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Fatehabad News: परिवार पहचान पत्र बना जी का जंजाल, मृत पति का नाम दर्शाया, पत्नी व बच्चों का नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Jan 2023 11:27 PM IST
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Family ID card made, shows the name of the deceased husband, not the wife and children
डीपीआरसी हॉल में पीपीपी में त्रुटियां दूर करवाने के लिए लगी लोगों की लाइन। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। परिवार पहचान पत्र में त्रुटियों के चलते लोग काफी परेशान हो रहे हैं। कई लोगों के आयुष्मान कार्ड नहीं बन रहे, तो गुलाबी व पीले राशन कार्ड कट चुके हैं। कई लोगों की इनकम वेरिफिकेशन छह-छह महीनों से लटकी पड़ी है, जिस कारण लोग एडीसी कार्यालय का चक्कर काटकर परेशान हो चुके हैं। पीपीपी में इस तरह की त्रुटियां आ रही है कि एक महिला के दिवंगत पति का नाम तो परिवार पहचान पत्र में दर्ज है, लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों का नाम ही नहीं है।
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हालांकि, परिवार पहचान पत्र उन लोगों के लिए सहूलियत भरा है, जिनकी आय प्रमाणित हो गई है। उन लोगों के राशन कार्ड भी बन रहे हैं और बुजुर्ग लोगों की पेंशन भी बन रही है। मगर दूसरी ओर ऐसे अनेक लोग हैं, जिनकी परिवार पहचान पत्र में आय तो एक लाख 80 हजार रुपये से कम है, लेकिन फिर भी उनके गुलाबी व पीले राशन कार्ड कट गए हैं। जिन लोगों के गुलाबी कार्ड थे, उनको पीले कार्डों में तब्दील कर दिया गया है और जिनके पीले कार्ड थे, उनका नाम काट दिया गया है। परेशान लोग कड़कड़ाती ठंड में लंबी लाइनों में लगकर परिवार पहचान पत्र में आई त्रुटियों को दूर करवाने में लगे हुए हैं। लघु सचिवालय के साथ बने डीपीआरसी हाल में ऐसे लोगों की समस्या को दूर करने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन कई बार साइट नहीं चलती, जिस कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
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केस एक
मेरे पति का देहांत हो चुका है। मेरा पीला राशन कार्ड है, जिसमें मेरे पति का नाम कटा हुआ है और मेरे बच्चों के नाम हैं, लेकिन परिवार पहचान पत्र में पिछले छह माह से इनकम वेरिफाई नहीं हो रही है। जब पोर्टल पर चेक किया जाता है, तो परिवार पहचान पत्र में केवल मेरे पति का नाम ही दर्शाया जाता है, जबकि उनका देहांत हो चुका है। छह माह से मैं एडीसी कार्यालय के चक्कर काट रही हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
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-संगीता देवी, निवासी, गांव एमपी रोही।
केस दो
परिवार पहचान पत्र को अप्लाई किए हुए कई दिन हो गए हैं, लेकिन मेरे परिवार पहचान पत्र में आय प्रमाणित नहीं हुई है। बार-बार चक्कर लगा रहा हूं, कभी किसी का नंबर दे दिया जाता है तो कभी किसी का, लेकिन अभी तक परिवार पहचान पत्र में आय प्रमाणित नहीं हुई है। कई बार चक्कर लगा चुका हूं मैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं
-कुलदीप सिंह, निवासी, फतेहाबाद।
केस तीन
मेरी उम्र 82 साल है और मेरे तो हाथ पांव भी नहीं चलते। फिर भी परिवार पहचान पत्र में मेरी सालाना आय 50 हजार रुपये दर्शा दी गई। घर में एक बेटा है, जो मजदूरी करता है। मेरे बेटे की आय भी 70 हजार है, फिर भी हमारा पीला कार्ड काट दिया गया। पीले कार्ड से जो राशन आता था, उससे गुजारा हो जाता था, अब वह भी नहीं हो रहा।
-मक्खन सिंह, निवासी, रतिया।
केस चार
मैं टोहाना के गांव इंदाछोई का निवासी हूं और प्रतिदिन 70 किलोमीटर दूर आकर परिवार पहचान पत्र में त्रुटियां ठीक करवाने के लिए चक्कर काट रहा हूं। मेहनत मजदूरी करके मैं अपने घर का पालन पोषण करता हूं। परिवार पहचान पत्र में मेरी आय 80 हजार रुपये है, लेकिन फिर भी मेरा राशन कार्ड काट दिया गया।
-पवन कुमार, निवासी, गांव इंदाछोई।
क्या हैं आय प्रमाणित न होने के कारण
सीएससी सेंटर संचालकों की मानें तो कई लोगों ने अपने परिवार पहचान पत्र में जो मोबाइल नंबर दिया है, वह आधार कार्ड से लिंक नहीं है। ऐसे में उनकी आय प्रमाणित नहीं हो पा रही है। कई लोगों के मोबाइल नंबर भी बदल गए हैं, ऐसे में इन लोगों को पहले अपने आधार कार्ड से मोबाइल नंबर को लिंक करवाना चाहिए। कई लोग फोन नहीं उठाते तो कई अपनी आय बताने में हिचकिचाते हैं। हालांकि कई लोगों तक आय प्रमाणित करने वाले सक्षम अधिकारी इसलिए नहीं पहुंच पाते, क्योंकि उनका पता बदल गया है।
कोेट
फतेहाबाद के डीपीआरसी हॉल में परिवार पहचान पत्र में त्रुटियों व राशन कार्ड को लेकर कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई गई हैं। यहां पर जिन लोगों के परिवार पहचान पत्र में जो दिक्कत आ रही है, उसको दूर किया जा रहा है। राशन कार्ड कटने का डाटा अभी पूरा नहीं आया है, क्योंकि इसकी वेरिफिकेेशन जारी है।

-अमरजोत कौर, जिला कार्यक्रम अधिकारी।
कोट
जिन नागरिकों के बीपीएल सूची से नाम कट रहे हैं, वे ईधर-उधर परेशान होने की बजाय अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर ग्रीवेंस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाएं। पोर्टल पर आई शिकायत का निवारण उचित माध्यम से होगा। अन्य खामियों को भी सीएससी सेंटरों पर जाकर ठीक करवाएं।
-अजय चोपड़ा, एडीसी, फतेहाबाद
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