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Fatehabad News: टोहाना उपमंडल में 56,000 से ज्यादा एकड़ में गांठें बनाई जा चुकी

Tue, 05 Nov 2024 02:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Tue, 05 Nov 2024 02:53 AM IST
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Bales have been made in more than 56,000 acres in Tohana
कुलां क्षेत्र में धान की पराली की गांठें बनाता बेलर चालक।
संजीव ठाकुर
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कुलां। धान के अवशेष जलाने पर रोक लगाने के लिए प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन की ओर से की गई सख्ती और जागरूकता का असर इस बार देखने को मिल रहा है। धान अवशेष (पराली) का उपयोग अब गत्ता और इथेनॉल तैयार करने के लिए होने लगा है।
टोहाना उपमंडल क्षेत्र के किसान क्षेत्र में पराली की बेलर मशीन से गांठें बनवाकर प्लांट में भेज रहे हैं, जहां पर इसका निस्तारण हो रहा है। उम्मीद है कि इससे पराली जलाने से होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा।
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टोहाना उपमंडल में 1,12,750 एकड़ भूमि में धान की बिजाई की गई थी। इसमें से करीब 80 फीसदी 90,200 एकड़ में से धान की कटाई का कार्य पूरा हो गया है। कृषि विभाग के अनुसार बेलरों से 56,375 एकड़ भूमि से धान की पराली की गांठें तैयार करके प्लांट में भेजी जा चुकी हैं।
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यह अब तक काटी गई धान का 62.5 फीसदी आंकड़ा है। बेलर संचालक बेलरों से पराली के रोल बनाकर सीमांत क्षेत्र में प्लांट को भेज रहे हैं। इससे प्रशासन के साथ-साथ किसानों को काफी राहत मिल रही है।

कुलां क्षेत्र में होती है सबसे अधिक धान की फसल
कुलां देहात क्षेत्र में ज्यादातर धान फसल का उत्पादन ही किया जाता है। इसलिए यहां पर पराली प्रबंधन पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। दिवाली से पहले हर साल पराली जलाने की अनेकों घटनाएं सामने आती हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है। शासन और प्रशासन के लिए सिरदर्द बनी किसानों के खेतों में जलने वाली धान की पराली का निस्तारण क्षेत्र में बेलरों से किया जा रहा है। किसान खेत में पराली न जलाएं, इसके लिए इस बार शासन और प्रशासन बेहद गंभीर है। तहसील, खंड व ग्राम पंचायत स्तरों पर निगरानी समितियों का गठन किया गया है। धान की कटाई के बाद पराली के निस्तारण के लिए स्थानीय किसानों के कई बेलर क्षेत्र में पराली उठाने के लिए लगाए गए हैं।


किसान जान-बूझकर पराली नहीं जलाते हैं। अगर उन्हें धान की कटाई के बाद तुरंत बेलर मिल जाएं तो गांठें बनवाने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। इस बार पहले से अधिक जागरूकता बढ़ी है। - अंकित धालीवाल, ग्रामीण, गांव नन्हेड़ी

किसान स्वयं भी अब जागरूक होने लगा है। पराली का प्रबंधन करवाने में किसान दिलचस्पी ले रहा है। यही कारण है कि इस बार पिछले सालों के मुकाबले बेहद कम पराली जलाने के मामले आए हैं। - जरनैल सिंह, ग्रामीण, गांव नन्हेड़ी

कुलां क्षेत्र में अधिकतर किसान धान की फसल लेते हैं। बेलरों की मांग लगातार किसान कर रहे हैं, जिनको जल्दी मिल जाते हैं, वहां पराली की गांठें व रोल बनवाए जा रहे हैं। - गुरशरण अटवाल, ग्रामीण, गांव नन्हेड़ी

कुलां क्षेत्र में बेलर संचालक बेलरों से पराली के रोल बनाकर आसपास के क्षेत्र में प्लांट को भेज रहे हैं। इससे प्रशासन के साथ-साथ किसानों को काफी राहत मिल रही है। - जसवंत सिंह, ग्रामीण, गांव धारसूल


धान के अवशेष न जलाने को लेकर इस बार किसान अधिक जागरूक हुए हैं। इस बार खेतों में धान की पराली जलाने के 34 केस सामने आए हैं जबकि बीते साल अब तक 126 केस आ गए थे। लगातार जागरूकता का असर दिख रहा है। - डॉ. मुकेश मेहला, उपमंडल कृषि अधिकारी, टोहाना
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