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Fatehabad News: पहले दिन ही शिक्षा विभाग के दावे फेल, स्कूलों में नहीं पहुंची किताबें
Tue, 01 Apr 2025 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 01 Apr 2025 11:12 PM IST
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गांव अहरवां में प्रवेश उत्सव के दौरान हवन में भाग लेते हुए विद्यार्थी व अन्य
फतेहाबाद। सरकारी स्कूलों में मंगलवार को प्रवेश उत्सव शुरू हो गया लेकिन पहले दिन ही शिक्षा विभाग के दावे फेल हो गए। स्कूलों में शिक्षा का नया सत्र तो शुरू हुआ लेकिन विद्यार्थियों को किताबें नहीं मिली। प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में किताबें ही नहीं पहुंची है।
विद्यार्थियों की बिना किताबों के पढ़ाई शुरू करवाई गई है। हालांकि पहले दिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम रही है। शिक्षकों का कहना है कि नई शिक्षा नीति के अनुसार किताबों की छपवाई ही नहीं हुई है। जबकि अधिकारियों का कहना है कि किताबें पहुंच चुकी है और जल्द एजेंसी स्कूलों में पहुंचानी शुरू कर देंगी।
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स्कूलों में शुरू हुआ क्लास रेडिनेस प्रोग्राम
स्कूलों में किताबें न पहुंचने के कारण क्लास रेडिनेस प्रोग्राम शुरू किया गया है। इस प्रोग्राम के तहत विद्यार्थियों द्वारा पिछली कक्षा में की गई गलतियों को शिक्षक नए शिक्षकों को बताएंगे। ये कार्यक्रम 15 दिनों तक स्कूलों में चलेगा। इसके अलावा शिक्षकों को खेल-खेल में विद्यार्थियों को पढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
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प्रचार के लिए नहीं मिला बजट
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों को प्रचार करने के निर्देश दिए गए हैं। ड्रॉप आउट शून्य करने का भी दावा किया जा रहा है। लेकिन प्रचार के लिए स्कूलों को बजट ही नहीं दिया गया है। शिक्षकों का कहना है कि बिना बजट कैसे प्रचार किया जा सकता है।
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पिछले सत्र में ये रही है विद्यार्थियों की स्थिति
कक्षा विद्यार्थी
बालवाटिका 3811
पहली 4396
दूसरी 4302
तीसरी 6713
चौथी 8922
पांचवीं 9151
छठी 9072
सातवीं 9732
आठवीं 10407
नौवीं 10657
दसवीं 8363
11वीं 7959
12वीं 5596
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शिक्षा विभाग ने दावा किया था कि स्कूलों में नया सत्र शुरू होने से पहले ही किताबें पहुंच जाएंगी लेकिन ये नहीं पहुंची। न्यू एजुकेशन पॉलिसी के तहत किताबों की छपवाई ही नहीं हुई है। किताबें न होने के कारण ही क्लास रेडिनेस कार्यक्रम शुरू किया गया है। सरकार को समय से पहले किताबें स्कूलों में पहुंचानी चाहिए थी।
- विकास टुटेजा, जिला प्रधान, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ।
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सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों पर दबाव डाला जा रहा है। स्कूलों से किताबों को लेकर पहले ही डिमांड ले ली गई थी। किताबें न पहुंचने से स्कूलों की संख्या पर भी असर पड़ेगा। विभाग को किताबें व ग्रांट समय पर देनी चाहिए।
-देवेंद्र सिंह दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
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किताबें पहुंच चुकी हैं। एजेंसी द्वारा किताबें स्कूलों में पहुंचाने का जल्द से जल्द काम शुरू किया जाएगा। संबंधित एजेंसी से इस संबंध में बात की जाएगी।
- संगीता बिश्रोई, जिला शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद।
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विद्यार्थियों की बिना किताबों के पढ़ाई शुरू करवाई गई है। हालांकि पहले दिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम रही है। शिक्षकों का कहना है कि नई शिक्षा नीति के अनुसार किताबों की छपवाई ही नहीं हुई है। जबकि अधिकारियों का कहना है कि किताबें पहुंच चुकी है और जल्द एजेंसी स्कूलों में पहुंचानी शुरू कर देंगी।
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स्कूलों में शुरू हुआ क्लास रेडिनेस प्रोग्राम
स्कूलों में किताबें न पहुंचने के कारण क्लास रेडिनेस प्रोग्राम शुरू किया गया है। इस प्रोग्राम के तहत विद्यार्थियों द्वारा पिछली कक्षा में की गई गलतियों को शिक्षक नए शिक्षकों को बताएंगे। ये कार्यक्रम 15 दिनों तक स्कूलों में चलेगा। इसके अलावा शिक्षकों को खेल-खेल में विद्यार्थियों को पढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
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प्रचार के लिए नहीं मिला बजट
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों को प्रचार करने के निर्देश दिए गए हैं। ड्रॉप आउट शून्य करने का भी दावा किया जा रहा है। लेकिन प्रचार के लिए स्कूलों को बजट ही नहीं दिया गया है। शिक्षकों का कहना है कि बिना बजट कैसे प्रचार किया जा सकता है।
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पिछले सत्र में ये रही है विद्यार्थियों की स्थिति
कक्षा विद्यार्थी
बालवाटिका 3811
पहली 4396
दूसरी 4302
तीसरी 6713
चौथी 8922
पांचवीं 9151
छठी 9072
सातवीं 9732
आठवीं 10407
नौवीं 10657
दसवीं 8363
11वीं 7959
12वीं 5596
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शिक्षा विभाग ने दावा किया था कि स्कूलों में नया सत्र शुरू होने से पहले ही किताबें पहुंच जाएंगी लेकिन ये नहीं पहुंची। न्यू एजुकेशन पॉलिसी के तहत किताबों की छपवाई ही नहीं हुई है। किताबें न होने के कारण ही क्लास रेडिनेस कार्यक्रम शुरू किया गया है। सरकार को समय से पहले किताबें स्कूलों में पहुंचानी चाहिए थी।
- विकास टुटेजा, जिला प्रधान, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ।
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सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों पर दबाव डाला जा रहा है। स्कूलों से किताबों को लेकर पहले ही डिमांड ले ली गई थी। किताबें न पहुंचने से स्कूलों की संख्या पर भी असर पड़ेगा। विभाग को किताबें व ग्रांट समय पर देनी चाहिए।
-देवेंद्र सिंह दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
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किताबें पहुंच चुकी हैं। एजेंसी द्वारा किताबें स्कूलों में पहुंचाने का जल्द से जल्द काम शुरू किया जाएगा। संबंधित एजेंसी से इस संबंध में बात की जाएगी।
- संगीता बिश्रोई, जिला शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद।