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Fatehabad News: पराली जलाकर खेत की ताकत न घटाएं, मिट्टी में मिला खाद बनाएं
Thu, 17 Sep 2026 10:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 17 Sep 2026 10:42 PM IST
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फतेहाबाद के गांव चनकोठी में पराली न जलाने की शपथ लेते किसान।
फतेहाबाद। पराली जलाने से खेत की उपजाऊ शक्ति प्रभावित होने के साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। किसान पराली में आग लगाने के बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों की मदद से फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर खाद के रूप में इस्तेमाल करें।
यह बात खंड कृषि अधिकारी डॉ. जयकुमार भौरिया ने गांव चनकोठी में आयोजित फसल अवशेष प्रबंधन जागरूकता कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम का आयोजन जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण एवं कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। शिविर में दर्जनों किसानों ने भाग लिया और पराली न जलाने की शपथ ली।
कृषि अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पराली को खेत में मिलाने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है और आगामी फसल की पैदावार में भी लाभ मिल सकता है। किसानों को पराली जलाने से संबंधित कानूनी प्रावधानों और प्रशासनिक नियमों के बारे में भी जागरूक किया गया। कार्यक्रम में सरपंच खुशवंत सिंह, पटवारी सतीश कुमार, एडवोकेट लितेश कुमार और कृषि विभाग से राकेश कुमार मौजूद रहे।
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यह बात खंड कृषि अधिकारी डॉ. जयकुमार भौरिया ने गांव चनकोठी में आयोजित फसल अवशेष प्रबंधन जागरूकता कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम का आयोजन जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण एवं कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। शिविर में दर्जनों किसानों ने भाग लिया और पराली न जलाने की शपथ ली।
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कृषि अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पराली को खेत में मिलाने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है और आगामी फसल की पैदावार में भी लाभ मिल सकता है। किसानों को पराली जलाने से संबंधित कानूनी प्रावधानों और प्रशासनिक नियमों के बारे में भी जागरूक किया गया। कार्यक्रम में सरपंच खुशवंत सिंह, पटवारी सतीश कुमार, एडवोकेट लितेश कुमार और कृषि विभाग से राकेश कुमार मौजूद रहे।
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