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वैवाहिक जीवन बचाने के लिए परिजनों के दबाव में झूठा केस करवाया दर्ज
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फतेहाबाद। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक कोर्ट के स्पेशल जज बलवंत सिंह ने दुष्कर्म के आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। कोर्ट ने यह कह कर बरी किया है कि शिकायतकर्ता पीड़िता ने अपना वैवाहिक जीवन बचाने के लिए परिजनों के दबाव में आरोपी पर झूठा केस दर्ज करवाया है।
अदालत ने कहा कि सभी सबूत इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि आरोपी और पीड़िता में सहमति का संबंध था और इसी संबंध की कटुता के चलते पीड़िता के पति ने उसे छोड़ दिया था। वह आठ माह तक मायके बैठी रही। इस दौरान पति-पत्नी में कभी बात नहीं हुई। आठ माह बाद आरोपी के विरुद्ध दुष्कर्म का केस दर्ज करवाया गया। इससे लगता है कि एक डील के तहत उसे ससुराल आने दिया गया कि वह अपने मित्र के खिलाफ केस दर्ज करवाएगी।
यह था मामला
मामले के मुताबिक फतेहाबाद उपमंडल के एक गांव निवासी हलवाई के साथ काम करने वाले युवक पर आरोप लगे थे। वह अकसर हलवाई के घर आता जाता था। 16 जनवरी को हलवाई की पत्नी दिल्ली अपने मायके चली गई और आठ माह बाद वह अपनी ससुराल लौटी। 21 सितंबर 2021 को पति के साथ काम करने वाले सहयोगी के खिलाफ घर में घुसकर दुष्कर्म करने व जान से मारने की धमकी के आरोप में केस दर्ज करवा दिया।
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दोनों पक्षों ने अदालत में गवाही दर्ज करवाई
एडीजे बलवंत सिंह की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता का कहना है कि 16 जनवरी 2021 को दुष्कर्म हुआ, लेकिन वह डर के मारे आठ माह तक चुप रही। यह बात जंचती नहीं क्योंकि पीड़िता आठ माह तक अपने मायके में रही। इन आठ माह में आरोपी ने उससे कोई संपर्क नहीं किया, इससे साफ है कि आरोपी ने धमकी रिपीट नहीं की। पीड़िता चाहती तो मायके वालों को बता सकती थी। उसने ससुराल छोड़ने से पहले अपने पति को भी घटना के बारे में नहीं बताया। यह दर्शाता है कि पीड़िता और आरोपी के संबंधों के बारे में पीड़िता के ससुराल व मायके वाले दोनों को पता था। इस संबंध की वजह से ही पति ने उसे छोड़ दिया और उसे मायके जाना पड़ा। क्रॉस एग्जामिनेशन में एक बात और सामने आई कि आठ महीनों में जब तक विवाहिता अपने मायके दिल्ली रही, उसका पति एक बार भी उससे मिलने नहीं गया और न ही उसने कभी उसे फोन किया। यह साफ दर्शाता है कि यह कटुता विवाहिता के गैर मर्द के साथ संबंधों की वजह से थी। अदालत ने कहा कि 2021 में शादी हुई और 2021 में ही पत्नी मायके चली गई। इससे साफ दोनों का रिश्ता ठीक नहीं था। मेडिकल करने वाले मेडिकल ऑफिसर ने भी अपने बयान में कहा है कि मेडिकल के दौरान पीड़िता ने उसे बताया कि आरोपी उसे घर के नजदीक एक प्लॉट में ले गया और दुष्कर्म की कोशिश की थी जबकि उसने एफआईआर में कहा कि आरोपी ने उसके घर घुसकर दुष्कर्म किया। इसमें साफ है कि वह आरोपी को इस केस में फंसाना नहीं चाहती, लेकिन वह परिवार के दबाव में है।
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अदालत ने कहा कि सभी सबूत इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि आरोपी और पीड़िता में सहमति का संबंध था और इसी संबंध की कटुता के चलते पीड़िता के पति ने उसे छोड़ दिया था। वह आठ माह तक मायके बैठी रही। इस दौरान पति-पत्नी में कभी बात नहीं हुई। आठ माह बाद आरोपी के विरुद्ध दुष्कर्म का केस दर्ज करवाया गया। इससे लगता है कि एक डील के तहत उसे ससुराल आने दिया गया कि वह अपने मित्र के खिलाफ केस दर्ज करवाएगी।
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यह था मामला
मामले के मुताबिक फतेहाबाद उपमंडल के एक गांव निवासी हलवाई के साथ काम करने वाले युवक पर आरोप लगे थे। वह अकसर हलवाई के घर आता जाता था। 16 जनवरी को हलवाई की पत्नी दिल्ली अपने मायके चली गई और आठ माह बाद वह अपनी ससुराल लौटी। 21 सितंबर 2021 को पति के साथ काम करने वाले सहयोगी के खिलाफ घर में घुसकर दुष्कर्म करने व जान से मारने की धमकी के आरोप में केस दर्ज करवा दिया।
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दोनों पक्षों ने अदालत में गवाही दर्ज करवाई
एडीजे बलवंत सिंह की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता का कहना है कि 16 जनवरी 2021 को दुष्कर्म हुआ, लेकिन वह डर के मारे आठ माह तक चुप रही। यह बात जंचती नहीं क्योंकि पीड़िता आठ माह तक अपने मायके में रही। इन आठ माह में आरोपी ने उससे कोई संपर्क नहीं किया, इससे साफ है कि आरोपी ने धमकी रिपीट नहीं की। पीड़िता चाहती तो मायके वालों को बता सकती थी। उसने ससुराल छोड़ने से पहले अपने पति को भी घटना के बारे में नहीं बताया। यह दर्शाता है कि पीड़िता और आरोपी के संबंधों के बारे में पीड़िता के ससुराल व मायके वाले दोनों को पता था। इस संबंध की वजह से ही पति ने उसे छोड़ दिया और उसे मायके जाना पड़ा। क्रॉस एग्जामिनेशन में एक बात और सामने आई कि आठ महीनों में जब तक विवाहिता अपने मायके दिल्ली रही, उसका पति एक बार भी उससे मिलने नहीं गया और न ही उसने कभी उसे फोन किया। यह साफ दर्शाता है कि यह कटुता विवाहिता के गैर मर्द के साथ संबंधों की वजह से थी। अदालत ने कहा कि 2021 में शादी हुई और 2021 में ही पत्नी मायके चली गई। इससे साफ दोनों का रिश्ता ठीक नहीं था। मेडिकल करने वाले मेडिकल ऑफिसर ने भी अपने बयान में कहा है कि मेडिकल के दौरान पीड़िता ने उसे बताया कि आरोपी उसे घर के नजदीक एक प्लॉट में ले गया और दुष्कर्म की कोशिश की थी जबकि उसने एफआईआर में कहा कि आरोपी ने उसके घर घुसकर दुष्कर्म किया। इसमें साफ है कि वह आरोपी को इस केस में फंसाना नहीं चाहती, लेकिन वह परिवार के दबाव में है।