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Fatehabad News: बच्चे को मूक-बधिर बताकर दे दी ताकत की दवा, दोबारा जांच करवाई तो बच्चा मिला था स्वस्थ

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 24 Aug 2023 12:07 AM IST
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Consumer commission will have to pay compensation of one lakh to two doctors of Hisar, also imposed a fine of Rs 11,000
फतेहाबाद। उपभोक्ता आयोग राजबीर सिंह ने बच्चे को मूक-बधिर बताकर उसके परिजनों से रुपये ऐंठने के मामले में हिसार के दो चिकित्सकों को 50-50 हजार रुपये हर्जाना बच्चे के परिजनों को देने के आदेश दिए हैं। साथ ही दोनों चिकित्सकों पर 11 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आदेश में आयोग ने यह भी टिप्पणी की है कि इलाज के नाम पर दो साल के छोटे बच्चे को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया है, जो कि असहनीय है।
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सतीश कॉलोनी निवासी सिमरन उर्फ शशि ने वर्ष 2021 में उपभोक्ता आयोग में हिसार शक्ति न्यूरो साइंस सेंटर के डॉ. जीपी बर्मन व ईएनटी डॉ. एसके मेनन के खिलाफ याचिका दायर की थी। आयोग में डाली गई अपनी याचिका में सिमरन उर्फ शशि ने बताया था कि उनके दो साल के बेटे शिवांश के रूटीन चेकअप के लिए वह हिसार में डॉ. मेनन के पास गए थे। चेकअप के बाद डॉ. मेनन ने उनको कहा कि उनके बेटे का बेरा टेस्ट करवाना होगा और डॉ. बर्मन के पास टेस्ट करवाने की सलाह दी। इसके बाद वह डॉ. बर्मन के पास गए और अपने बेटे का बेरा टेस्ट करवाया। जब वह रिपोर्ट लेकर वापस डॉ. मेनन के पास गए, तो उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार उनका बेटा एक कान से 90 फीसदी और दूसरे कान से 100 फीसदी मूक-बधिर है। आरोप है कि इसके बाद डॉ. मेनन ने उनके बेटे के इलाज के बजाय उसको ताकत की दवाएं दे दी। संवाद
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शक हुआ तो गए दूसरे अस्पताल
सिमरन उर्फ शशि ने बताया कि उनको इस मामले में शक हुआ तो वह हिसार के एक और प्रतिष्ठित अस्पताल में गए और रिपोर्ट दिखाई। पहले तो चिकित्सक ने उनको बताया कि रिपोर्ट के अनुसार उनके बेटे को आठ से 10 लाख रुपये का कोकलियर इंप्लांट लगाया जाएगा, जो कि एक कान का है। बाद में चिकित्सक ने परामर्श दिया कि एक बार फिर बच्चे के टेस्ट करा लिए जाएं। सिमरन उर्फ शशि ने बताया कि इसके बाद उन्होंने दोबारा हिसार के ही एक अन्य अस्पताल में जब बेटे के टेस्ट करवाए, तो उसमें बताया गया कि बच्चा सामान्य है और वह सुन व बोल सकता है।
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आयोग में पेश होने पर चिकित्सक बोला, मैंने एमआरआई के लिए कहा था

उपभोक्ता आयोग में जब यह मामला आया तो चिकित्सकों को नोटिस भेजे गए। इस दौरान डॉ. बर्मन आयोग में पेश हुए और उन्होंने दलील दी कि उन्होंने तो बच्चे के ब्रेन एमआरआई की बात कही थी। इसके बाद शिवांश के परिजनों ने सिरसा के एक बड़े अस्पताल से बच्चे का ब्रेन एमआरआई भी करवाया, जिसमें बच्चा सामान्य रूप से स्वस्थ पाया गया।


फोरम ने 50-50 हजार रुपये जुर्माना देने के दिए आदेश
मामले की सुनवाई करने के बाद उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष राजबीर सिंह ने दोनों चिकित्सकों को बच्चे को सही तरीके से ट्रीटमेंट न देने का दोषी माना। आयोग ने अपने आदेशों में यह भी कहा कि चिकित्सकों की इस लापरवाही की वजह से बच्चे को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन व दवाएं दी गईं। आयाेग ने इसे बड़ी लापरवाही मानते हुए कहा कि बच्चे की जिंदगी के साथ बड़ा खिलवाड़ किया गया है। इस मामले में दोनों चिकित्सकों ने बच्चे को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया, जो सहने लायक नहीं और उनके परिवार को भी परेशानियां झेलनी पड़ी। इसी आधार पर आयोग ने दोनों चिकित्सकों को बच्चे के परिवार को 50-50 हजार रुपये हर्जाना देने के आदेश दिए हैं। साथ ही दोनों को 11 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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