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नहरों में सफाई नहीं, फसल डूबने का खतरा

Wed, 18 Jun 2014 12:02 AM IST
fatehabad
fatehabad Updated Wed, 18 Jun 2014 12:02 AM IST
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मानसून सिर पर है, लेकिन अभी तक फतेहाबाद डिवीजन के अंतर्गत आने वाली नहरों की सफाई नहीं हुई है। नहर विभाग में नहरों की सफाई करने के लिए किसी प्रकार के बजट का प्रावधान नहीं है। नहरों की सफाई के लिए विभाग मनरेगा के मजदूरों पर निर्भर रहता है। समय से नहरों की मरम्मत और सफाई न होने के कारण बरसात के दिनों में जलभराव हो जाता है और नहरें टूट जाती हैं, जिसका खमियाजा किसानों को अपनी फसल गंवाकर भुगतना पड़ता है।

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इन नहरों को सफाई की दरकार
फतेहाबाद डिवीजन के अंतर्गत 35 छोटी व बड़ी नहरें और 7 ड्रेन आती हैं। इन ड्रेन में भट्टू लिंक, किरढ़ान लिंक, बड़ोपल लिंक, महम्मदपुर रोही, एम थ्री, रंगोई खरीफ चैनल और हिसार खरीफ चैनल शामिल हैं।
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नहीं मिलता मुआवजा, लगता जुर्माना
नहरें टूटने से किसानों को होने वाले नुकसान का नहर विभाग किसी प्रकार का कोई मुआवजा नहीं देता बल्कि नहर टूटने पर किसानों को मुआवजा देने की बजाय उन पर जुर्माना लगाया जाता है। राजस्व विभाग द्वारा भी सिर्फ उन किसानों को मुआवजा दिया जाता है, जिनकी फसलें प्राकृतिक आपदा से खराब हुई हो। पिछले दिनों गांव लालवास से निकलने वाली मुंशीवाला माइनर में 16 दिनाें की बंदी के बाद पानी छोड़ा गया। इस दौरान यह नहर 20 किलोमीटर के दायरे में 3 जगह टूट गई थी।
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बरसात में ओवरफ्लो होती हैं नहरें
मानसून के दिनों में बरसात होने पर नहरें क्षमता से अधिक बहती हैं। पानी की अधिकता के कारण ओवरफ्लो होने के कारण टूट जाती हैं और खेतों में पानी भर जाता है। किसानों की फसल डूबने के साथ उनके खेतों में लगे ट्यूबवेलों में भी पानी भर जाता है।

15 दिन बंद रहेंगी नहरें
धांगड जल सेवाएं उपमंडल के एसडीओ राजेंद्र वर्मा ने बताया कि फतेहाबाद ब्रांच नहर जो बलियाला हेड से निकलकर टोहाना, काजलहेड़ी, बड़ोपल, बीघड़ और महराणा आदि गांवों से होकर गुजरती है, सबसे बड़ी नहर है। मानसून में इसके टूटने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।


इसलिए विभाग इसके निरीक्षण के लिए सतर्क हो गया है। नहर विभाग के कार्यकारी अभियंता सतीश कुमार जनवा ने बताया कि नहरों की सफाई मनरेगा के तहत करवाई जाती है और सफाई को लेकर 16 से 30 जून तक रतिया के अंतर्गत आने वाली नहरें बंद रहेंगी। खंड एवं पंचायत अधिकारी अनुभव मेहता ने बताया कि नहरी विभाग अधिकारियों द्वारा डिमांड आने पर वे मनरेगा के तहत नहरों की सफाई करवा देते हैं। मनरेगा के तहत नहरों की सफाई करवाने में साढ़े 10 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

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