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Fatehabad News: 20 दिन से जल निकासी कार्य जारी, फिर भी डूबे गांव, फसलें बर्बाद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 19 Sep 2025 10:42 PM IST
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Drainage work has been ongoing for 20 days, yet the villages are still submerged, and the crops are ruined.
फतेहाबाद के गांव चिदंड़ में जमा पानी के बीच से होकर स्कूल जाते बच्चे। स्रोत:ग्रामीण
फतेहाबाद। जिले के चिदंड़, बड़ोपल, कुम्हारिया सहित कई गांव पिछले 20 दिनों से जलभराव की चपेट में हैं। सिंचाई विभाग द्वारा लगातार जल निकासी कार्य किया जा रहा है, लेकिन अब तक स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। ग्रामीणों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और कई परिवार अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि सेम (भूमिगत लवणीयता) की समस्या व लंबी पाइपलाइनों के कारण जल निकासी की गति बेहद धीमी है। नहरों से दूरी अधिक होने के कारण पानी खींचने में समय लग रहा है। कई ग्रामीणों का कहना है कि उनके मकानों की नींव पानी में डूबने से ढहने का खतरा बन गया है। ग्रामीणों ने बताया कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो ढाणियों के मकान गिर सकते हैं। कई घरों में दरारें आ चुकी हैं। कुछ लोग सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं।
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बारिश के बाद से हालात बिगड़े
हाल ही की बारिश के बाद यह जलभराव की स्थिति बनी हुई है। पानी खेतों, गलियों और घरों तक घुस गया था। सिंचाई विभाग ने गांव की आबादी से कुछ हद तक पानी निकाला, लेकिन गांव के चारों ओर अब भी पानी फैला हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब जल निकासी कार्य को तेज करने और स्थायी समाधान की जरूरत है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन को जलनिकासी की व्यवस्था को लेकर लंबी अवधि की योजना बनानी चाहिए, ताकि हर साल होने वाली इस जलभराव त्रासदी से राहत मिल सके।
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पिछले 20 दिनों से लगातार जल निकासी की जा रही है, लेकिन हालात जस के तस हैं। गांव की ढाणियों में अब भी पानी भरा है। बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। प्रशासन को स्थायी जल निकासी व्यवस्था करनी चाहिए। - सुंदर बड़ोपलिया, ग्रामीण

जलभराव की समस्या ने ग्रामीणों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं, जिससे किसानों पर आर्थिक संकट मंडरा रहा है। यह बेहद गंभीर स्थिति है, जिस पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। - मुकेश कुमार, चिदंड़ निवासी

प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन को जल निकासी और सेम की समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी परेशानियों से बचा जा सके। यदि समय रहते सही इंतजाम किए जाते, तो अब तक गांवों से पानी पूरी तरह निकल चुका होता। - ओमप्रकाश, निवासी चिदंड़

गांव चिदंड़ और आसपास के क्षेत्रों में हर साल मानसून की पहली बारिश के साथ ही जलभराव की स्थिति बन जाती है। खेतों में सेम की समस्या पिछले 10 वर्षों से बनी हुई है। सिंचाई विभाग हर साल लाखों रुपये खर्च करता है, फिर भी स्थायी राहत नहीं मिल रही। - अशोक, निवासी चिदंड़

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जल निकासी का काम लगातार जारी है। गांव चिदंड़ में पहले 5 पंप शुरू किए गए थे, अब तीन पंप और लगाए गए हैं। गांवों को जलभराव मुक्त करने की कोशिश की जा रही है। सेम की समस्या होने के कारण जमीन का पानी ऊपर आ रहा है। अगर अतिरिक्त पंपों की ओर जरूरत पड़ी तो व्यवस्था की जाएगी। - विनोद, धतरवाल, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग, आदमपुर।
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