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खुले में शौच जाना किसी सामाजिक अभिशाप से कम नहीं : उपायुक्त
fatehabad
Updated Fri, 08 Jul 2016 12:14 AM IST
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अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. जेके आभीर जागरूकता अभियान कार्यक्रम में बोलते हुए
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आज के युग में भी बाहर खुले में शौच जाना किसी सामाजिक अभिशाप से कम नहीं है, क्योंकि खुले में पड़े मल से जहां गंदगी व बीमारियां फैलती हैं, वहीं महिलाओं के लिए यह किसी अपमान से कम नहीं है। जिनके पास सोचने-समझने की शक्ति है, वे लोग अपने घरों में शौचालय जरूर बनवाते हैं। यह बात अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. जेके आभीर ने किसान विश्राम गृह में स्वच्छ भारत मिशन के तहत आयोजित जागरूकता अभियान कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने खुले में शौच से मुक्ति, मनरेगा और ग्रामीण आजीविका मिशन के संबंध में उपस्थित सरपंचों, पंचायत समिति सदस्यों, शिक्षकों, अधिकारी, कर्मचारियों व संस्थाओं के प्रतिनिधियों से खुले मंच पर विचार-विमर्श किया और इन अभियानों के माध्यम से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में सहयोग का आह्वान किया।
मक्खियों से घर तक आता है मल :
उपायुक्त ने कहा कि कोई भी संवेदनशील व्यक्ति यह पसंद नहीं करेगा कि उसके घर की इज्जत (बहू-बेटी) को बाहर खुले में शौच के लिए जाना पड़े और इसके लिए उसे अंधेरा होने का इंतजार करना पड़े। जो भी व्यक्ति खुले में शौच के लिए बाहर जाते हैं, वे बच्चों, बजुर्गों और घर में शौच जाने वालों के लिए भी बीमारियां पैदा करते हैं। मक्खियां खुले में पड़े मल पर बैठने के बाद जब हमारे घरों में रखी खाने की वस्तुओं पर बैठती हैं, तो वे इतनी प्रदूषित और जहरीले हो जाते हैं कि उन्हें खाने वाला बीमार हो जाता है और कम रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण बच्चों की तो मृत्यु तक हो जाती है।
मानसिकता बदलनी जरूरी :
उपायुक्त ने बताया कि भारत में 87 प्रतिशत घरों में शौचालय होने के बावजूद 100 में से 61 लोग शौच के लिए खुले में जाते हैं जबकि पिछड़े माने जाने वाले बांग्लादेश में 100 में से दो और अफ्रीका में चार लोग ही खुले में शौच के लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए लोगों की मानसिकता बदलनी होगी और उन्हें इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करके यह आदत छुड़वानी होगी। उन्होंने कहा कि यह काम सरकार, प्रशासन या पुलिस नहीं कर सकती, बल्कि समाज स्वयं कर सकता है। इसीलिए इस अभियान को समुदाय संचालित संपूर्ण स्वच्छता अभियान कहा गया है।
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जिले के 98 प्रतिशत घरों में शौचालय :
उपायुक्त ने बताया कि फतेहाबाद जिला के 98 प्रतिशत घरों में शौचालय है। शेष दो प्रतिशत घरों में शौचालय बनवाकर और जो इक्का-दुक्का लोगों को बाहर जाने की आदत है, उन्हें समझाकर शौचालयों में ही शौच करने की आदत डालकर हम जिला को पूरी तरह से ओडीएफ कर सकते हैं। यह काम सरपंचों को पंचायत, स्कूली विद्यार्थियों और युवा संगठनों की मदद से करना होगा।
टोहाना के आठ गांव ही ओडीएफ :
डॉ. आभीर ने बताया कि जो गांव पूर्ण रूप से खुले में शौच से मुक्त होगा, उसे सरकार द्वारा एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। इसका इस्तेमाल गांव में स्वच्छता अभियान को मजबूत करने में किया जा सकता है। इस समय टोहाना के 49 में से केवल आठ गांव (भोडिय़ाखेड़ा, हिम्मतपुरा, बढ़ाईखेड़ा, खनौरा, मादुआना, ललौदा, रसुलपुर व कमालवाला) ही ओडीएफ हैं।
इस अवसर पर बीडीपीओ दिलबाग सिंह, सीडीपीओ उषा मुवाल, पंचायत समिति चेयरमैन डॉ. भगवान सिंह, वाइस चेयरमैन जीत सिंह, परियोजना अधिकारी डॉ. रणविजय, एबीपीओ अरुण कुमार, एसईपीओ धर्मपाल सिंह व प्रधानाचार्य बलवान सिंह सहित सभी गांवों के सरपंच, ग्राम सचिव, जेई, आशा वर्कर, आंगनवाड़ी वर्कर्स, शिक्षक और विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी भी मौजूद थे।
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मक्खियों से घर तक आता है मल :
उपायुक्त ने कहा कि कोई भी संवेदनशील व्यक्ति यह पसंद नहीं करेगा कि उसके घर की इज्जत (बहू-बेटी) को बाहर खुले में शौच के लिए जाना पड़े और इसके लिए उसे अंधेरा होने का इंतजार करना पड़े। जो भी व्यक्ति खुले में शौच के लिए बाहर जाते हैं, वे बच्चों, बजुर्गों और घर में शौच जाने वालों के लिए भी बीमारियां पैदा करते हैं। मक्खियां खुले में पड़े मल पर बैठने के बाद जब हमारे घरों में रखी खाने की वस्तुओं पर बैठती हैं, तो वे इतनी प्रदूषित और जहरीले हो जाते हैं कि उन्हें खाने वाला बीमार हो जाता है और कम रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण बच्चों की तो मृत्यु तक हो जाती है।
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मानसिकता बदलनी जरूरी :
उपायुक्त ने बताया कि भारत में 87 प्रतिशत घरों में शौचालय होने के बावजूद 100 में से 61 लोग शौच के लिए खुले में जाते हैं जबकि पिछड़े माने जाने वाले बांग्लादेश में 100 में से दो और अफ्रीका में चार लोग ही खुले में शौच के लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए लोगों की मानसिकता बदलनी होगी और उन्हें इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करके यह आदत छुड़वानी होगी। उन्होंने कहा कि यह काम सरकार, प्रशासन या पुलिस नहीं कर सकती, बल्कि समाज स्वयं कर सकता है। इसीलिए इस अभियान को समुदाय संचालित संपूर्ण स्वच्छता अभियान कहा गया है।
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जिले के 98 प्रतिशत घरों में शौचालय :
उपायुक्त ने बताया कि फतेहाबाद जिला के 98 प्रतिशत घरों में शौचालय है। शेष दो प्रतिशत घरों में शौचालय बनवाकर और जो इक्का-दुक्का लोगों को बाहर जाने की आदत है, उन्हें समझाकर शौचालयों में ही शौच करने की आदत डालकर हम जिला को पूरी तरह से ओडीएफ कर सकते हैं। यह काम सरपंचों को पंचायत, स्कूली विद्यार्थियों और युवा संगठनों की मदद से करना होगा।
टोहाना के आठ गांव ही ओडीएफ :
डॉ. आभीर ने बताया कि जो गांव पूर्ण रूप से खुले में शौच से मुक्त होगा, उसे सरकार द्वारा एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। इसका इस्तेमाल गांव में स्वच्छता अभियान को मजबूत करने में किया जा सकता है। इस समय टोहाना के 49 में से केवल आठ गांव (भोडिय़ाखेड़ा, हिम्मतपुरा, बढ़ाईखेड़ा, खनौरा, मादुआना, ललौदा, रसुलपुर व कमालवाला) ही ओडीएफ हैं।
इस अवसर पर बीडीपीओ दिलबाग सिंह, सीडीपीओ उषा मुवाल, पंचायत समिति चेयरमैन डॉ. भगवान सिंह, वाइस चेयरमैन जीत सिंह, परियोजना अधिकारी डॉ. रणविजय, एबीपीओ अरुण कुमार, एसईपीओ धर्मपाल सिंह व प्रधानाचार्य बलवान सिंह सहित सभी गांवों के सरपंच, ग्राम सचिव, जेई, आशा वर्कर, आंगनवाड़ी वर्कर्स, शिक्षक और विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी भी मौजूद थे।