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Fatehabad News: ग्वार उत्पादक क्षेत्रों में झुलसा रोग का प्रकोप शुरू, वैज्ञानिकों ने दी रोकथाम की सलाह
Tue, 29 Jul 2025 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 29 Jul 2025 12:23 AM IST
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गांव मोरका में किसानों को फसल संबंधी जानकारी देते डॉ. आरके सैनी। स्रोत : आयोजक
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भिवानी। जिले में बीते कुछ सप्ताह से लगातार बनी नमी के कारण ग्वार उत्पादक क्षेत्रों में झुलसा रोग का प्रकोप शुरू हो गया है। यह रोग एक जीवाणु के कारण फैलता है जिसमें पौधों की पत्तियां गलने लगती हैं और झड़ जाती हैं। कई मामलों में यह रोग तनों तक पहुंच जाता है, जिससे पूरा पौधा मुरझा कर सूख जाता है।
सिवानी खंड के गांव मोरका में कृषि विभाग व हिंदुस्तान गम एंड कैमिकल्स भिवानी द्वारा आयोजित कृषि शिविर में किसानों को इस रोग के लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम में एचएयू हिसार के कीट विज्ञान विभाग से सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. आरके सैनी ने बताया कि झुलसा रोग की रोकथाम के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन दवा की प्रति एकड़ 30 ग्राम मात्रा में स्प्रे प्रभावी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने किसानों को यह भी सलाह दी कि वे विभिन्न कीटों व रोगों के लक्षणों की पहचान कर ही उचित दवा का चयन करें।
इससे पूर्व कृषि विभाग के विषय विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार ने किसानों को मूंग और बाजरा की फसलों से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के तरीके बताए। उन्होंने जैविक खादों के अधिक उपयोग पर बल देते हुए कहा कि इससे भूमि की जल-धारण क्षमता बढ़ती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। शिविर के दौरान किसानों को ग्वार से संबंधित पाठ्य सामग्री व स्प्रे दवाएं भी वितरित की गईं। इस अवसर पर हिंदुस्तान गम एंड कैमिकल्स की ओर से अंकुश शर्मा ने पौधों की जड़ क्षेत्र में नमी बनाए रखने के लिए ‘अंकुरायम’ नामक उत्पाद को फसल बुवाई के समय प्रयोग करने की सलाह दी। शिविर में दलेल सिंह, मुकेश, दिलबाग, राजेश, भूरा राम, राजवीर, कुलदीप सहित करीब 60 किसानों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से फसल सुरक्षा और उत्पादन बढ़ाने से जुड़ी जानकारी प्राप्त की।
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सिवानी खंड के गांव मोरका में कृषि विभाग व हिंदुस्तान गम एंड कैमिकल्स भिवानी द्वारा आयोजित कृषि शिविर में किसानों को इस रोग के लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम में एचएयू हिसार के कीट विज्ञान विभाग से सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. आरके सैनी ने बताया कि झुलसा रोग की रोकथाम के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन दवा की प्रति एकड़ 30 ग्राम मात्रा में स्प्रे प्रभावी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने किसानों को यह भी सलाह दी कि वे विभिन्न कीटों व रोगों के लक्षणों की पहचान कर ही उचित दवा का चयन करें।
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इससे पूर्व कृषि विभाग के विषय विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार ने किसानों को मूंग और बाजरा की फसलों से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के तरीके बताए। उन्होंने जैविक खादों के अधिक उपयोग पर बल देते हुए कहा कि इससे भूमि की जल-धारण क्षमता बढ़ती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। शिविर के दौरान किसानों को ग्वार से संबंधित पाठ्य सामग्री व स्प्रे दवाएं भी वितरित की गईं। इस अवसर पर हिंदुस्तान गम एंड कैमिकल्स की ओर से अंकुश शर्मा ने पौधों की जड़ क्षेत्र में नमी बनाए रखने के लिए ‘अंकुरायम’ नामक उत्पाद को फसल बुवाई के समय प्रयोग करने की सलाह दी। शिविर में दलेल सिंह, मुकेश, दिलबाग, राजेश, भूरा राम, राजवीर, कुलदीप सहित करीब 60 किसानों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से फसल सुरक्षा और उत्पादन बढ़ाने से जुड़ी जानकारी प्राप्त की।
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