ड के लिए निश्चित एक डंपिंग प्वाइंट पर कचरे का ढेर लगा दिया जाता है। इसके बाद नगर परिषद की ट्रॉलियों में इस कचरे को इकट्ठा करके शहर के विभिन्न कोनों में बने डंपिंग यार्ड में डाल दिया जाता है। कचरा प्रबंधन प्लांट ना होने के कारण ही नगर परिषद के पास कचरे का इस्तेमाल करने का कोई तरीका नहीं है, ऐसे में मजबूरी में कर्मचारियों को शहर भर से एकत्रित कचरा जलाना पड़ता है। लेकिन भारी मात्रा में प्लास्टिक, पॉलिथीन बैग्स और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को जला दिया जाता है। जिससे आसपास के इलाके और वातावरण पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और नगर परिषद के कर्मचारी महीनों से ये प्रैक्टिस करते आ रहे हैं।
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जरा सोचिए, अकेले फतेहाबाद शहर से तकरीबन 50 टन कचरा रोज इकट्ठा होता है तो टोहाना, रतिया, भूना, भट्टू और जाखल शहर को मिला दें तो कुल कितना कचरा एकत्रित होता होगा। एक अनुमान के मुताबिक जिले के सभी शहरों से ही लगभग सवा दो सौ टन कचरा रोजाना एकत्रित होता है और फतेहाबाद की तरह ही जिले के बाकी शहरों में भी स्थानीय निकाय संस्थाओं के कर्मचारी इस कचरे को जला देती हैं। इससे अंदाजा लगाइए, रोजाना कितना प्रदूषण फैलता होगा। अधिकारियों की ढिलाई के चलते भूना में प्रस्तावित कचरा प्रबंधन प्लांट की फाइल ही अटक गई है। हैरानी तो इस बात की है कि ना जिले के और ना ही नगर परिषद के अधिकारी इस बारे में कोई गंभीरता दिखा रहे हैं।
नगर परिषद की ओर से कचरे को जलाने पर प्रतिबंध है। कोई कर्मचारी अगर कचरे को जला रहा है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
ओपी सिहाग, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, फतेहाबाद ।