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Fatehabad News: उपभोक्ता आयोग का फैसला, एलआईसी को चुकाने होंगे ग्राहक को एक माह में 15 लाख रुपये
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फतेहाबाद। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने उपभोक्ता को बड़ी राहत देते हुए बीमा कंपनी एलआईसी को आदेश दिए हैं कि वह उपभोक्ता को बीमा पॉलिसी क्लेम के रूप में 15 लाख रुपये की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित एक माह में अदा करे। उपभोक्ता को यह राशि आयोग में शिकायत आने के बाद ब्याज सहित देनी होगी। आयोग ने साथ ही एलआईसी को 11 हजार रुपये की राशि मानसिक, शारीरिक प्रताड़ना व वाद खर्च के रूप में अदा करने के भी आदेश दिए।
मिली जानकारी के अनुसार सिरसा जिले के गांव नूनियावाली निवासी प्रमोद कुमार ने 10 अगस्त 2020 को आयोग में अपने अधिवक्ता के जरिये शिकायत दर्ज करवाई थी। अपनी शिकायत में प्रमोद कुमार ने बताया कि उसके भाई राजपाल ने 25 अक्तूबर 2017 को एलआईसी से 5151 रुपये की राशि अदा करके 15 लाख रुपये का बीमा करवाया था। हालांकि चार फरवरी 2019 को उसकी मृत्यु हो गई।
उसने नॉमिनी होने के नाते बीमा क्लेम लेने के लिए तमाम जरूरी कागजात एलआईसी में जमा करवाए थे। परंतु एलआईसी ने गलत और गैरकानूनी ढंग से क्लेम देने से मनाकर दिया। आयोग के अध्यक्ष राजबीर सिंह, सदस्य के एस नारायण व हरीश मेहता ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के पश्चात उपभोक्ता प्रमोद की शिकायत मंजूर करते हुए बीमा कंपनी एलआईसी को आदेश दिया कि वह उपभोक्ता को बीमा क्लेम के रूप में 15 लाख की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से अदा करे।
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आयोग ने एलआईसी को 11 हजार रुपये की राशि मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना तथा वाद खर्च के रूप में उपभोक्ता को अदा करने को भी कहा। आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि यदि एक माह में आयोग का फैसला लागू नहीं किया तो एक माह से तीन साल तक की कैद का प्रावधान भी है।
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मिली जानकारी के अनुसार सिरसा जिले के गांव नूनियावाली निवासी प्रमोद कुमार ने 10 अगस्त 2020 को आयोग में अपने अधिवक्ता के जरिये शिकायत दर्ज करवाई थी। अपनी शिकायत में प्रमोद कुमार ने बताया कि उसके भाई राजपाल ने 25 अक्तूबर 2017 को एलआईसी से 5151 रुपये की राशि अदा करके 15 लाख रुपये का बीमा करवाया था। हालांकि चार फरवरी 2019 को उसकी मृत्यु हो गई।
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उसने नॉमिनी होने के नाते बीमा क्लेम लेने के लिए तमाम जरूरी कागजात एलआईसी में जमा करवाए थे। परंतु एलआईसी ने गलत और गैरकानूनी ढंग से क्लेम देने से मनाकर दिया। आयोग के अध्यक्ष राजबीर सिंह, सदस्य के एस नारायण व हरीश मेहता ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के पश्चात उपभोक्ता प्रमोद की शिकायत मंजूर करते हुए बीमा कंपनी एलआईसी को आदेश दिया कि वह उपभोक्ता को बीमा क्लेम के रूप में 15 लाख की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से अदा करे।
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आयोग ने एलआईसी को 11 हजार रुपये की राशि मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना तथा वाद खर्च के रूप में उपभोक्ता को अदा करने को भी कहा। आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि यदि एक माह में आयोग का फैसला लागू नहीं किया तो एक माह से तीन साल तक की कैद का प्रावधान भी है।