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नहीं मिली एंबुलेंस, स्वास्थ्य केंद्रों पर भटकते दिखे मरीज
fatehabad
Updated Wed, 10 Aug 2016 01:03 AM IST
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भूना से एक गर्भवती को निजी वाहन पर लेकर अस्पताल पहुंचाते तीमारदार।
- फोटो : amar ujala
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मंगलवार से शुरू हुई एनएचएम कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल का पहला दिन जहां मरीजों के लिए परेशानी भरा रहा तो बुधवार का दिन मरीजों के लिए और भी आफत लेकर आ सकता है। बुधवार को एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल में नियमित कर्मचारियों ने भी शामिल होने का एलान कर दिया है। अगर ऐसा हुआ तो बुधवार को सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा सकती हैं। इससे पहले मंगलवार को हड़ताल के पहले दिन भी मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
एनएचएम के तहत आने वाले सभी एंबुलेंस चालकों ने इमरजेंसी दुर्घटना के अलावा कोई काम नहीं किया। जिसके चलते अस्पताल से रेफर होने वाले मरीज और गर्भवती महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। भूना से एक गर्भवती महिला को आपात स्थिति में एक किराए की गाड़ी में अस्पताल लाया गया। हड़ताल में एनएचएम के तहत लगी स्टाफ नर्सों, एएनएम स्टाफ, डाटा ऑपरेटर, आयुष विभाग, स्कूल हेल्थ विभाग और फार्मासिस्ट ने भी हड़ताल में भाग लिया और कोई काम नहीं किया।
मंगलवार को अस्पताल प्रांगण में हड़ताली कर्मचारियों को संबोधित करते कुलदीप सिंह ने कहा कि एनएचएम के तहत हजारों कर्मचारी पिछले 20 सालों से विभिन्न विभागों में अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं, लेकिन विभाग द्वारा इनका लगातार शोषण किया जाता रहा है। कुलदीप ने कहा कि एनएचएम के कर्मचारियों को ना तो पक्के कर्मचारियों के समान वेतन मिलता है और ना ही महंगाई भत्ता, दुर्घटना बीमा, मेडिकल अवकाश जैसी अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में 70 फीसदी कर्मचारी एनएचएम के तहत हैं जिसके चलते स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह सुचारु रूप से चलती हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि एनएचएम कर्मचारियों को भी समान काम-समान वेतन, दुर्घटना बीमा, महंगाई भत्ता एवं कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए।
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एंबुलेंस ढूंढते रहे मरीज, सीएचसी पर भी नहीं मिली नर्सें
मंगलवार को हड़ताल के चलते सबसे ज्यादा प्रभावित एंबुलेंस सेवा रही। लोगों को हड़ताल के बारे में जानकारी नहीं होने से लोग अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर एंबुलेंस का इंतजार करते दिखे। कुछ लोगों ने थक-हारकर निजी वाहनों से कुछ न किराए पर टैक्सी करके अपने मरीजों को अस्पताल से घर पहुंचाया। निजी एंबुलेंस चालकों ने भी हड़ताल का पूरा फायदा उठाया। मजबूर मरीजों को छोड़ने के लिए उन्होंने मुंहमांगे दाम लिए। सुबह से ही कई प्राइवेट एंबुलेंस अस्पताल के बाहर खड़ी रही। हड़ताल के चलते ग्रामीण इलाकों में भी काफी परेशानी का सामना लोगों ने किया।
इस तरह से लोगों ने बयां की अपनी परेशानी
‘मेरा बच्चा हुआ है, जच्चा-बच्चा को घर छोड़ने के लिए एक घंटे से एंबुलेंस का इंतजार कर रहा हूं, लेकिन एंबुलेंस का कोई अता-पता नहीं है। अब मजबूरन टैक्सी स्टैंड से एक गाड़ी किराए पर की है।’
-कुलदीप, निवासी ढांड ।
‘कोई दुर्घटना के चलते अस्पताल आई थी। पहले भिरडाना स्वास्थ्य केंद्र पर गई वहां पर कई कर्मचारी नदारद थे। अब यहां से रेफर करने की बात कही जा रही है लेकिन ले जाने के लिए एंबुलेंस ही नहीं है।’
-जसविंदर कौर, निवासी भिरडाना ।
एनएचएम के तहत ये कर्मचारी रहे हड़ताल पर
एंबुलेंस चालक : 75
स्टाफ नर्स : 40
एएनएम : 150
डाटा ऑपरेटर: 25
आयुष विभाग : 12
स्कूल हेल्थ : 30
फार्मासिस्ट : 12
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एनएचएम के तहत आने वाले सभी एंबुलेंस चालकों ने इमरजेंसी दुर्घटना के अलावा कोई काम नहीं किया। जिसके चलते अस्पताल से रेफर होने वाले मरीज और गर्भवती महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। भूना से एक गर्भवती महिला को आपात स्थिति में एक किराए की गाड़ी में अस्पताल लाया गया। हड़ताल में एनएचएम के तहत लगी स्टाफ नर्सों, एएनएम स्टाफ, डाटा ऑपरेटर, आयुष विभाग, स्कूल हेल्थ विभाग और फार्मासिस्ट ने भी हड़ताल में भाग लिया और कोई काम नहीं किया।
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मंगलवार को अस्पताल प्रांगण में हड़ताली कर्मचारियों को संबोधित करते कुलदीप सिंह ने कहा कि एनएचएम के तहत हजारों कर्मचारी पिछले 20 सालों से विभिन्न विभागों में अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं, लेकिन विभाग द्वारा इनका लगातार शोषण किया जाता रहा है। कुलदीप ने कहा कि एनएचएम के कर्मचारियों को ना तो पक्के कर्मचारियों के समान वेतन मिलता है और ना ही महंगाई भत्ता, दुर्घटना बीमा, मेडिकल अवकाश जैसी अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में 70 फीसदी कर्मचारी एनएचएम के तहत हैं जिसके चलते स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह सुचारु रूप से चलती हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि एनएचएम कर्मचारियों को भी समान काम-समान वेतन, दुर्घटना बीमा, महंगाई भत्ता एवं कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए।
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एंबुलेंस ढूंढते रहे मरीज, सीएचसी पर भी नहीं मिली नर्सें
मंगलवार को हड़ताल के चलते सबसे ज्यादा प्रभावित एंबुलेंस सेवा रही। लोगों को हड़ताल के बारे में जानकारी नहीं होने से लोग अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर एंबुलेंस का इंतजार करते दिखे। कुछ लोगों ने थक-हारकर निजी वाहनों से कुछ न किराए पर टैक्सी करके अपने मरीजों को अस्पताल से घर पहुंचाया। निजी एंबुलेंस चालकों ने भी हड़ताल का पूरा फायदा उठाया। मजबूर मरीजों को छोड़ने के लिए उन्होंने मुंहमांगे दाम लिए। सुबह से ही कई प्राइवेट एंबुलेंस अस्पताल के बाहर खड़ी रही। हड़ताल के चलते ग्रामीण इलाकों में भी काफी परेशानी का सामना लोगों ने किया।
इस तरह से लोगों ने बयां की अपनी परेशानी
‘मेरा बच्चा हुआ है, जच्चा-बच्चा को घर छोड़ने के लिए एक घंटे से एंबुलेंस का इंतजार कर रहा हूं, लेकिन एंबुलेंस का कोई अता-पता नहीं है। अब मजबूरन टैक्सी स्टैंड से एक गाड़ी किराए पर की है।’
-कुलदीप, निवासी ढांड ।
‘कोई दुर्घटना के चलते अस्पताल आई थी। पहले भिरडाना स्वास्थ्य केंद्र पर गई वहां पर कई कर्मचारी नदारद थे। अब यहां से रेफर करने की बात कही जा रही है लेकिन ले जाने के लिए एंबुलेंस ही नहीं है।’
-जसविंदर कौर, निवासी भिरडाना ।
एनएचएम के तहत ये कर्मचारी रहे हड़ताल पर
एंबुलेंस चालक : 75
स्टाफ नर्स : 40
एएनएम : 150
डाटा ऑपरेटर: 25
आयुष विभाग : 12
स्कूल हेल्थ : 30
फार्मासिस्ट : 12