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कैंसर को मात देकर खेती में जुटे हैं गांव समैन के धर्माराम
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ट्रैक्टर चलाकर खेत जाते गांव समैन निवासी धर्माराम।
- फोटो : Fatehabad
टोहाना। टोहाना खंड के गांव समैन के निवासी धर्माराम कैंसर को मात देकर अपने दैनिक कार्यों को बखूबी पूरा कर रहे हैं। धर्माराम सुबह से शाम तक खेत में काम करते हैं। उनका कहना है कि मजबूत हौसले से कैंसर से जंग जीती जा सकती है।
धर्माराम को पिछले साल जुलाई महीने में अपने गले में कैंसर होने का पता चला। उन्हें अपने गले से थूक के साथ खून आने की दिक्कत हुई तो उन्होंने टोहाना के नागरिक अस्पताल में अपना गला चेक करवाया। नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों ने उन्हें रोहतक पीजीआई जाकर चेकअप करवाने को कहा। रोहतक पीजीआई में जांच करवाने पर पता चला कि उन्हें गले का कैंसर है। एकबारगी तो उनकी चिंता बढ़ गई, लेकिन उन्होंने हौसला रखा और अगस्त महीने में हिसार के निजी अस्पताल में आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अपना इलाज करवाया।
स्वस्थ रूप से निभा रहे हैंदिनचर्या
धर्माराम के छोटे बेटे संदीप कुमार ने बताया कि उनके पिता का इलाज लगातार तीन महीने तक चला। पहले दो महीने लगातार कीमोथैरेपी की गई। उसके बाद 35 दिनों तक शेक लगाई गई। फिलहाल उनके पिता बिल्कुल स्वस्थ हैं। हालांकि, रूटीन की दवाई अभी भी ले रहे हैं। मगर स्वस्थ रूप से दिनचर्या निभा रहे हैं।
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60 से ज्यादा उम्र, फिर भी बखूबी कर रहा हूं काम : धर्माराम
धर्माराम कहते हैं कि कैंसर शरीर को कमजोर करती है। कैंसर से लड़ने के लिए व्यक्ति में मजबूत हौसला होना चाहिए। मौजूदा समय में इस बीमारी का समय पर पता चलने पर इलाज संभव है। यदि किसी व्यक्ति को इस बीमारी के होने का पता चलता है तो उसे तुरंत किसी अच्छे अस्पताल में जाकर इलाज करवाना चाहिए। धर्माराम कहते हैं कि उनकी उम्र 60 साल से ज्यादा हो चुकी है। फिर भी वे अपने घर व खेत में रूटीन के काम खूब करते हैं। थोड़ी बहुत थकावट तो होती है, लेकिन शरीर स्वस्थ है।
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धर्माराम को पिछले साल जुलाई महीने में अपने गले में कैंसर होने का पता चला। उन्हें अपने गले से थूक के साथ खून आने की दिक्कत हुई तो उन्होंने टोहाना के नागरिक अस्पताल में अपना गला चेक करवाया। नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों ने उन्हें रोहतक पीजीआई जाकर चेकअप करवाने को कहा। रोहतक पीजीआई में जांच करवाने पर पता चला कि उन्हें गले का कैंसर है। एकबारगी तो उनकी चिंता बढ़ गई, लेकिन उन्होंने हौसला रखा और अगस्त महीने में हिसार के निजी अस्पताल में आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अपना इलाज करवाया।
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स्वस्थ रूप से निभा रहे हैंदिनचर्या
धर्माराम के छोटे बेटे संदीप कुमार ने बताया कि उनके पिता का इलाज लगातार तीन महीने तक चला। पहले दो महीने लगातार कीमोथैरेपी की गई। उसके बाद 35 दिनों तक शेक लगाई गई। फिलहाल उनके पिता बिल्कुल स्वस्थ हैं। हालांकि, रूटीन की दवाई अभी भी ले रहे हैं। मगर स्वस्थ रूप से दिनचर्या निभा रहे हैं।
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60 से ज्यादा उम्र, फिर भी बखूबी कर रहा हूं काम : धर्माराम
धर्माराम कहते हैं कि कैंसर शरीर को कमजोर करती है। कैंसर से लड़ने के लिए व्यक्ति में मजबूत हौसला होना चाहिए। मौजूदा समय में इस बीमारी का समय पर पता चलने पर इलाज संभव है। यदि किसी व्यक्ति को इस बीमारी के होने का पता चलता है तो उसे तुरंत किसी अच्छे अस्पताल में जाकर इलाज करवाना चाहिए। धर्माराम कहते हैं कि उनकी उम्र 60 साल से ज्यादा हो चुकी है। फिर भी वे अपने घर व खेत में रूटीन के काम खूब करते हैं। थोड़ी बहुत थकावट तो होती है, लेकिन शरीर स्वस्थ है।