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पहले मुर्दाबाद के नारे, फिर पहनाई पगड़ी
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद
Updated Sat, 13 Feb 2016 12:34 AM IST
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21 फरवरी को होने वाले राज्य स्तरीय रविदास जयंती समारोह के लिए निमंत्रण देने यहां आए परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार कई विवादों को जन्म दे गए। पटवार भवन में आयोजित कार्यक्रम में परिवहन मंत्री की जगह पहुंची अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की चेयरपर्सन सुनीता दुग्गल को आयोजकों की खरी-खोटी सुननी पड़ी। यहां तक कि मंत्री के व्यवहार से गुस्साए लोगों ने मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की और पटवार भवन से उठकर चले गए। हालांकि, हंगामा होने के बाद मंत्री पंवार मौके पर पहुंचे और उन्होंने देरी से आने के लिए माफी मांगते हुए अपनी बात रखी। तब जाकर माहौल शांत हुआ।
दरअसल, श्री गुरु रविदास छात्रावास सोसायटी की ओर से शुक्रवार को पटवार भवन में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। आयोजकों की ओर से मंत्री पंवार के इसमें शिरकत करने का प्रचार किया गया था लेकिन परिवहन मंत्री ने यहां की बजाए अरोड़वंश धर्मशाला में आयोजित दूसरे कार्यक्रम को प्राथमिकता दी। उन्होंने पटवार भवन के कार्यक्रम में अनुसूचित वित्त एवं विकास निगम की चेयरपर्सन सुनीता दुग्गल को भेज दिया। इस बात से पटवार भवन में आयोजक और उपस्थित लोग भड़क गए। आयोजकों और लोगों ने मंत्री कृष्ण पंवार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। सुनीता दुग्गल ने उनको समझाने की कोशिश की तो आयोजकों ने सुनीता दुग्गल का माइक ही बंद करवा दिया। आयोजकों की इस हरकत से सुनीता दुग्गल की भी त्योरियां चढ़ गईं, लेकिन मौके की नजाकत को समझते हुए उन्होंने मंत्री पंवार से फोन पर बात कर स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद जाकर आनन-फानन में मंत्री पटवार भवन पहुंचे और लोगों से माफी मांगते हुए 21 फरवरी के राज्यस्तरीय कार्यक्रम में पहुंचने की अपील की।
पूर्व राजदूत आजाद सिंह तूर से भी माइक छीना
समारोह के विशिष्ट अतिथि पूर्व राजदूत आजाद सिंह तूर ने अपने संबोधन के माध्यम से लोगों को ये जताने की कोशिश की कि मंत्री व्यस्तता के चलते नहीं आ पाए। इससे गुस्साए आयोजकों ने तूर के संबोधन के बीच से ही उनको रोक दिया। इससे तूर भी हक्के-बक्के रह गए। हालांकि, उन्होंने आयोजकों को इसके बाद भी समझाने की कोशिश की लेकिन आयोजकों ने उनकी एक नहीं सुनी।
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सुनीता दुग्गल ने दस मिनट तक फोन पर मंत्री को समझाया
मंत्री के ना आने से भड़के लोगों और आयोजकों ने पटवार भवन में सुनीता दुग्गल के सामने ही मंत्री मुर्दाबाद के नारे लगाए। सुनीता दुग्गल माइक बंद करने को लेकर आयोजकों से उलझी भी, लेकिन उनकी बात को किसी ने नहीं सुना। पूर्व राजदूत आजाद सिंह तूर के कहने पर सुनीता दुग्गल ने पटवार भवन के अंदर के कमरे में जाकर लगभग 10 मिनट तक परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार से बात कर उन्हें यहां के बिगड़े हालात बताए। इसके बाद मंत्री तुरंत वहां पहुंच गए।
मंत्री को दी गई थी कार्यक्रम में ना पहुंचने की फीडबैक
पूर्व राजदूत आजाद सिंह तूर ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि मंत्री कृष्ण पंवार को हिदायत दी गई है कि वे पटवार भवन के कार्यक्रम में ना जाएं। हालांकि उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं बताया कि आखिर एक मंत्री को यह हिदायत किसने दे दी। तूर ने यह भी कहा कि मंत्री और उन्हें संदेश मिला था कि इस कार्यक्रम में अधिकतर लोग कांग्रेसी हैं। इस पर आयोजकों ने उन्हें बीच में ही टोकते हुए कहा कि वे इस तरह की बातें ना करें। यह समाज का कार्यक्रम है इसमें सभी प्रकार के लोग समाज हित में ही आए हैं।
नारेबाजी के बाद सम्मान
मंत्री कृष्ण पंवार के पटवार भवन ना आने की सूचना पर भड़के आयोजकों ने जहां एक और पहले मंत्री मुर्दाबाद के नारे लगाए, उसके बाद मंत्री के आने पर उनके खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाने वाले आयोजकों ने उनका सम्मान किया। उनको फूल थमाए और उन्हें पगड़ी भी पहनाई। इस दौरान मंत्री और सुनीता दुग्गल के चेहरे पर मुस्कान देखने लायक थी।
दुग्गल के भाषण पर खूब बजीं तालियां
विवाद शांत होने के बाद संबोधन के लिए आई सुनीता दुग्गल का भाषण काफी प्रभावी रहा। उनकी जोरदार बातों को लोगों की सराहना भी खूब मिली। अपने संबोधन में सुनीता दुग्गल ने दलित समाज की महिलाओं को आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने समाज के लोगों से साफ कहा कि खुद को दलित कहलवाना बंद करो। उन्होंने माइक से हटकर खुद को दिखाते हुए कहा कि मैं आज इस मुकाम पर पहुंची हूं, क्या मैं शक्ल से दलित लगती हूं। उन्होंने समाज के लोगों से ये भी आह्वान किया कि जिस जगह पर दलितों के लिए अलग से व्यवस्था हो, उस कार्यक्रम में जाने की जरूरत नहीं है। कोई भी राज समाज के बिना नहीं चल सकता, इसलिए आपस में लड़ने की बजाए सरकार का फायदा लो।
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दरअसल, श्री गुरु रविदास छात्रावास सोसायटी की ओर से शुक्रवार को पटवार भवन में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। आयोजकों की ओर से मंत्री पंवार के इसमें शिरकत करने का प्रचार किया गया था लेकिन परिवहन मंत्री ने यहां की बजाए अरोड़वंश धर्मशाला में आयोजित दूसरे कार्यक्रम को प्राथमिकता दी। उन्होंने पटवार भवन के कार्यक्रम में अनुसूचित वित्त एवं विकास निगम की चेयरपर्सन सुनीता दुग्गल को भेज दिया। इस बात से पटवार भवन में आयोजक और उपस्थित लोग भड़क गए। आयोजकों और लोगों ने मंत्री कृष्ण पंवार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। सुनीता दुग्गल ने उनको समझाने की कोशिश की तो आयोजकों ने सुनीता दुग्गल का माइक ही बंद करवा दिया। आयोजकों की इस हरकत से सुनीता दुग्गल की भी त्योरियां चढ़ गईं, लेकिन मौके की नजाकत को समझते हुए उन्होंने मंत्री पंवार से फोन पर बात कर स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद जाकर आनन-फानन में मंत्री पटवार भवन पहुंचे और लोगों से माफी मांगते हुए 21 फरवरी के राज्यस्तरीय कार्यक्रम में पहुंचने की अपील की।
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पूर्व राजदूत आजाद सिंह तूर से भी माइक छीना
समारोह के विशिष्ट अतिथि पूर्व राजदूत आजाद सिंह तूर ने अपने संबोधन के माध्यम से लोगों को ये जताने की कोशिश की कि मंत्री व्यस्तता के चलते नहीं आ पाए। इससे गुस्साए आयोजकों ने तूर के संबोधन के बीच से ही उनको रोक दिया। इससे तूर भी हक्के-बक्के रह गए। हालांकि, उन्होंने आयोजकों को इसके बाद भी समझाने की कोशिश की लेकिन आयोजकों ने उनकी एक नहीं सुनी।
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सुनीता दुग्गल ने दस मिनट तक फोन पर मंत्री को समझाया
मंत्री के ना आने से भड़के लोगों और आयोजकों ने पटवार भवन में सुनीता दुग्गल के सामने ही मंत्री मुर्दाबाद के नारे लगाए। सुनीता दुग्गल माइक बंद करने को लेकर आयोजकों से उलझी भी, लेकिन उनकी बात को किसी ने नहीं सुना। पूर्व राजदूत आजाद सिंह तूर के कहने पर सुनीता दुग्गल ने पटवार भवन के अंदर के कमरे में जाकर लगभग 10 मिनट तक परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार से बात कर उन्हें यहां के बिगड़े हालात बताए। इसके बाद मंत्री तुरंत वहां पहुंच गए।
मंत्री को दी गई थी कार्यक्रम में ना पहुंचने की फीडबैक
पूर्व राजदूत आजाद सिंह तूर ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि मंत्री कृष्ण पंवार को हिदायत दी गई है कि वे पटवार भवन के कार्यक्रम में ना जाएं। हालांकि उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं बताया कि आखिर एक मंत्री को यह हिदायत किसने दे दी। तूर ने यह भी कहा कि मंत्री और उन्हें संदेश मिला था कि इस कार्यक्रम में अधिकतर लोग कांग्रेसी हैं। इस पर आयोजकों ने उन्हें बीच में ही टोकते हुए कहा कि वे इस तरह की बातें ना करें। यह समाज का कार्यक्रम है इसमें सभी प्रकार के लोग समाज हित में ही आए हैं।
नारेबाजी के बाद सम्मान
मंत्री कृष्ण पंवार के पटवार भवन ना आने की सूचना पर भड़के आयोजकों ने जहां एक और पहले मंत्री मुर्दाबाद के नारे लगाए, उसके बाद मंत्री के आने पर उनके खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाने वाले आयोजकों ने उनका सम्मान किया। उनको फूल थमाए और उन्हें पगड़ी भी पहनाई। इस दौरान मंत्री और सुनीता दुग्गल के चेहरे पर मुस्कान देखने लायक थी।
दुग्गल के भाषण पर खूब बजीं तालियां
विवाद शांत होने के बाद संबोधन के लिए आई सुनीता दुग्गल का भाषण काफी प्रभावी रहा। उनकी जोरदार बातों को लोगों की सराहना भी खूब मिली। अपने संबोधन में सुनीता दुग्गल ने दलित समाज की महिलाओं को आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने समाज के लोगों से साफ कहा कि खुद को दलित कहलवाना बंद करो। उन्होंने माइक से हटकर खुद को दिखाते हुए कहा कि मैं आज इस मुकाम पर पहुंची हूं, क्या मैं शक्ल से दलित लगती हूं। उन्होंने समाज के लोगों से ये भी आह्वान किया कि जिस जगह पर दलितों के लिए अलग से व्यवस्था हो, उस कार्यक्रम में जाने की जरूरत नहीं है। कोई भी राज समाज के बिना नहीं चल सकता, इसलिए आपस में लड़ने की बजाए सरकार का फायदा लो।