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Fatehabad News: फसल अवशेष जलाने पर 15 किसानों पर केस
Fri, 07 Nov 2025 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Fri, 07 Nov 2025 11:48 PM IST
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फतेहाबाद के माजरा के पास फसल अवशेष में लगाई आग से उठता धुएं का गुब्बार। फाइल फोटो
फतेहाबाद। जिले में धान की कटाई अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। कटाई में तेजी के साथ ही खेतों में फसल अवशेष जलाने के मामले भी सामने आ रहे हैं। प्रशासन की सख्ती और जागरूकता अभियानों के चलते इस साल यह संख्या पिछले साल की तुलना में काफी कम रही है।
हालांकि जिले में पूरी तरह से फसल अवशेष जलाने पर रोक नहीं लग सकी है। पिछले दो दिनों में जिले के रतिया और टोहाना क्षेत्रों में तीन स्थानों पर फसल अवशेष जले हैं। हरसेक के अनुसार, इस साल जिले में अब तक 31 स्थानों पर पराली में आग लगाने की घटनाएं सामने आई हैं। वहीं, पिछले साल इसी समय यह संख्या 70 थी।
31 मामलों में से 15 स्थानों पर किसानों द्वारा फसल अवशेष जलाने की पुष्टि हुई है। इन सभी मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज की गई है। कृषि विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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:: कृषि एवं कल्याण विभाग की ओर से किसानों को पराली जलाने के नुकसान के बारे में जागरूक कर रहा है। इसके साथ ही, किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सब्सिडी पर मशीनें जैसे कि बेलर, सुपर सीडर, और हैप्पी सीडर उपलब्ध कराई जा रही हैं। किसानों से अपील है कि वे फसल अवशेषों में आग ना लगाएं। प्रदेश सरकार की ओर से पराली प्रबंधन पर प्रति एकड़ 1200 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है।
-डॉ. राजपाल, तकनीकी सहायक कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।
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हालांकि जिले में पूरी तरह से फसल अवशेष जलाने पर रोक नहीं लग सकी है। पिछले दो दिनों में जिले के रतिया और टोहाना क्षेत्रों में तीन स्थानों पर फसल अवशेष जले हैं। हरसेक के अनुसार, इस साल जिले में अब तक 31 स्थानों पर पराली में आग लगाने की घटनाएं सामने आई हैं। वहीं, पिछले साल इसी समय यह संख्या 70 थी।
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31 मामलों में से 15 स्थानों पर किसानों द्वारा फसल अवशेष जलाने की पुष्टि हुई है। इन सभी मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज की गई है। कृषि विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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:: कृषि एवं कल्याण विभाग की ओर से किसानों को पराली जलाने के नुकसान के बारे में जागरूक कर रहा है। इसके साथ ही, किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सब्सिडी पर मशीनें जैसे कि बेलर, सुपर सीडर, और हैप्पी सीडर उपलब्ध कराई जा रही हैं। किसानों से अपील है कि वे फसल अवशेषों में आग ना लगाएं। प्रदेश सरकार की ओर से पराली प्रबंधन पर प्रति एकड़ 1200 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है।
-डॉ. राजपाल, तकनीकी सहायक कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।