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Fatehabad News: मच्छर-मक्खी के काटने से पशुओं की बिगड़ रही पाचन क्रिया, कम हो रहा दुग्ध उत्पादन
Tue, 03 Sep 2024 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 03 Sep 2024 12:24 AM IST
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फतेहाबाद। मानसून सीजन होने के चलते मच्छर और मक्खियों की भरमार हो गई है। इसका असर पशुओं पर भी देखने को मिल रहा है। उनके काटने से पशुओं को भूख-प्यास कम लग रही है और वे ज्यादा थकान महसूस कर रहे हैं। साथ ही उनकी पाचन क्रिया भी बिगड़ रही है। नतीजन, दुग्ध उत्पादन घटने लगा है।
दरअसल, पशुओं के लिए सूखा मौसम ठीक रहता है, मगर इन दिनों में मौसम में नमी की मात्रा बढ़ रही है। इससे कारण कीट ज्यादा पैदा रहे हो रहे हैं। अक्सर बारिश के बाद गर्मी से राहत मिलने के बाद पशुओं में दुग्ध उत्पादन बढ़ता है, मगर इस बार मच्छरों और मक्खियों के काटने से पशुओं में दूध की मात्रा कम हुई है। इस कारण पशुपालकों को आर्थिक चपत लग रही है।
मच्छरों के काटने से देर रात्रि तक नहीं सो पाते हैं पशु
पशुपालक देवेंद्र सिंह, नरेश कुमार, दिलबाग सिंह, नरेंद्र कुमार व चिमनलाल ने बताया कि मच्छरों के काटने से परेशान पशु देर रात तक खड़े रहते हैं। जब देर रात को मौसम में थोड़ी ठंड होती है, तब पशु बैठ पाते हैं। इस कारण पशुओं को पूरा आराम नहीं मिल पा रहा है। वहीं, पशु आम दिनों की तुलना में रिश के दिनों में जुगाली कम करते हैं, जिसके कारण चारे का पूरी तरह से पाचन नहीं हो पाता है। ऐसे में पशुओं में दुग्ध उत्पादन कम हो रहा है।
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मेरे पास दो भैंस हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 20 लीटर दूध मिल रहा था। पिछले 15 दिनों से मच्छरों और मक्खियों की संख्या बढ़ने के बाद पशुओं से दूध कम मिल रहा है। अब मात्र 15 लीटर दूध ही मिल पा रहा है। पांच लीटर की कमी आ गई है।
-राय सिंह, पशुपालक
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मेरे पास दो भैंस और एक गाय है। जिनसे मुझे प्रतिदिन करीब 25 लीटर दूध प्राप्त हो रहा था। मगर अब मौसम में बदलाव के कारण मुझे मात्र 20 लीटर प्रतिदिन प्राप्त हो रहा है। पांच लीटर तक की कमी हो गई है।
-राजेंद्र, पशुपालक
मौसम में नमी की मात्रा बढ़ रही है। इस कारण मच्छर और मक्खियों की बढ़ोतरी हो रही है। पशुओं को बचाने के लिए मच्छरदानी और दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। पशुओं के स्थान को सूखा और साफ रखें। मौसम में नमी के कारण चिंचड़ी बुखार, मलेरिया से वायरल बीमारियां फैली हुई है। इसके बचाव के लिए फिनाइल का पोछा लगाना चाहिए। पशुओं को ताजा पानी पिलाना चाहिए।
-डॉ. संजय शर्मा, वरिष्ठ पशु चिकित्सक
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दरअसल, पशुओं के लिए सूखा मौसम ठीक रहता है, मगर इन दिनों में मौसम में नमी की मात्रा बढ़ रही है। इससे कारण कीट ज्यादा पैदा रहे हो रहे हैं। अक्सर बारिश के बाद गर्मी से राहत मिलने के बाद पशुओं में दुग्ध उत्पादन बढ़ता है, मगर इस बार मच्छरों और मक्खियों के काटने से पशुओं में दूध की मात्रा कम हुई है। इस कारण पशुपालकों को आर्थिक चपत लग रही है।
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मच्छरों के काटने से देर रात्रि तक नहीं सो पाते हैं पशु
पशुपालक देवेंद्र सिंह, नरेश कुमार, दिलबाग सिंह, नरेंद्र कुमार व चिमनलाल ने बताया कि मच्छरों के काटने से परेशान पशु देर रात तक खड़े रहते हैं। जब देर रात को मौसम में थोड़ी ठंड होती है, तब पशु बैठ पाते हैं। इस कारण पशुओं को पूरा आराम नहीं मिल पा रहा है। वहीं, पशु आम दिनों की तुलना में रिश के दिनों में जुगाली कम करते हैं, जिसके कारण चारे का पूरी तरह से पाचन नहीं हो पाता है। ऐसे में पशुओं में दुग्ध उत्पादन कम हो रहा है।
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मेरे पास दो भैंस हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 20 लीटर दूध मिल रहा था। पिछले 15 दिनों से मच्छरों और मक्खियों की संख्या बढ़ने के बाद पशुओं से दूध कम मिल रहा है। अब मात्र 15 लीटर दूध ही मिल पा रहा है। पांच लीटर की कमी आ गई है।
-राय सिंह, पशुपालक
मेरे पास दो भैंस और एक गाय है। जिनसे मुझे प्रतिदिन करीब 25 लीटर दूध प्राप्त हो रहा था। मगर अब मौसम में बदलाव के कारण मुझे मात्र 20 लीटर प्रतिदिन प्राप्त हो रहा है। पांच लीटर तक की कमी हो गई है।
-राजेंद्र, पशुपालक
मौसम में नमी की मात्रा बढ़ रही है। इस कारण मच्छर और मक्खियों की बढ़ोतरी हो रही है। पशुओं को बचाने के लिए मच्छरदानी और दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। पशुओं के स्थान को सूखा और साफ रखें। मौसम में नमी के कारण चिंचड़ी बुखार, मलेरिया से वायरल बीमारियां फैली हुई है। इसके बचाव के लिए फिनाइल का पोछा लगाना चाहिए। पशुओं को ताजा पानी पिलाना चाहिए।
-डॉ. संजय शर्मा, वरिष्ठ पशु चिकित्सक