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Fatehabad News: चेन्नई कर्मभूमि बनी, जन्मभूमि में सेवा का दीप जलता रहा

Fri, 07 Aug 2026 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Fri, 07 Aug 2026 11:10 PM IST
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Chennai became the land of action, while the lamp of service continued to burn in the land of birth
फते​हाबाद। जाट धर्मशाला में कावड़ियों के लिए बनता लंगर। संवाद
फतेहाबाद। रोजगार के सिलसिले में वर्षों पहले चेन्नई जाकर बसे मोहन लाल सर्राफ और उनका परिवार आज भी अपनी जन्मभूमि तथा धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि सावन शुरू होते ही पूरा परिवार फतेहाबाद पहुंच जाता है और मुख्य रोड स्थित जाट धर्मशाला में लगातार पांच दिन कांवड़ियों की सेवा में जुट जाता है।
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परिवार भोजन, चाय, नाश्ता और अन्य सभी आवश्यक व्यवस्थाएं स्वयं संभालता है। यह सेवा वर्ष 2008 से बिना किसी बाधा के लगातार जारी है। हर साल बड़ी संख्या में कांवड़िए यहां प्रसाद ग्रहण करते हैं और अन्य सुविधाओं का लाभ उठाते हैं। मुख्य सेवादार मोहन लाल सर्राफ ने बताया कि कांवड़ यात्रियों की सेवा उनके लिए आस्था, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का संगम है।
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जाट धर्मशाला में रोजाना सैकड़ों श्रद्धालुओं के लिए भंडारा लगाया जाता है। भोजन तैयार करने से लेकर परोसने और पूरी व्यवस्था संभालने तक परिवार का प्रत्येक सदस्य सक्रिय भूमिका निभाता है। परिवार की महिलाएं भी पूरे उत्साह और समर्पण के साथ सेवा कार्य में बराबर की भागीदारी निभाती हैं।
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कांवड़ियों की तकलीफ देखी तो लग गए सेवा में
सेवादार मोहन लाल सर्राफ ने बताया कि 54 साल पहले वह खुद कांवड़ लेने के लिए पहली बार गए थे। उस समय हरिद्वार जाने के लिए पर्याप्त साधन नहीं होते थे। ये समस्याएं उन्होंने कई साल तक देखी। उस समय आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण वह चेन्नई चले गए। जैसे ही उनकी आर्थिक स्थिति सही हुई तो साल 2008 में उन्होंने अपने बच्चाें को कांवड़ लेने के लिए हरिद्वार भेजा और खुद जाट धर्मशाला में शिविर लगाकर सेवा करने लग गए।
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पांच दिन तक चलेगा भंडारा
कांवड़ियों के लिए सुबह-शाम भंडारा तैयार होता है। उनका परिवार ही भोजन तैयार करके कांवड़ियों को खिलाता है। परिवार की तीन पीढ़ियां यहां सेवाएं दे रही हैं। जाट धर्मशाला में शिविर लगाने वाले मोहनलाल सराफ बताते हैं कि वे कांवड़ियों की सेवा के लिए व्यवस्था करते हैं। वे खुद तो यहां सेवा करते ही हैं, इस काम में उनके भाई महावीर सर्राफ, मोहन लाल सर्राफ, बड़े बेटे भजनलाल सर्राफ, छोटे बेटे चंद्रप्रकाश सर्राफ, पोते मयंक, लवयश व भतीजा सुमित भी हाथ बंटाते हैं। उनके चचेरे भाई का परिवार भी यहां सेवा देता है। पांच दिन तक कांवड़ियों के लिए खाने-पीने व रहने की पूरी व्यवस्था की जाती है।

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चेन्नई में भी करवाते हैं धार्मिक आयोजन
मोहन लाल सर्राफ ने बताया कि फतेहाबाद उनकी जन्मभूमि है तो चेन्नई उनकी कर्मभूमि है। वह पिछले पांच साल से चेन्नई में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन करवाते हैं। जहां हजारों की संख्या स्थानीय लोग भाग लेते हैं। सात दिनों तक चलने वाली इस कथा में रोजाना भंडारे की भी व्यवस्था की जाती है।
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