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जिला नगर आयुक्त बिठाने के बाद भी एक साल में नहीं बदले शहर के हालात

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Sep 2021 11:20 PM IST
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Even after setting up the District Municipal Commissioner, the situation of the city did not change in a year
बस स्टैंड के साथ लगती हंस मार्केट में दुकानदारों के बाहर किया गया अतिक्रमण। - फोटो : Fatehabad
प्रदेश सरकार की ओर से प्रत्येक जिले में जिला नगर आयुक्त बिठाने के बावजूद शहरों के हालात नहीं बदले हैं। एक साल में तीन अलग-अलग आईएएस अधिकारी डीएमसी बन गए। मगर शहरों में समस्याएं ज्यों की त्यों मुंह बाये खड़ी हैं। शहरवासी सड़कों की दशा सुधरने से लेकर स्ट्रीट लाइटें जलने के इंतजार में बैठे हैं। जिले में फतेहाबाद के अलावा टोहाना, रतिया, भूना व जाखल को शहरी दर्जा मिला हुआ है। इनमें से फतेहाबाद व टोहाना में नगर परिषद जबकि रतिया, भूना व जाखल में नगरपालिका है। इन नगर परिषद व नगरपालिकाओं की कमान जिला नगर आयुक्त यानी डीएमसी के पास है। पहले यह कमान उपायुक्त के पास होती थी। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने अगस्त 2020 में निकार्यों के नए बॉस नियुक्त किए थे। फतेहाबाद में सबसे पहले डीएमसी के रूप में आईएएस समवर्तक सिंह को लगाया गया था। संवाद
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पहले डीसी कार्यालय तो अब डीएमसी कार्यालय में घूमती रहती हैं फाइलें
इस एक साल में सिर्फ इतना फर्क आया है कि पहले डीसी कार्यालय में नगर निकायों से संबंधित फाइलें घूमती रहती थी। मगर अब इन फाइलों का नया ठिकाना डीएमसी कार्यालय बन चुका है। कई मामलों की फाइलें तो लंबे समय से डीएमसी कार्यालय में आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। इनमें घर-घर से कचरा उठाने और रात में सफाई करवाने जैसी प्रमुख व्यवस्थाओं की फाइलें भी हैं।
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जिले में शहर व उनकी आबादी
फतेहाबाद - 1.25 लाख
टोहाना - एक लाख
रतिया - 60 हजार
भूना - 35 हजार
जाखल - 22 हजार
फतेहाबाद के अब तक डीएमसी
समवर्तक सिंह
डॉ. मुनीष नागपाल
अजय चोपड़ा
आदेश तक नहीं मानते नगर परिषद के अधिकारी
जिले में जिला नगर आयुक्त पद के प्रभाव की स्थिति ऐसी है कि 200 मीटर की दूरी पर बैठे नगर परिषद के अधिकारी आदेश तक नहीं मानते हैं। फतेहाबाद जिले के मौजूदा डीएमसी अजय चोपड़ा ने करीब 15 दिन पहले नगर परिषद कार्यालय का निरीक्षण करने के दौरान स्वच्छता शाखा के अधिकारियों को बारिश के मौसम के बीच मच्छरों की अधिकता के कारण शहर में फोगिंग करवाने के आदेश दिए थे। मगर 15 दिन बीतने के बाद भी शहर में फोगिंग शुरू नहीं हो पाई है।
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प्रमुख सुविधाओं का यह है हाल
नहीं सुधरी सफाई व्यवस्था :
जिले के पांचों ही शहरों में सफाई व्यवस्था बदहाल है। जिला मुख्यालय पर स्थित फतेहाबाद शहर में जीटी रोड, बीघड़ रोड, भट्टू रोड जैसे प्रमुख रास्तों पर मुख्य सड़क पर ही डंपिंग प्वाइंट बनाए हुए हैं। सुबह-सुबह सैर पर जाने वालों से लेकर स्कूली बच्चों तक को गंदगी का सामना करना पड़ता है। शहर में दोपहर 12 बजे तक भी कचरा नहीं उठता है। यही स्थिति डीएमसी की नियुक्ति से पहले थी।
आज भी अतिक्रमण से जूझ रहा शहर :
इसी तरह अतिक्रमण से शहर आज भी जूझ रहा है। एक साल पहले भी शहर के बाजारों में भयंकर अतिक्रमण था, जो अभी भी बरकरार है। सबसे अधिक अतिक्रमण हंस मार्केट, पपीहा पार्क एरिया, चार मरला मार्केट, थाना रोड, धर्मशाला रोड बाजार में हैं।
अवैध पार्किंग से नहीं मिला छुटकारा :
शहरों में अवैध पार्किंग से छुटकारा नहीं मिला है। जिला मुख्यालय के सबसे पुराने जीटी रोड पर दुकानों के आगे पैदल चलने के लिए बना फुटपाथ भी पार्किंग स्थल बन चुका है। थाना रोड पर बनी मल्टीपर्पज पार्किंग का भी पूरा सदुपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
पार्कों में लगे सिर्फ पत्थर लगाए :
यही हाल शहर के पार्कों का हैं। पार्कों को सिर्फ पत्थर लगाकर छोड़ दिया गया है। पार्कों में न तो नियमित रूप से सफाई होती है और न ही सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। बच्चों के लिए लगे झूले टूट चुके हैं। शौचालयों में भी गंदगी पसरी रहती है।
दो महीनों से स्ट्रीट लाइट तक नहीं जलवा सके :
शहर की जनता पिछले दो महीनों से स्ट्रीट लाइट संबंधी समस्या से जूझ रही है। शहर की अधिकांश स्ट्रीटें बंद पड़ी हैं। जो खराब हो चुकी हैं, उनको बदलने का काम भी नहीं हो रहा है। प्रमुख रास्तों पर भी रात होते ही अंधेरा छा जाता है।
समस्याओं में धीरे-धीरे सुधार हो रहा
हिसार में नगर निगम के आयुक्त एवं डीएमसी अशोक गर्ग कहते हैं कि डीएमसी को स्टाफ कुशल नहीं मिला है जबकि निकायों के स्टाफ को डीएमसी कार्यालय में लगाना चाहिए था। अब जो स्टाफ डीएमसी ने रखा हुआ है, वह अधिकांश अनुबंधित है, जिनकी नई ज्वाइनिंग हैं। एलएफए ब्रांच भी डीएमसी को शिफ्ट होनी चाहिए थी। बाकी समस्याओं में धीरे-धीरे सुधार तो हो रहा है।

कोट
मूलभूत सुविधाओं के लिए भी लोग तरस रहे
शहरों की कमान डीएमसी को सौंपने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। आज भी शहरों में मूलभूत सुविधाओं के लिए भी लोग तरस रहे हैं।
हरदीप सिंह, अध्यक्ष, जिंदगी संस्था।
कोट
समस्याओं का समय पर समाधान नहीं होता
सरकार ने डीएमसी का पद सृजित तो कर दिया। मगर उनको पर्याप्त शक्तियां नहीं दी हैं। इस कारण छोटी-छोटी समस्याओं का भी तय समय पर समाधान नहीं होता है।
मदनगोपाल नारंग, सचिव, वरिष्ठ नागरिक परिषद।
कोट
किसी भी व्यवस्था में सुधार में समय लगता है। ऐसा नहीं है कि डीएमसी के पद सृजित होने के बाद हालात नहीं बदले। शहर में डपिंग प्वाइंट्स मुख्य रास्तों पर बने हुए हैं, तो इसकी मैं जांच करवा लेता हूं।
अजय चोपड़ा, जिला नगर आयुक्त, फतेहाबाद।
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