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Fatehabad News: खेत-खलिहान में हरियाली लाओ, अपने नाम का सब पेड़ लगाओ
Sun, 24 May 2026 10:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 24 May 2026 10:53 PM IST
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फतेहाबाद। कवि गोष्ठी में मुख्यअतिथि डॉ. ओमप्रकाश कादयान को सम्मानित करते संस्था सदस्य। विज्ञप्
फतेहाबाद। हरियाणा कला संस्कृति मंच की ओर से मताना में साहित्यिक कार्यक्रम एवं कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आयोजक कवि रणधीर मताना ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. ओमप्रकाश कादयान पहुंचे। वहीं डॉ. सुदामा शास्त्री ने मंच संचालन किया।
नीर धरोहर सोसाइटी की अध्यक्ष मुकेश वर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। काव्य गोष्ठी के दौरान वरिष्ठ कवि डॉ. सुरेश पंचारिया, डॉ. बलराज शर्मा यथार्थ, कपिल देव, दिवाकर जयन्त, रणधीर मताना, मुकेश वर्मा, देवेन्द्र अशंक, डॉ. सुदामा शास्त्री ने काव्य पाठ के माध्यम से वाहवाही लूटी।
डॉ. बलराज शर्मा ने गगन बीच रुक तनिक चन्द्रमा, कुछ पल तुमसे बात करूं, जो-जो सुना है तेरी महिमा में, उनको आत्मसात करूं, कविता के माध्यम से प्रकृति प्रेम जाहिर किया। युवा कवि व प्राध्यापक कवि कपिल देव ने शहर में रह रहे लोगों की छवि इस तरह से उभारी सेक्टर में रहने वाले लोग मुझे क्यूं बन्द चिडि़या से लगते हैं, बाल सुनहरी पन्नी में लिपटे, चीनी गुडि़या से लगते हैं। एक धड़ा कुछ गज में बसा, गर्जन गजराज सी करते हैं।’
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मुकेश रानी वर्मा ने बिगड़ते पर्यावरणीय सन्तुलन को सुधारने के लिए पौधरोपण कर उनके संरक्षण पर जोर दिया और कहा खेत-खलिहान में हरियाली लाओ, अपने नाम का सब पेड़ लगाओ। वहीं बाल कवि हिमांशु वर्मा ने अपनी भावनाएं, आज आसमान में बदल मंडराया, पेड़ लगाने का मौसम है आया कविता पढ़ कर व्यक्त की।
वरिष्ठ कवि डॉ. सुरेश पंचारिया ने सीख बुजुर्गों और गुरुजनों की, जिन्हें नहीं सुहाती है पंक्तियों के माध्यम से सच्चा जीवन व जीने की बड़ी सीख दी। वैदिक प्रवक्ता डॉ. सुदामा शास्त्री अपने मन के विचार व्यक्त करते हुए कहा किसी के काम आने से इंसान महान बन जाता है, दूसरों के दर्द बांटने से जन देव बन जाते हैं।
युवा कवि तथा संस्था के अध्यक्ष रणधीर मताना ने अपनी कविता में पक्षियों की चहचहाहट, भंवरों का मधुर गुंजन, तितलियों की रंगीन उडान, बादलों की गड़गड़ाहट का चित्रण कर प्राकृतिक सौंदर्य का रसपान करवाया। प्राध्यापक व कवि दिवाकर जयंत ने पर्यावरण प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की, पॉलिथीन अर आया प्लास्टिक, केमिकल फैलावै सै, बणा दी हवा भी जहरीली, धरती ने भी खावै सै।
युवा कवि देवेन्द्र अशंक ने भी बिगड़ते पर्यावरणीय माहौल पर चिंता जताई और कहा ‘विकास के नाम पर हो रहा विनाश है, कट रहे पेड़, सूख रही नदियां, मिट रहे पहाड़ हैं।’ मुख्य अतिथि डॉ. ओमप्रकाश कादयान ने सभी कवियों व साहित्य प्रेमियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज हमारा देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया कई तरह की समस्याओं से जूझ रही है। मनुष्य भौतिक सुविधाओं व आर्थिक धन-सम्पत्ति, जमीन के लालच में बेहद लालची होता जा रहा है।
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नीर धरोहर सोसाइटी की अध्यक्ष मुकेश वर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। काव्य गोष्ठी के दौरान वरिष्ठ कवि डॉ. सुरेश पंचारिया, डॉ. बलराज शर्मा यथार्थ, कपिल देव, दिवाकर जयन्त, रणधीर मताना, मुकेश वर्मा, देवेन्द्र अशंक, डॉ. सुदामा शास्त्री ने काव्य पाठ के माध्यम से वाहवाही लूटी।
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डॉ. बलराज शर्मा ने गगन बीच रुक तनिक चन्द्रमा, कुछ पल तुमसे बात करूं, जो-जो सुना है तेरी महिमा में, उनको आत्मसात करूं, कविता के माध्यम से प्रकृति प्रेम जाहिर किया। युवा कवि व प्राध्यापक कवि कपिल देव ने शहर में रह रहे लोगों की छवि इस तरह से उभारी सेक्टर में रहने वाले लोग मुझे क्यूं बन्द चिडि़या से लगते हैं, बाल सुनहरी पन्नी में लिपटे, चीनी गुडि़या से लगते हैं। एक धड़ा कुछ गज में बसा, गर्जन गजराज सी करते हैं।’
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मुकेश रानी वर्मा ने बिगड़ते पर्यावरणीय सन्तुलन को सुधारने के लिए पौधरोपण कर उनके संरक्षण पर जोर दिया और कहा खेत-खलिहान में हरियाली लाओ, अपने नाम का सब पेड़ लगाओ। वहीं बाल कवि हिमांशु वर्मा ने अपनी भावनाएं, आज आसमान में बदल मंडराया, पेड़ लगाने का मौसम है आया कविता पढ़ कर व्यक्त की।
वरिष्ठ कवि डॉ. सुरेश पंचारिया ने सीख बुजुर्गों और गुरुजनों की, जिन्हें नहीं सुहाती है पंक्तियों के माध्यम से सच्चा जीवन व जीने की बड़ी सीख दी। वैदिक प्रवक्ता डॉ. सुदामा शास्त्री अपने मन के विचार व्यक्त करते हुए कहा किसी के काम आने से इंसान महान बन जाता है, दूसरों के दर्द बांटने से जन देव बन जाते हैं।
युवा कवि तथा संस्था के अध्यक्ष रणधीर मताना ने अपनी कविता में पक्षियों की चहचहाहट, भंवरों का मधुर गुंजन, तितलियों की रंगीन उडान, बादलों की गड़गड़ाहट का चित्रण कर प्राकृतिक सौंदर्य का रसपान करवाया। प्राध्यापक व कवि दिवाकर जयंत ने पर्यावरण प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की, पॉलिथीन अर आया प्लास्टिक, केमिकल फैलावै सै, बणा दी हवा भी जहरीली, धरती ने भी खावै सै।
युवा कवि देवेन्द्र अशंक ने भी बिगड़ते पर्यावरणीय माहौल पर चिंता जताई और कहा ‘विकास के नाम पर हो रहा विनाश है, कट रहे पेड़, सूख रही नदियां, मिट रहे पहाड़ हैं।’ मुख्य अतिथि डॉ. ओमप्रकाश कादयान ने सभी कवियों व साहित्य प्रेमियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज हमारा देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया कई तरह की समस्याओं से जूझ रही है। मनुष्य भौतिक सुविधाओं व आर्थिक धन-सम्पत्ति, जमीन के लालच में बेहद लालची होता जा रहा है।