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हड़ताल से बैंकों की 89 शाखाएं रहीं बंद, उपभोक्ता परेशान
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हड़ताल के कारण बंद पड़ा पीएनबी।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। अपनी मांगों के समर्थन में राष्ट्रीयकृत बैंक कर्मचारियों ने यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर शुक्रवार से हड़ताल कर दी। दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन जिलाभर के 19 बैंकों की 89 शाखाएं बंद रहीं और कामकाज नहीं हुआ। हड़ताल के पहले दिन करीब 60 करोड़ का लेनदेन प्रभावित रहा तथा लोगों को वित्तीय लेनदेन संबंधी काफी परेशानी का सामना उठाना पड़ा। हालांकि निजी बैंक आईसीआईसीआई व एचडीएफसी बैंक खुले रहे।
बैंक कर्मचारियों ने सुबह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के आगे एकत्रित होकर अपनी मांगों के संदर्भ में नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगे शीघ्र नहीं मानी गई तो बैंक कर्मचारी 11 से 13 मार्च को फिर तीन दिवसीय हड़ताल रखेंगे। फिर भी अगर कोई विचार नहीं हुआ तो 1 अप्रैल से सभी बैंक कर्मचारी अनिश्चिकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
केंद्र सरकार द्वारा लंबित वेतन वृद्धि समझौता व अन्य मुख्य मांगों को लेकर सरकार के नकारात्मक रवैये के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले एसबीआई ब्रांच के सामने एकत्रित होकर रोष मार्च निकाला। इस रोष प्रदर्शन का नेतृत्व बीईएफआर्ई के प्रदेश सचिव बीएस सेठी व एसबीआई एसए के क्षेत्रीय सचिव जगदीश मोंगा व अशोक बाघला ने किया।
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60 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित रहा
शुक्रवार को हड़ताल के पहले दिन क्लीयरिंग हाउस बंद रहने से चेकों का समाशोधन नहीं हो पाया, जिस कारण अन्य बैंकों के क्लीयरिंग हाउस में पड़े चेक का निपटारा नहीं हुआ और करीब 60 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित रहा।
ये हैं मांगे
बैंक कर्मचारी पिछले लंबे समय से अपनी समस्या को लेकर समय-समय पर हड़ताल करते आए हैं। इनमें मुख्य रूप से वेतन में 20 फीसदी वृद्धि करना, सप्ताह में 5 कार्यदिवस करना, नई पेंशन योजना को समाप्त करना, पारिवारिक पेंशन में सुधार करना, सेवानिवृत्ति लाभ पर आयकर में छूट देना, अवकाश को बैंकों में लागू करना तथा कागकाज का समय निर्धारित करना शामिल है।
उपभोक्ताओं का कहना
बैंक से नकदी निकलवाने आए मदन मेहता ने कहा कि हड़ताल की सूचना नहीं होने के कारण वह बैंक आया, लेकिन यहां आकर देखा कि बैंक बंद है। इसलिए उसे निराशा हो रही है।
मॉडल टाऊन निवासी कर्ण सिंह ने कहा कि उसने अपने काम के सिलसिले में डीडी बनवाना था, लेकिन बैंक में पहुंचा तो बैंक बंद था। उसके ड्राफ्ट भेजने की आज अंतिम तिथि थी। उसके बाद उसे नुकसान हो जाएगा।
अनाज मंडी के व्यापारी सुभाष मुंजाल ने कहा कि वह सुबह बैंक में पैसे जमा करवाने गया, लेकिन हड़ताल की सूचना पाकर पैसे वापस लाकर रख दिए, जबकि उसने यह पैसे व्यापार के सिलसिले में दिल्ली भेजने थे।
सरकारी कर्मचारी शर्मा चंद ने कहा कि उसने विभाग के पैसे जमा करवाने थे, लेकिन बैंक में हड़ताल के कारण उसे वापस आना पड़ा। सोमवार तक राशि घर में संभाल कर रखनी पड़ेगी।
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बैंक कर्मचारियों ने सुबह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के आगे एकत्रित होकर अपनी मांगों के संदर्भ में नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगे शीघ्र नहीं मानी गई तो बैंक कर्मचारी 11 से 13 मार्च को फिर तीन दिवसीय हड़ताल रखेंगे। फिर भी अगर कोई विचार नहीं हुआ तो 1 अप्रैल से सभी बैंक कर्मचारी अनिश्चिकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
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केंद्र सरकार द्वारा लंबित वेतन वृद्धि समझौता व अन्य मुख्य मांगों को लेकर सरकार के नकारात्मक रवैये के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले एसबीआई ब्रांच के सामने एकत्रित होकर रोष मार्च निकाला। इस रोष प्रदर्शन का नेतृत्व बीईएफआर्ई के प्रदेश सचिव बीएस सेठी व एसबीआई एसए के क्षेत्रीय सचिव जगदीश मोंगा व अशोक बाघला ने किया।
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60 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित रहा
शुक्रवार को हड़ताल के पहले दिन क्लीयरिंग हाउस बंद रहने से चेकों का समाशोधन नहीं हो पाया, जिस कारण अन्य बैंकों के क्लीयरिंग हाउस में पड़े चेक का निपटारा नहीं हुआ और करीब 60 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित रहा।
ये हैं मांगे
बैंक कर्मचारी पिछले लंबे समय से अपनी समस्या को लेकर समय-समय पर हड़ताल करते आए हैं। इनमें मुख्य रूप से वेतन में 20 फीसदी वृद्धि करना, सप्ताह में 5 कार्यदिवस करना, नई पेंशन योजना को समाप्त करना, पारिवारिक पेंशन में सुधार करना, सेवानिवृत्ति लाभ पर आयकर में छूट देना, अवकाश को बैंकों में लागू करना तथा कागकाज का समय निर्धारित करना शामिल है।
उपभोक्ताओं का कहना
बैंक से नकदी निकलवाने आए मदन मेहता ने कहा कि हड़ताल की सूचना नहीं होने के कारण वह बैंक आया, लेकिन यहां आकर देखा कि बैंक बंद है। इसलिए उसे निराशा हो रही है।
मॉडल टाऊन निवासी कर्ण सिंह ने कहा कि उसने अपने काम के सिलसिले में डीडी बनवाना था, लेकिन बैंक में पहुंचा तो बैंक बंद था। उसके ड्राफ्ट भेजने की आज अंतिम तिथि थी। उसके बाद उसे नुकसान हो जाएगा।
अनाज मंडी के व्यापारी सुभाष मुंजाल ने कहा कि वह सुबह बैंक में पैसे जमा करवाने गया, लेकिन हड़ताल की सूचना पाकर पैसे वापस लाकर रख दिए, जबकि उसने यह पैसे व्यापार के सिलसिले में दिल्ली भेजने थे।
सरकारी कर्मचारी शर्मा चंद ने कहा कि उसने विभाग के पैसे जमा करवाने थे, लेकिन बैंक में हड़ताल के कारण उसे वापस आना पड़ा। सोमवार तक राशि घर में संभाल कर रखनी पड़ेगी।