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किसानों ने निकाला बरसात से जमा खेतों का पानी
fatehabad
Updated Mon, 11 Jul 2016 12:13 AM IST
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पाइप लाइन डालकर खेतों का पानी घग्घर में पहुंचाने का प्रबंध करते किसान।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गांव चांदपुरा के खेतों में जमा बरसात के पानी को निकालने के लिए गांव किसान खुद ही आगे आएं हैं। रविवार को गांव के किसानों ने खेतों में जमा बरसात का पानी अपने स्तर पर निकाला। इस पर किसानों का करीब 70 हजार रुपये खर्च आया है। किसानों ने इससे काफी राहत महसूस की है।
गांव चांदपुरा के किसान कुलदीप ग्रेवाल, नछत्तर सिंह, गुरसेवक काला, लाभ सिंह, सरूप सिंह, नाहर सिंह, रघुबीर सिंह सहित करीब दर्जन भर से भी ज्यादा किसानों ने बताया कि बरसात से खेतों में भारी मात्रा में जमा पानी के कारण वहां बिजाई की गई धान की पौध खराब हो गई। पशुओं के लिए खड़ा हरा चारा भी नष्ट हो गया। इस समस्या से निपटने के लिए किसानों ने मिलकर योजना बनाई व खेतों से लेकर घग्घर तक पाइप बिछाने का निर्णय लिया।
किसानों ने इस पर घग्घर तक जमीन की खुदाई कर पाइप लाइन डालने में प्रति फुट 95 रुपये का खर्च हुआ। कुल 750 फुट पाइप डालने में 71 हजार रुपये का खर्च उन्होंने मिलकर वहन किया। किसानों ने बताया कि इस समाधान से अब उन्हें भविष्य में उन्हें कम से कम बरसात के कारण खेतों में जमा होने वाले पानी से खराब होने वाली फसलों का डर नहीं रहेगा। किसानों ने कृषि विभाग से मांग की है कि इस पर आए खर्च को प्रशासन अथवा कृषि विभाग वहन करना चाहिए।
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गांव चांदपुरा के किसान कुलदीप ग्रेवाल, नछत्तर सिंह, गुरसेवक काला, लाभ सिंह, सरूप सिंह, नाहर सिंह, रघुबीर सिंह सहित करीब दर्जन भर से भी ज्यादा किसानों ने बताया कि बरसात से खेतों में भारी मात्रा में जमा पानी के कारण वहां बिजाई की गई धान की पौध खराब हो गई। पशुओं के लिए खड़ा हरा चारा भी नष्ट हो गया। इस समस्या से निपटने के लिए किसानों ने मिलकर योजना बनाई व खेतों से लेकर घग्घर तक पाइप बिछाने का निर्णय लिया।
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किसानों ने इस पर घग्घर तक जमीन की खुदाई कर पाइप लाइन डालने में प्रति फुट 95 रुपये का खर्च हुआ। कुल 750 फुट पाइप डालने में 71 हजार रुपये का खर्च उन्होंने मिलकर वहन किया। किसानों ने बताया कि इस समाधान से अब उन्हें भविष्य में उन्हें कम से कम बरसात के कारण खेतों में जमा होने वाले पानी से खराब होने वाली फसलों का डर नहीं रहेगा। किसानों ने कृषि विभाग से मांग की है कि इस पर आए खर्च को प्रशासन अथवा कृषि विभाग वहन करना चाहिए।
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