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दामाद पर कातिलाना हमला करने वाले बीमा अधिकारी को चार साल की कैद
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Updated Thu, 30 Mar 2017 12:27 AM IST
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दामाद की हत्या प्रयास के एक मामले में बीमा अधिकारी महेंद्र सिंह मलिक को चार साल की कैद एवं दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमरजीत सिंह की अदालत ने बुधवार को ये सजा सुनाई। मलिक पर अपने दामाद विकास पर गाड़ी चढ़ाकर हत्या प्रयास का आरोप था। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार महेंद्र सिंह मलिक की बेटी कुकासी की शादी अप्रैल 2011 में जगजीवनपुरा निवासी विकास के साथ हुई थी। बताया गया है कि विकास कनाडा में रहता था। कनाडा में विकास और कुकासी के वैवाहिक रिश्तों में खटास आ गई और दोनों अलग होने की तैयारी करने लगे। बताया गया है कि इस मामले में मलिक ने विकास एवं उसके परिवार पर घरेलू हिंसा का आरोप भी लगाया था। जनवरी 2015 में विकास बीघड़ रोड पर विश्वकर्मा मंदिर के पास महेंद्र मलिक ने अपनी कार से विकास को कुचलने का प्रयास किया था। विकास के पिता बलवंत सिंह ने पुलिस को शिकायत देकर महेंद्र सिंह मलिक पर उसके बेटे को जान से मारने की कोशिश करने का मामला दर्ज करवा दिया। इसी मामले में बुधवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमरजीत सिंह की अदालत ने आरोपी महेंद्र सिंह मलिक को चार साल की कैद एवं 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
एक अन्य मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विकास गुप्ता की अदालत ने दूसरे की जमीन अपनी बताकर बैंक से लोन लेने के आरोपी को दोषी करार देकर एक साल की कैद और पांच सौ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जानकारी के मुताबिक भट्टूकलां निवासी रामसिंह ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई कि भट्टूकलां निवासी रति राम ने खेवट न बर 250 की जमीन को पीएनबी बैंक भट्टू कलां में रहन रख कर 3 लाख का लोन ले लिया, जबकि इस खेवट में उसका कोई हिस्सा नहीं था। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी रति राम को दोषी करार दिया। हालांकि रति राम के वकील ने बहस के दौरान अदालत को बताया कि उसने सारा लोन बैंक में जमा करवा दिया है।
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एक अन्य मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विकास गुप्ता की अदालत ने दूसरे की जमीन अपनी बताकर बैंक से लोन लेने के आरोपी को दोषी करार देकर एक साल की कैद और पांच सौ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जानकारी के मुताबिक भट्टूकलां निवासी रामसिंह ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई कि भट्टूकलां निवासी रति राम ने खेवट न बर 250 की जमीन को पीएनबी बैंक भट्टू कलां में रहन रख कर 3 लाख का लोन ले लिया, जबकि इस खेवट में उसका कोई हिस्सा नहीं था। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी रति राम को दोषी करार दिया। हालांकि रति राम के वकील ने बहस के दौरान अदालत को बताया कि उसने सारा लोन बैंक में जमा करवा दिया है।
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