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होम क्वारंटीन परिवारों को संक्रमित समझ दूधिया नहीं दे रहे दूध, नहीं देने आ रहा कोई राशन, नौकर भी छोड़ गए काम पर आना
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से होम क्वारंटीन किए गए परिवारों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इनके घरों के बाहर नोटिस लगाए गए हैं कि कोई भी इनसे न मिले और ये होम क्वारंटीन है। इसे नोटिस को देखने के बाद अब इन घरों में दूधिया दूध डालने के लिए नहीं आ रहा है और न ही कोई दुकानदार राशन दे रहा है। यहां तक कि कोई रेहड़ी वाला सब्जी और फल भी नहीं दे रहा है। अब ये लोग व्हाट्स एप ग्रुपों में संस्थाओं से सहायता मांग रहे हैं, क्योंकि प्रशासन की तरफ से इन परिवारों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
विदेश से और देश के अलग-अलग राज्यों और जिलों से आए लोगों को स्वास्थ्य विभाग ने स्क्रीनिंग के बाद होम क्वारंटीन किया है, ताकि अगर कोई दिक्कत हो तो वह अन्य लोगों में न फैलें। इसके चलते विभाग ने इनके घरों के आगे खतरा लिखा नोटिस लगाया है। यहां तक कि ये निर्देश दिए है कि कोई भी इन परिवारों से न मिलें और ये लोग घर से बाहर भी नहीं निकल सकते हैं। अगर घर से बाहर निकलते हैं तो एफआईआर दर्ज हो सकती है। भट्टूकलां में एक एफआईआर भी दर्ज करवाई जा चुकी है।
होम क्वारंटीन लोग बोले ऐसा तो जेल में भी नहीं होता
होम क्वारंटीन परिवारों के लोगों का कहना है कि जब से उनके घर के बाहर नोटिस लगाया गया है तब से दूध वाला नहीं आ रहा है। सब्जी वाले को कहते हैं तो वह नहीं देने के लिए आता है। आसपास के लोगों को राशन देकर जाने के लिए कहा जाता है तो वह राशन भी नहीं दे रहे हैं। यहां तक कि घर पर काम करने के लिए आने वाले नौकरानी भी नहीं आ रही है। शिव नगर निवासी होम क्वारंटीन एक युवक का कहना है कि जेल से भी बदतर हालात हो रहे हैं।
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जिले में क्या है स्थिति
- विदेश से आए प्रवासी भारतीय होम क्वारंटीन 261
- अलग-अलग राज्यों से आए होम क्वारंटीन 495
- होम क्वारंटीन का समय पूरा हुआ 74
ऐसे कर सकते हैं मदद
डॉक्टरों के मुताबिक जो परिवार होम क्वारंटीन है वह अपने साथी को फोन करके सामान मंगवा सकते हैं। इसके बाद साथी वह सामान लाकर गेट पर छोड़ सकता है और फिर उसे कॉल करके बता सकता है। अगर कोई बात भी करनी है तो वह दूरी बनाकर बात कर सकता है। जो परिवार क्वारंटीन है वह अछूते नहीं है सिर्फ एहतियात के तौर पर इन्हें होम क्वारंटीन किया गया है।
कोरोना महामारी का रूप ले चुकी है, जो विदेश से या किसी अन्य स्थान से आएं है उनके घर पर कोविड-19 का पोस्टर लगा हुआ है लेकिन लोगों को यहां नहीं पता कि पोस्टर सिर्फ इसलिए है कि वे लोग अन्य लोगों से अलग रहें, ऐसा बिल्कुल नहीं है कि वे सब कोविड-19 के मरीज हैं। लोगों से मेरी अपील है कि आप उन लोगों की शिकायत करने की बजाए उनको जिस भी सामान की आवश्यकता है आप उन्हें सुरक्षा नियमों के साथ लाकर दे सकते हैं।
- डॉ. सुजाता बंसल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, भट्टूकलां
जो लोग क्वारंटीन है उनके द्वारा व्हाट्स एप से सूचना आ रही है कि उनके घर दूधिया कोरोना के डर से दूध डालने नहीं आ रहा है और उनके राशन नहीं मिल रहा है। सूचना पर संस्था की तरफ से सामान पहुंचाया गया है। प्रशासन को इनके लिए व्यवस्था करनी चाहिए, क्योंकि प्रशासन के पास इनकी सूची है।
- गोपाल बंसल, सदस्य, खुशी एक उम्मीद फतेहाबाद।
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विदेश से और देश के अलग-अलग राज्यों और जिलों से आए लोगों को स्वास्थ्य विभाग ने स्क्रीनिंग के बाद होम क्वारंटीन किया है, ताकि अगर कोई दिक्कत हो तो वह अन्य लोगों में न फैलें। इसके चलते विभाग ने इनके घरों के आगे खतरा लिखा नोटिस लगाया है। यहां तक कि ये निर्देश दिए है कि कोई भी इन परिवारों से न मिलें और ये लोग घर से बाहर भी नहीं निकल सकते हैं। अगर घर से बाहर निकलते हैं तो एफआईआर दर्ज हो सकती है। भट्टूकलां में एक एफआईआर भी दर्ज करवाई जा चुकी है।
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होम क्वारंटीन लोग बोले ऐसा तो जेल में भी नहीं होता
होम क्वारंटीन परिवारों के लोगों का कहना है कि जब से उनके घर के बाहर नोटिस लगाया गया है तब से दूध वाला नहीं आ रहा है। सब्जी वाले को कहते हैं तो वह नहीं देने के लिए आता है। आसपास के लोगों को राशन देकर जाने के लिए कहा जाता है तो वह राशन भी नहीं दे रहे हैं। यहां तक कि घर पर काम करने के लिए आने वाले नौकरानी भी नहीं आ रही है। शिव नगर निवासी होम क्वारंटीन एक युवक का कहना है कि जेल से भी बदतर हालात हो रहे हैं।
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जिले में क्या है स्थिति
- विदेश से आए प्रवासी भारतीय होम क्वारंटीन 261
- अलग-अलग राज्यों से आए होम क्वारंटीन 495
- होम क्वारंटीन का समय पूरा हुआ 74
ऐसे कर सकते हैं मदद
डॉक्टरों के मुताबिक जो परिवार होम क्वारंटीन है वह अपने साथी को फोन करके सामान मंगवा सकते हैं। इसके बाद साथी वह सामान लाकर गेट पर छोड़ सकता है और फिर उसे कॉल करके बता सकता है। अगर कोई बात भी करनी है तो वह दूरी बनाकर बात कर सकता है। जो परिवार क्वारंटीन है वह अछूते नहीं है सिर्फ एहतियात के तौर पर इन्हें होम क्वारंटीन किया गया है।
कोरोना महामारी का रूप ले चुकी है, जो विदेश से या किसी अन्य स्थान से आएं है उनके घर पर कोविड-19 का पोस्टर लगा हुआ है लेकिन लोगों को यहां नहीं पता कि पोस्टर सिर्फ इसलिए है कि वे लोग अन्य लोगों से अलग रहें, ऐसा बिल्कुल नहीं है कि वे सब कोविड-19 के मरीज हैं। लोगों से मेरी अपील है कि आप उन लोगों की शिकायत करने की बजाए उनको जिस भी सामान की आवश्यकता है आप उन्हें सुरक्षा नियमों के साथ लाकर दे सकते हैं।
- डॉ. सुजाता बंसल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, भट्टूकलां
जो लोग क्वारंटीन है उनके द्वारा व्हाट्स एप से सूचना आ रही है कि उनके घर दूधिया कोरोना के डर से दूध डालने नहीं आ रहा है और उनके राशन नहीं मिल रहा है। सूचना पर संस्था की तरफ से सामान पहुंचाया गया है। प्रशासन को इनके लिए व्यवस्था करनी चाहिए, क्योंकि प्रशासन के पास इनकी सूची है।
- गोपाल बंसल, सदस्य, खुशी एक उम्मीद फतेहाबाद।