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Fatehabad News: विश्व श्रवण दिवस पर आयोजित होंगे जागरुकता कार्यक्रम
Mon, 04 Mar 2024 11:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 04 Mar 2024 11:05 PM IST
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फतेहाबाद। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. महेंद्र भादू ने जिले के सभी वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों व चिकित्सा अधिकारियों को विश्व श्रवण दिवस पर मार्च से अगले एक सप्ताह तक जागरूकता कार्यक्रम करने के निर्देश दिए हैं। इस सप्ताह के दौरान जिले के सरकारी अस्पतालों द्वारा शिविर लगाए जाएंगे।
शिविर के दौरान चिकित्सा अधिकारियों द्वारा बहरेपन से संबंधित लोगों की जांच की जाएगी तथा इसके प्रति आमजन को जागरूक किया जाएगा। स्कूल अध्यापक, महिला मंडल व आंगनबाड़ी सुपरवाइजरों का सहयोग लेकर उनको भी जागरूक किया जाएगा। डॉ.भादू ने बताया कि यह दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को बहरेपन की समस्या के कारण और निवारण के प्रति जागरूक व सचेत करना है। इसके साथ लोगों को यह जानकारी भी दी जाती है कि कैसे अपने कान के स्वास्थ्य पर ध्यान दे सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2007 में विश्व श्रवण दिवस हर साल 3 मार्च को मनाने की घोषणा की थी। डॉ. महेंद्र भादू ने बताया कि बधिरता या बहरापन एक आम बीमारी है। इस विकार की स्थिति में सुनने की शक्ति कम हो जाती है। इसके साथ ही व्यक्ति की सामाजिक व मानसिक परेशानियां भी बढ़ जाती हैं। बहरापन सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है।
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बहरापन के लक्षण
कान में मैल, सिर या कान में चोट, ज्यादा शोर, वृद्धावस्था, दवाई जो श्रवण शक्ति को कमजोर करती है, रूबैला अथवा अन्य संक्रमण।
सुनने की समस्या के कारण
आवाज बढ़ाने की कोशिश करते हैं, बातचीत के कुछ हिस्से सुन नहीं पाते, अक्सर लोगों को शब्द अथवा वाक्य दोहराने के लिए कहते हैं व कान में झनझनाहट जैसी आवाज महसूस करते हैं।
बहरेपन से बचाव के लिए क्या करें
शोर से बचे, आवाज कम रखें, कान के अंदर कुछ भी न डालें, संगीत समारोह और अन्य कार्यक्रमों में इयरप्लग का उपयोग करें। 60 वर्ष या इससे अधिक आयु वाले व्यक्ति को नियमित रूप से कान की जांच करवायें, किशोरी बालिकाओं का रूबैला टीकाकरण, समस्या आने पर कान के स्पेशलिस्ट डॉक्टर को ही दिखायें व गंदे पानी में तैरने व नहाने से बचें।
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शिविर के दौरान चिकित्सा अधिकारियों द्वारा बहरेपन से संबंधित लोगों की जांच की जाएगी तथा इसके प्रति आमजन को जागरूक किया जाएगा। स्कूल अध्यापक, महिला मंडल व आंगनबाड़ी सुपरवाइजरों का सहयोग लेकर उनको भी जागरूक किया जाएगा। डॉ.भादू ने बताया कि यह दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को बहरेपन की समस्या के कारण और निवारण के प्रति जागरूक व सचेत करना है। इसके साथ लोगों को यह जानकारी भी दी जाती है कि कैसे अपने कान के स्वास्थ्य पर ध्यान दे सकते हैं।
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उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2007 में विश्व श्रवण दिवस हर साल 3 मार्च को मनाने की घोषणा की थी। डॉ. महेंद्र भादू ने बताया कि बधिरता या बहरापन एक आम बीमारी है। इस विकार की स्थिति में सुनने की शक्ति कम हो जाती है। इसके साथ ही व्यक्ति की सामाजिक व मानसिक परेशानियां भी बढ़ जाती हैं। बहरापन सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है।
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बहरापन के लक्षण
कान में मैल, सिर या कान में चोट, ज्यादा शोर, वृद्धावस्था, दवाई जो श्रवण शक्ति को कमजोर करती है, रूबैला अथवा अन्य संक्रमण।
सुनने की समस्या के कारण
आवाज बढ़ाने की कोशिश करते हैं, बातचीत के कुछ हिस्से सुन नहीं पाते, अक्सर लोगों को शब्द अथवा वाक्य दोहराने के लिए कहते हैं व कान में झनझनाहट जैसी आवाज महसूस करते हैं।
बहरेपन से बचाव के लिए क्या करें
शोर से बचे, आवाज कम रखें, कान के अंदर कुछ भी न डालें, संगीत समारोह और अन्य कार्यक्रमों में इयरप्लग का उपयोग करें। 60 वर्ष या इससे अधिक आयु वाले व्यक्ति को नियमित रूप से कान की जांच करवायें, किशोरी बालिकाओं का रूबैला टीकाकरण, समस्या आने पर कान के स्पेशलिस्ट डॉक्टर को ही दिखायें व गंदे पानी में तैरने व नहाने से बचें।